ज और ज़

:पढ़ने का तरीक़ा: शब्द (वज़्न) सभी अर्थ

जंग (21)= युद्ध, लड़ाई
जागीर (221)= सम्पत्ति(भूमि की)
जिगर (12)= यकृत, हृदय, आत्मा, मन
जज़्ब (21)= आकर्षण, लोभ, मोह
जज़्बा (22)= लालसा, भावना, आवेश, आवेग, चाव
जाज़िब (22)= मनमोहक, आकर्षक
जादू (22)= जादू, तिलिस्म, टोना, मोहना, प्रेतात्मा का प्रभाव
जुदा (12)= विभाजित, बिखरा हुआ, अलग, पृथिक, अनूठा
जुदाई (122)= अनुपस्थिती, अलग होना, विरह
जन्नत (22)= स्वर्ग, उपवन
जनाज़ा (122)= अर्थी, शवयात्रा
जनाब (121)= श्रीमान्, माननीय
जान (21)= आत्मा, जीवन, मन, शक्ति, प्रेमी, प्रेमिका, प्रिया, प्रिय
जानी (22)= जीवन सम्बन्धी
जानी (22)= एक प्रेमी या प्रेमिका
जुनून (121)= उन्माद, पागलपन
जफ़ा (12)= अन्याय, अत्याचार, घाव
जबीं (12)= माथा
जमाल (121)= सुन्दरता, सुडौलपन
जाम (21)= प्याला
जुम्बिश (22)= हरकत, गति
जायज़(जाईज़) (22)= नियमानुकूल, अनुमति अनुसार
जायदाद (2121) = सम्पंत्ति, भू सम्पत्ति, वैयंक्तिक सम्पत्ति
जारी (22)= वर्तमान, प्रचलित, आधुनिक, नित्य, लगातार
जुर्म (21)= अपराध, दोष
जुर्माना (222)= अर्थ दंड, हरजाना
जलाल (121)= प्रताप, तेज, विशालता
जल्वा (22)= चमक, प्रदर्शन, प्रताप, दिखाव
जा’ल (21)= नकली
जवान (121)= युवा, किशोर
जवाब (121)= उत्तर, समता, बराबर, समानांतर
जवाहर(जवाहिर) (122)= रत्न, मणि
(जौहर का बहुवचन)
जश्न (21)= उत्सव, भोज
जोश (21)= गर्मी, तत्परता, उत्साह, आवेग, लालसा
जिस्म (21)= शरीर
जुस्तजू (212)= खोज, पूछ ताछ, तलाश
जहन्नुम (122)= नरक
जहाज़ (121)= पोत, नाव
जहान (121)= संसार
जाहिल (22)= मूर्ख, अनपढ़, जंगली अशिष्ट

जम्’अ(21) (جمع) : इस शब्द का अर्थ है “एकत्रित होना”. ज़्यादातर लोग इसे ‘जमा’ पढ़ते हैं जबकि सही लफ़्ज़ जम्’अ है. उर्दू शा’इरी में इसका वज़्न 21 होगा जबकि अगर जमा पढ़ा जाता तो ये 12 होता. इसलिए इसका विशेष ध्यान देना है.

ज़ंग (21)= लोहे में ज़ंग का लगना
ज़ौ (2)= प्रकाश, सूर्य का प्रकाश
ज़’इफ़ (12)= निर्बल, अपंग, असहाय, क्षीणशक्ति, वृद्ध, दुर्बल
ज़ा’इ (21)= पराजय, विनष्ट, फलहीन, व्यर्थ
ज़ाकिर (22)= कृतज्ञ, याद करते हुए
ज़ाकिर (22)= कृतज्ञजन, भगवान् की प्रशंसा की कविता
ज़ीक़ (21)= शोक, सन्ताप, विषाद, उदासी
ज़िक्र (21)= स्मरण, सुध, याद, क़ुरान का पाठ
ज़ुकाम (121)= ठंड लगना(बीमारी)
ज़ौक़ (21)= स्वाद, स्र्चि
ज़ख़्म (21)= घाव, हानी, क्षति
ज़ात (21)= आत्मा, स्वयं, जाति, वर्ग
ज़ाति (21)= अंतर्जात, पैदायशी, स्वाभाविक, प्राकृतिक
ज़दा (12)= चोट खाया हुआ, दलित
ज़ि (2)= विपरीत, विस्र्द्ध, प्रतिकूल, असंगत, हठ
ज़ूद (21)= शीघ्र, अचानक, तुरन्त
ज़न्जीर (221)= कड़ी
ज़न्न (21)= सन्देह
ज़िन्दां (22)= कारागार, बन्दीगृह
ज़िन्दा (22)= सजीव, प्राणी
ज़िन्दगी (212)= जीवन, जीविका, अस्तित्व
ज़िन्हार (221)= कभी नहीं, किसी तरह भी नहीं
ज़िन्हार (221)= सावधान!
ज़ीनत (22)= सजावट, सुन्दरता
ज़फ़र (12)= विजय, जीत, लाभ
ज़ु’फ़ (12)= निर्बलता
ज़बान (121)= जीभ, भाषा, मोमबत्ती की ज्वाला
ज़बर (12)= श्रेष्ठ, महान, चोटी, ऊपर, उत्तम
ज़बर्दस्त (1221)= शक्तिपूर्ण, प्रबल, क्रूर, उत्तम
ज़ाबित (22)= संचालक, स्वामी, अधिकारी
ज़ाबित (22)= कठोर, धैर्यवान, नियम का पालन करने वाला, अनुशासक
ज़ाबिता (212)= नियम, रीति, अनुशासन, धर्मसंहिता
ज़ेबा (22)= अलंकृत, सुन्दर, उचित, सुशोभित
ज़माना (122)= समय, काल, काल चक्र
ज़मानत (122)= प्रतिज्ञापत्र, विश्वास
ज़मीन (121)= भूमि, धरती, पृथ्वी
ज़मीर (121)= मन, हृदय, विचार, मनन, बोध
ज़ामिन (22)= धर्मपिता, प्रतिभू, जमानतदार, विश्वास दिलाने वाला
ज़्यादा(ज़ियादा) (122)= अधिकता, अत्याधिकता, अतिशय
ज़िया (12)= प्रकाश, चमक, धूमधाम
ज़ियारत (122)= तीर्थयात्रा, धर्मस्थल पर जाना
ज़र (2)= स्वर्ण, सोना
ज़र्ब (21)= घाव, चोट, पिटाई, प्रभाव, चिन्ह(ज़र्बात का बहुवचन)
ज़रर (12)= घाव, हानि, विपदा, क्षति, शोक, व्यथा, पराजय, विनाश, बरबादी
ज़रिफ़ (12)= तीक्ष्ण, सूक्ष्म, कोमल
ज़रूर (121)= आवश्यक, उचित, योग्य, निस्संदेह रूप से, पूर्ण रूप से
ज़रूरत (122)= आवश्यकता, विवशता, चाहत
ज़ार (21)= रोना, विलाप, उपवन, लालसा, इच्छा
ज़ेर (21)= हारा हुआ, दबा हुआ, कमज़ोर
ज़ोर (21)= शक्ति, बल, प्रभाव, दबाव
ज़लाल (121)= गलती, भूल, अवगुण, खोट
ज़लील (121)= नीच, घृणित, दुष्ट, अधम, तुच्छ
ज़ालिम (22)= क्रूर, अत्याचारी
ज़िल्लत (22)= मानहानि, अपमान, अनादर, नीचता
ज़ुल्फ़ (21)= घुंघराले बाल, लटाएं, केश, छल्ला
ज़ुल्म (21)= अत्याचार, क्रूरता
ज़ह्मत (122)= मन की परेशानी, विपदा, दर्द
ज़हर (21)= विष
ज़हीर (121)= साथी, मित्र, सहयोगी
ज़ाहिर (22)= स्पष्ट, समक्ष, प्रत्यक्ष
ज़ाहिरा (212)= स्पष्ट रूप से, प्रत्यक्ष रूप से
जह़न (21) = बुद्धि, तर्क, समझ, विवेक

ज़िम्’मदार(2121) (ज़िम्मेदार)– इसका अर्थ होता है ज़मानत, जवाबदेही, कार्यभार। ये लफ़्ज़ ज़िम्मा से बनता है, ज़िम्मा का अर्थ है उत्तरदायित्व। ज़िम्मेदार एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे अधिकतर लोग जिम्मेवार पढ़ने और लिखने लगे हैं, इतना ही नहीं एक साल सिविल सेवा की परीक्षा के प्रश्न पत्र में इसे जिम्मेवार लिख दिया गया था और इस पर किसी ने आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई। बहरहाल, सही लफ़्ज़ ज़िम्मेदार है और इसके सही बोलने का तरीक़ा ज़िम्-मदार है. इसका वज़्न भी इसी आधार पर लिया जाएगा, ज़िम्’मदार का वज़्न 2121 होगा (ज़िम-2, म-1,दा-2,र-1). ग़ज़ल की ज़मीन के मुताबिक़ ज़िम्’मदार के साथ ऐतबार, इंतज़ार, बे-क़रार,साज़गार, ग़ुबार, इख़्तियार, दरार, क़रार, इत्यादि क़ाफ़िए लिए जा सकते हैं.

ज़ियादा या ज़्यादा(122): इस शब्द का अर्थ होता है अधिक, प्रचुर, बहुत, अतिरिक्त। इसी से जुड़े कुछ और शब्द हम आज आपसे साझा कर रहे हैं।
ज़ियादा ख़ोर(122 21): पेटू, बहुत खानेवाला
ज़ियादा गो (122 2): बहुत बातें करने वाला
ज़ियादा गोई (122 21): बहुत बातें करना
ज़्यादातर (1222): अक्सर, अधिकतर
ज़ियादा-तलबी (122 22): अपने हिस्से से अधिक मांगना
ज़्यादा सितानी (122 122): अपने हिस्से से अधिक लेना
ज़ियाद (121): इसका अर्थ अधिक, बहुत होता है। इससे मिल कर बनने वाले कुछ अल्फ़ाज़
ज़ियादत (122): अधिकता
ज़ियादती (1212): अधिकता, इतना अधिक कर देना कि कोई परेशान हो जाये, अत्याचार

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