आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-3)

(यह कहानी साहित्य दुनिया टीम के सदस्य/ सदस्यों द्वारा लिखी गयी है और इस कहानी के सर्वाधिकार साहित्य दुनिया के पास सुरक्षित हैं। बिना अनुमति के कहानी के किसी भी अंश, भाग या कहानी को अन्यत्र प्रकाशित करना अवांछनीय है. ऐसा करने पर साहित्य दुनिया दोषी के ख़िलाफ़ आवश्यक क़दम उठाने के लिए बाध्य है।)

आज की कहानी साहित्य दुनिया के लिए अरग़वान रब्बही ने लिखी है.
_________________________________

भाग 1

भाग 2

भाग 3

हैरत कुछ देर मर्याना के घर बैठता है और चाय पीकर अपने कमरे पर जाने लगता है.
मर्याना कहती है,”कल मैं सुबह तुम्हारे घर आती हूँ, साथ नाश्ता करेंगे”
“हाँ..पर ज़रा 9 बजे तक आना प्लीज़..”
“अच्छा ठीक है..तुम सो लेना आराम से, मैसेज कर देना उठते ही मैं आ जाऊँगी फिर”

अगले दिन सुबह

खिड़की से आ रही सूरज की रौशनी और हल्की-फुल्की सुबह की आवाज़ों ने मर्याना को नींद से जगा दिया. अपने सफ़ेद शार्ट कुर्ते की आस्तीनों को चढ़ाते हुए वो उठी और दिन की ओर बढ़ने लगी. अपने छोटे से घर के बाहर खड़ी पतली गली से उसने निकलना शुरू किया जहाँ उसे रोज़ सुबह पानी भरने के लिए लगी क़तारें, बिना किसी बात के तू-तू मैं-मैं, और कुछ खिलखिलाते बच्चे देखने को मिलते हैं. गली से गली के रास्ते होते हुए वो लाल दरवाज़े वाले मकान पर जा रुकी. वो खटखटाने को थी कि दरवाज़ा अपने आप ही खुल गया.. अन्दर पहुँची तो हैरत सो रहा था. मर्याना हैरत को सोता देख मुहब्बत से मुस्कुराई..
चारपाई के पास पहुँच कर उसने चुपके से उसे गाल पर चूमा..वो चौंक कर उठ गया.. “कौन है..ओह मर्याना..क्या कर रही हो बे”
“तुम्हें चूम रही हूँ”
“सोने दो यार..”
“उठ जाओ यार..”
“उठता हूँ न..”
“अच्छा तुम थोड़ी देर सो लो..”
हैरत ने आँखें बंद कर लीं, मर्याना ने अपने लिए थोड़ी सी जगह बनाई और हैरत के पीछे की ओर बग़ल में लेटने लगी, हैरत ने उसे जगह दी.. मर्याना ने अपना हाथ हैरत के कंधे पर रख लिया….

कुछ देर बाद..
मर्याना हैरत के पास सो गई थी.. उसका हाथ धीरे से हटाते हुए हैरत उठा और उसे एक झलक ग़ौर से देखा.. इतने में मर्याना उठ गई.. “अरे.. तुम उठ गए हैरत”
“हाँ..”
“मैं मुँह धो लेती हूँ..चलते हैं नाश्ता करने”
“अभी तो उठा हूँ..रुको तो 10 मिनट”

कुछ देर में हैरत तैयार हो गया और दोनों नाश्ता करने के लिए बाहर जाने लगे..
“आज समोसा जलेबी खाएँगे”
“हाँ..और चाय”
“हाँ जी..ज़रूर”

“अच्छा..वो तुम्हारी दोस्त कहाँ है”
“कौन? अनिका?”
“हाँ..कहाँ है वो?”
“यहीं तो है..कल बात हो रही थी उससे व्हाट्सएप पर..मिलूँगी आज उससे”

एक छोटी सी दुकान से दोनों ने समोसा और जलेबी ली और खड़े खड़े खा ली. इसके बाद वो दोनों चाय पीने गए..चाय के होटल पर दोनों बैठे हुए चाय पीने लगे..
“अच्छा तुम दरवाज़ा खोलकर क्यूँ सोते हो?” मर्याना ने हैरत से सवाल किया..
“नहीं तो…”
“अरे मैं जब आयी तो दरवाज़ा खुला था..”
“अच्छा..रह गया होगा”
“ध्यान रखा करो तुम…”
“अरे वाह…आओ आओ” मर्याना ने बाहर की ओर देखा तो अनिका आ रही थी..
“मुझे पता था दोनों दीवाने यहीं होगे” अनिका ने मज़े के अंदाज़ में दोनों की ओर देखते हुए कहा..
“आओ बैठो..चाय पियो तुम” मर्याना ने उसे जगह देते हुए कहा..
“कैसे हो हैरत?”
“अच्छा हूँ..और तुम?”
“मैं भी ठीक हूँ…सुनो..चाय पीकर दोनों मेरे घर चलो..”
“वहाँ क्या है भई?” हैरत ने सवाल किया..
“चलो तो..चलो बस तुम”
“अरे बेसब्र लड़की, चल रहे हैं यार…” मर्याना ने जवाब दिया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!