शाइरी

नज़्म शाइरी

औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया… साहिर लुधियानवी

औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कहीं दीनारों में, बिकती है कहीं बाज़ारों में नंगी नचवाई जाती है अय्याशों के दरबारों में ये वो बे-इज़्ज़त चीज़ है जो बंट जाती है इज़्ज़त-दारों में औरत ने जनम दिया मर्दों […]

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एक शाइर सौ शेर शाइरी साहित्य दुनिया

फ़िराक़ गोरखपुरी के 40 शेर

1. तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं समझ लो साँस लेना ख़ुद-कुशी करना समझते हैं 2. बस इतने पर हमें सब लोग दीवाना समझते हैं कि इस दुनिया को हम इक दूसरी दुनिया समझते हैं 3. कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है तिरे दम भर के मिल जाने को हम […]

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ग़ज़ल शाइरी

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ…. अहमद फ़राज़

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मुहब्बत का भरम रख तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ किस-किस को बताएँगे जुदाई […]

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ग़ज़ल शाइरी

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं …ख़ुमार बाराबंकवी

वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं वो हैं पास और याद आने लगे हैंमुहब्बत के होश अब ठिकाने लगे हैं सुना है हमें वो भुलाने लगे हैंतो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं हटाए थे जो राह से दोस्तों कीवो पत्थर मिरे घर में आने लगे हैं ये […]

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ग़ज़ल शाइरी

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं…ज़हरा निगाह

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों ब’अद भी आते हैं हमने जिस रस्ते पर उसको छोड़ा है फूल अभी तक उस पर खिलते जाते हैं दिन में किरनें आँख-मिचोली खेलती हैं रात गए कुछ जुगनू मिलने जाते हैं देखते-देखते इक घर के रहने वाले अपने अपने ख़ानों में बट जाते हैं […]

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ग़ज़ल शाइरी

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता …. निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इसकी वहाँ नहीं मिलता कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं ज़बाँ मिली है […]

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ग़ज़ल शाइरी

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी…. बहादुर शाह ज़फ़र

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी उसकी आँखों ने ख़ुदा जाने किया क्या जादू कि तबीअ’त मिरी माइल कभी ऐसी तो न थी […]

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शाइरी

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया.. सुदर्शन फ़ाकिर

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया आप कहते थे कि रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया रोने वालों से कहो उनका भी रोना रो लें जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया तुझसे मिल कर हमें […]

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शाइरी

दाग़ देहलवी के 10 मशहूर शेर..

आपका ए’तिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे ‘दाग़’ की शक्ल देख कर बोले ऐसी सूरत को प्यार कौन करे ग़ज़ब किया तिरे वअ’दे पे ए’तिबार किया तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया अपने दिल को भी बताऊँ न ठिकाना तेरा सब ने जाना जो पता एक ने जाना तेरा ये समझ कर तुझे […]

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एक शाइर सौ शेर शाइरी

एक शाइर, सौ शेर: मीर तक़ी मीर

1. फ़क़ीराना आए सदा कर चले, कि मियाँ ख़ुश रहो हम दुआ कर चले 2. जो तुझ बिन न जीने को कहते थे हम सो इस अहद को अब वफ़ा कर चले 3. वो क्या चीज़ है आह जिसके लिए हर इक चीज़ से दिल उठा कर चले 4. कोई ना-उमीदाना करते निगाह सो तुम […]

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