:पढ़ने का तरीक़ा: शब्द (वज़्न) सभी अर्थ

ताब (21)= ताप, शक्ति, धीरज, क्रोध
ताबिश (22)= ताप, वैभव, शोक, दु:ख
तासीर (221)= प्रभाव, छाप
ताज (21)= मुकुट
तारीख़ (221)= तिथि, इतिहास वर्णक्रम से लिखा हुआ
तारीक (221)= अन्धेरा, धुंधला
ताज़ा (22)= नया, नरम, प्रसन्न, ताजा
ताक (21)= दृष्टि, मान, लक्ष्य, दृष्य
तबाह (121)= विनष्ट, बिगड़ा हुआ, बुरा, दुष्ट
तब्दील (221)= बदलना
तबस्सुम (122)= मुस्कुराना, प्रसन्नचित्त भाव
तजरिबा (212)= प्रयोग, प्रमाण, अनुभव, जांच

तज’रबा या तज’रिबा (212) (تجربہ): तज’रबा का अर्थ है अनुभव. इस लफ़्ज़ को अक्सर करके लोग ‘तजुर्बा’ पढ़ते हैं जबकि ये सही नहीं है, सही लफ़्ज़ तजरबा है. इसमें पहले तज और फिर रबा पढ़ा जाएगा. शा’इरी में वज़्न करते वक़्त इस बात का विशेष ध्यान रखना होता है. नीचे दो शे’र दिए जा रहे हैं, इनकी तक़ती’अ करके देखा जा सकता है.

तोहफ़ा (212)= उपहार
तख्त़ (21)= सिंहासन, आसन
तदबीर (221)= विमर्श, विचार, शिक्षा, उपाय, आज्ञा, प्रबन्ध
तराना (122)= धुन, स्वर समता, एक प्रकार का गाना
तर्जुमान (2121)= अनुवादक
तर्स (21)= भय, आंतक
तरस (12)= दया, कृपा, क्षमा
तरक़्क़ी (122)= ऊंचाई, उन्नति, वृद्धि, सुधार
तरकीब (221)= संयोजन, मिश्रण, व्यवस्था, योजना, विधि
तसल्ली (122)= ढाढस, सन्तोष, आश्वासन
तस्लीम (221)= नम्स्कार, अभिनन्दन, स्मर्पण, अधीनता
तश्रीफ़ (221)= सम्मान करते हुए
तिश्नगी (212)= तृष्णा, प्यास, लालसा, अभिलाषा
तसव्वुर (122)= कल्पना, दिवास्वप्न, विचार
तसव्वुफ़ (122)= सूफ़ीपन, रहस्यवाद, गूढ़ ज्ञान
तस्वीर (221)= चित्र, रेखाचित्र, छवि
त’अज्जुब (122)= अचम्भा, विस्मय, आश्चय

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