अलफ़ाज़ की बातें (14): हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या “अल्फ़ाज़ों” का इस्तेमाल होता है

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अलफ़ाज़ की बातें (13): मेरे, मिरे, तेरे, तिरे, दिवाने, दीवाने, एक, इक…

हम अक्सर उर्दू शाइरी में मिरे, तिरे, दिवाने, इक, ख़मोशी इत्यादि शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. जिन शब्दों का हम ज़िक्र कर रहे हैं अगर

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अलफ़ाज़ की बातें (12): अलविदा’अ, शाइरी, त’अज्जुब…

अलविदा’अ(الوداع): इसका अर्थ होता है इस शब्द को अक्सर लोग अलविदा पढ़ते हैं लेकिन इसको सही तरह से पढेंगे तो अलविदा’अ पढेंगे. उर्दू शा’इरी में

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अलफ़ाज़ की बातें (11): हमला-आवर, आशुफ़्ता, गुज़िश्ता, दस्त और दश्त…

हमला-आवर (حملہ آور): हमला-आवर एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे आम लोग ‘हमलावर’ पढ़ते हैं जोकि सही नहीं है. इसका सही उच्चारण हम’ल’आवर ही है. उर्दू

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अलफ़ाज़ की बातें(9): सागर, साग़र और जलील, ज़लील…

सागर(ساگر) और साग़र (ساغر) दो ऐसे लफ़्ज़ हैं जिनके उच्चारण में जो अंतर है वो यूँ तो साफ़ है लेकिन अक्सर लोग इसका उच्चारण ग़लत

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अलफ़ाज़ की बातें(8): क़मर, कमर और उरूज, अरूज़..

क़मर (قمر)  और कमर (کمر)  अक्सर लोगों को कमर और क़मर एक से लगते हैं पर थोड़े से अलग हैं. दोनों शब्दों का अर्थ भी

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अलफ़ाज़ की बातें(7): ज़िम्’मदार, ज़ियादा, ज़ियादत…

ज़िम्’मदार (ज़िम्मेदार)– इसका अर्थ होता है ज़मानत, जवाबदेही, कार्यभार। ये लफ़्ज़ ज़िम्मा से बनता है, ज़िम्मा का अर्थ है उत्तरदायित्व। ज़िम्मेदार एक ऐसा लफ़्ज़ है

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अलफ़ाज़ की बातें (6): ख़ुलासा, ख़िलाफ़त, बिलकुल और भूक…

ख़ुलासा (خلاصہ): ख़ुलासा का जो अर्थ आजकल मीडिया में इस्तेमाल हो रहा है वो इसके सही अर्थ से बिलकुल जुदा है. ख़ुलासा का अर्थ होता

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