फ़िराक़ गोरखपुरी के 40 शेर

1. तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं समझ लो साँस लेना ख़ुद-कुशी करना समझते हैं 2. बस इतने पर हमें सब लोग दीवाना

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आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-3)

(यह कहानी साहित्य दुनिया टीम के सदस्य/ सदस्यों द्वारा लिखी गयी है और इस कहानी के सर्वाधिकार साहित्य दुनिया के पास सुरक्षित हैं। बिना अनुमति

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नुक़्ते वाले और बिना नुक़्ते वाले (6): क्या है बिंदी का फ़र्क़..

उर्दू वर्णमाला में कुछ ऐसे अक्षर हैं जिनके बारे में अक्सर हिंदी भाषी कुछ परेशान से रहते हैं और उसका सही उच्चारण करना उनके लिए

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एक ऐसी कहानी जो शायद पहले सोची भी नहीं गयी

किताबों की दुनिया कुछ यूँ होती है कि आपको बैठे-बिठाए दुनिया भर की सैर करा सकती है। वो दुनिया कोई भी हो सकती है आपके

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“द जर्नी ऑफ़ शिवा” एक ऐसी यात्रा पर ले जाती है जहाँ मेहनत के रास्ते प्रसिद्धि की राह है

किताबें एक यात्रा की तरह होती हैं और उन्हें पढ़ते हुए हम काल्पनिक या वास्तविक कितनी ही यात्राएँ तय करते हैं। एक ऐसा ही सफ़र

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ख़ज़ाना-ए-क़ाफ़िया

जब भी कोई शेर कहना चाहता है तो उसके लिए सबसे ज़रूरी चीज़ होती है क़ाफ़िया, रदीफ़ और वज़्न। जहाँ क़ाफ़िये से शेर को एक

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इस साहित्यकार के जन्मदिन को ‘हिन्दी-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है….

हम में से अधिकतर लोग ये जानते हैं कि आज या’नी १४ सितम्बर को ‘हिन्दी दिवस’ मनाया जाता है. इसका कारण ये है कि भारत

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