:पढ़ने का तरीक़ा: शब्द (वज़्न) सभी अर्थ

शंका(22) संशय, संदेह, शक ; भय, अंदेशा, खटका।
शंख(2) समुद्र में पैदा होने वाला एक जंतु का कड़ा और सफेद खोल ; दस खर्ब अथवा एक लाख करोड़ की संख्या।
शकुन(12) विशिष्ट पशु-पक्षी, व्यक्ति, वस्तु, व्यापार आदि के देखने-सुनने, होने आदि से मिलने वाली शुभ-अशुभ की पूर्व-सूचना।
शक्कर(22) चीनी ; कच्ची चीनी, खांड।
शक्ति(21) पराक्रम, बल, सामर्थ्य; दुर्गा।
शक्तिशाली(2122) बलवान, शक्ति संपन्न।
शताब्दी(1212) सौ वर्षों की अवधि, शती, सदी।
शत्रु(22) वैरी, दुश्मन।
शपथ(12) सौगंध, क़सम।
शब्दकोश(2121) वह ग्रंथ जिसमे शब्दों के सम्यक् वर्ण विन्यास, अर्थ प्रयोग, पर्याय आदि हों।
शमन(12) बढ़े हुए उपद्रव, कष्ट, दोष को दबाने की क्रिया, दमन ; शांति।
शरण(12) आश्रय, संरक्षण, पनाह।
शरणार्थी(2212) शरण चाहने वाला, असहाय ; किसी अन्य देश में भागकर शरण लेने के लिए आया हुआ, विस्थापित।
शरमाना(222) झेंपना ; लज्जित होना।
शराब(121) मद्य, मदिरा।
शरीर(121) देह, तन, जिस्म।
शल्य-क्रिया(2122) शारीरिक विकार को दूर करने के लिए की जाने वाली चीर-फाड़।
शव-परीक्षा(2122) मृत व्यक्ति के शव की मृत्यु के कारणों की जाँच के लिए की जाने वाली परीक्षा या जाँच (पोस्ट मार्टम)।
शस्त्र(22) हाथ मे रखकर प्रयोग किया जाने वाला हथियार।
शहद(12) मधु (हनि)।
शहीद(121) अपने धर्म, सदाचार, कर्त्तव्य-परायणता के लिए अथवा देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण देने वाला

शब ब’खै़र(2121) (شب بخیر) – इसका अर्थ है आपकी रात खै़र से गुज़रे. अक्सर इसे लोग शब्बा-खै़र कहते हैं जबकि सही लफ़्ज़ शब-ब’खै़र है.

शमअ'(21) (شمع): शम’अ का अर्थ है चराग़, मोमबत्ती, दीपक. इस लफ़्ज़ को अक्सर लोग शम्मा कहते हुए सुनाई देते हैं जबकि ये उच्चारण ग़लत है. इसको सही तरह से शमअ’ ही कहा जाता है. शम’अ का वज़्न 21 होगा (शम-2, अ’-1).

शांत(21) आवेग, चंचलता, वासना अथवा विकास से रहित ; नि:शब्द, नीरव, चुप, मौन।
शांति(21) नीरवता, सन्नाटा, स्तब्धता ; उत्पाद, उपद्रव, कलह आदि से रहित अवस्था, अमन ; आराम, चैन।
शाकाहारी(2222) मांस न खाने वाला, निरामिष भोजी।
शानदार(2121) भड़कीला, तड़क-भड़क वाला ; ऐश्वर्यपूर्ण, उच्च कोटि का।
शाप(21) अनिष्ट कामना के उद्देश्य से कहा गया कथन, अभिशाप, बद्दुआ।
शायद(22) कदाचित, संभवत:
शायिका(212) शयनिका (स्लीपर)
शालीन(221) लज्जाशील, शुशील, शिष्ट।
शाश्वत(212) सतत्, स्थायी, नित्य, सनातन।
शासक(22) शासन करने वाला व्यक्ति, शासन-कर्ता।
शासन(22) सरकार, हुकूमत; सरकार या किसी अन्य द्वारा नियन्त्रण, संचालन, व्यवस्था आदि।
शास्त्र(212) धर्म ग्रंथ ; किसी कला, विद्या या विशिष्ट विषय का सांगोपांग ग्रंथ, विज्ञान।
शिकायत(122) किसी के दोष या अनुचित काम का किसी के समक्ष किया गया कथन

शिकार(121) मृगया, आखेट ; मृगया अथवा आखेट में मारा या पकड़ा गया पशु-पक्षी।
शिक्षा(22) किसी प्रकार के ज्ञान के सीखने-सिखाने का क्रम, पढ़ाई या उक्त प्रकार से प्राप्त ज्ञान या विद्या ; उपदेश, सबक, नसीहत।

शिखर(12) किसी चीज का सबसे ऊपरी भाग, सिरा, चोटी, कलश, कंगूरा (मंदिर, मकान के संदर्भ में) ; पर्वत की चोटी।

शिथिल(12) जो कसकर बंधा न हो ढीला ; आलसी, सुस्त ; जिसे कुछ छूट दी गई हो, जिसका पालन दृढ़तापूर्वक न हो।
शिरकत(22) शरीक होने की अवस्था क्रिया या भाव, मिलना ; साझेदारी।
शिरोमणि(122) सिर या मस्तक पर धारण करने का रत्न, चूड़ामणि ; श्रेष्ठ पुरुष। सर्वश्रेष्ठ।
शिलान्यास(1221) नए भवन की नींव के रूप में पत्थर रखना ; नींव रखने का कृत्य या समारोह।
शिलालेख(1221) पत्थर पर गुदा हुआ लेख ; लेख आदि से गुदा हुआ पत्थर।
शिल्प(21) हस्तकला, दस्तकारी ; रचना विधान, निर्माण ; स्थापत्य, वास्तुकला।
शिल्पकार(2121) शिल्पी, कारीगर।
शिल्पी(22) शिल्प संबंधी काम करने वाला, शिल्पकार।
शिविर(12) पड़ाव, छावनी; खेमा, तंबू।
शिशु(21) बहुत ही छोटा बच्चा; सात आठ वर्ष की अवस्था तक का बच्चा।
शिष्ट(21) सभ्य, सज्जन।
शिष्टता(212) शिष्ट होने की अवस्था गुण भाव, सौजन्य।
शिष्टाचार(21221) शिष्टापूर्ण आचरण और व्यवहार ; औपचारिक आचरण।
शिष्य(21) छात्र, विद्यार्थी ; अनुयायी, चेला।
शीघ्र(22) जल्द, अविलंब, तुरंत, फ़ौरन।
शीघ्रता(222) जल्दी ; तेजी, फुर्ती।
शीतल(22) ठंडा, सर्द ; आवेशरहित, शांत, सौम्य।
शीर्ष(22) किसी चीज का सबसे ऊपरी तथा उन्नत सिरा ; सिर

शीर्षक(212) किसी लेख अथवा ग्रंथ आदि के ऊपर दिया जाने वाला नाम जिससे उनके विषय का कुछ परिचय मिलता है (टाइटल)।

शीशा(22) दर्पण, आईना।
शुद्ध(21) पवित्र, निर्मल ; मिलावट रहित, असली ; अशुद्धि, गलती या भूल से रहित, ठीक, सही।
शुभ-चिंतक(222) किसी की भलाई की सोचने वाला, शुभेच्छु।
शुभागमन(1212) मंगलप्रद या सुखद आगमन।
शुरु(12) आरंभ, प्रारंभ।

शुरू’अ (121) (شروع) – शुरू’अ का अर्थ है “प्रारम्भ करना”. इस शब्द को अक्सर लोग ‘शुरू’ बोलते हैं जबकि सही तरीक़ा शुरू’अ है. ऐसा होने की वजह से इसका वज़्न 121(शु=1,रू=2,अ=1) होगा वहीँ अगर शुरू बोलेंगे तो वज़्न 12 होता (शु-1,रू-2)

शुल्क(21) वह धन जो वस्तुओं की उत्पत्ति, उपभोग, आयात, निर्यात आदि करने पर कानूनन कर के रूप में देय हो

शुष्क(21) सूखा ; सहृदयता एवं कोमलता रहित।
शून्य(21) रिक्त, खाली ; गणित में अभाव सूचक चिह्न (ज़ीरो)।
शूर(21) बहादुर, वीर, सूरमा।
श्रृंखला(212) क्रम, तारतम्य माला, पंक्ति, कतार ; जंजीर, सिकड़ी।
श्रृंगार(221) सौंदर्य वृद्धि के लिए सौन्दर्य-प्रसाधनों द्वारा बनाव-सजाब; साहित्य में एक रस, रसराज।
शेष(21) बचा हुआ, बाक़ी
शैली(22) ढंग, तरीक़ा, पद्धति
शैशव(22) शिशु होने की अवस्था, गुण या भाव बचपन, लड़कपन।
शोक(21) इष्ट वस्तु या आत्मीयजन के वियोग, नाश या मृत्यु के कारण होने वाली मानसिक व्यथा, घोर दु:ख।
शोध(21) छिपी हुई तथा रहस्यपूर्ण बातों की खोज करना, अन्वेषण; जाँच, परीक्षण।
शोभा(22) कांति, चमक।
शोषण(22) परोक्ष उपायों से किसी की कमाई या धन धीरे-धीरे अपने हाथ में करना (एक्सप्लायटेशन)।
श्रद्धांजलि(22112) किसी पूज्य या बड़े व्यक्ति के संबंध में श्रद्धा और आदरपूर्वक कही जाने वाली बातें।
श्रद्धा(22) पूज्य और बड़े लोगों के प्रति आदरपूर्ण आस्था या भावना।
श्रम(21) मेहनत, परिश्रम ; जीविका-निर्वाह या धन उपार्जन के लिए किया जाने वाला कार्य।
श्रमदान(221) किसी सामूहिक हित के लिए स्वेच्छा से नि:शुल्क श्रम करना।
श्रमिक(22) शारीरिक श्रम द्वारा जीविका चलाने वाला, मज़दूर।
श्राद्ध(21) सनातनी हिन्दुओं में पितरों या मृत व्यक्तियों को प्रसन्न कराने के उद्देश्य से किए जाने वाले पिंडदान, ब्राह्मण भोजन आदि कृत्य जो उनके प्रति श्रद्धा(22) प्रकट करने के लिए किए जाते हैं। आश्विन मास का कृष्ण पक्ष, जिसमें विशिष्ट रूप से उक्त प्रकार के कृत्य करने का विधान है, पितृपक्ष।

श्रीमान(221)(श्रीमती)(212) ‘श्री’ पुरुषों के नाम से पूर्व प्रयुक्त एक आदरसूचक विशेषण (स्त्री के नाम के पूर्व श्रीमति)।

श्रुतलेख(221) वह लेख जो किसी के द्वारा बोले हुए वाक्यों को सुनकर लिखा जाए (डिक्टेशन)।
श्रेणी(22) क़तार, पंक्ति ; कार्य, योग्यता, आदि के विचार से पदार्थों, व्यक्तियों आदि का वर्ग, विभाग या दर्जा।
श्रेय(21) अच्छाई, उत्तमता ; मंगल, कल्याण ; यश।
श्रेष्ट(22) गुण, मान आदि के विचार से बढ़कर, उत्तम, उत्कृष्ट।
श्रोता(22) सुननेवाला (लिसनर); किसी सभा, नाटक-प्रदर्शन आदि के दर्शक, सुनने वाले या पाठक (बहुवचन में) (आड्यंस)।

श्लाघनीय(12121) प्रशंसनीय।
श्लाघा(122) प्रशंसा ; चापलूसी।
श्वास(21) प्राणियों का नाक से श्वास खींचकर अंदर फेफड़ों या हृदय तक पहुँचाना और फिर बाहर निकालना, सांस ; दमा नामक रोग।

श्वेत(21) धवल, उजला, सफेद, गोरा ; निर्मल, स्वच्छ, साफ।
षड्यन्त्र(222) साज़िश, कुचक्र।

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