नैंसी का ख़ज़ाना

सुबह से ही नहाकर ननकू तैयार था। अपना छोटा बैग और पानी की बोतल लेकर बरामदे में खड़ा था, उसकी नज़र दरवाज़े पर ही टिकी

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रसगुल्ला

हॉल में नानी के साथ बैठकर माँ बातों में लगीं थीं। डॉली भी बीच-बीच में आकर बातों में शामिल हो जाती। “डॉली..बच्चों को देख ले..कब

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‘महावीर और गाड़ीवान’- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

एक गाड़ीवान अपनी भरी गाड़ी लिए जा रहा था। गली में कीचड़ था। गाड़ी के पहिए एक खंदक में धँस गए। बैल पूरी ताकत लगाकर

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ननकू के क़िस्से: छुक- छुक रेलगाड़ी

ननकू और माँ ट्रेन में सवार थे और ट्रेन सरपट दौड़ी जा रही थी। अब तक तो ननकू ने सिर्फ़ खिलौने में ही इंजन देखा

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ननकू और चीकू

“माँ, मैं चीकू के साथ खेलने जाऊँ?” – ननकू कमरे से निकलकर किचन के दरवाज़े के पास खड़ा होकर माँ से बोला। “तू पहले दूध

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नटखट कहानी- नादान दोस्त

नादान दोस्त- प्रेमचंद केशव के घर में कार्निस के ऊपर एक चिड़िया ने अण्डे दिए थे। केशव और उसकी बहन श्यामा दोनों बड़े ध्यान से

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नटखट कहानी- मिट्ठू बंदर

मिट्ठू बंदर-मुंशी प्रेमचंद बंदरों के तमाशे तो तुमने बहुत देखे होंगे। मदारी के इशारों पर बंदर कैसी-कैसी नकलें करता है, उसकी शरारतें भी तुमने देखी

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