आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-2)

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आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-1)

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आज की कहानी- ख़्वाहिश

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शा’इरी की बातें (21): ग़ज़ल में मक़ता क्या होता है?

मक़ता: ग़ज़ल का आख़िरी शे’र मक़ता कहलाता है.अक्सर इसमें शा’इर अपने तख़ल्लुस (pen name) का इस्तेमाल करता है. तख़ल्लुस: शा’इर जिस नाम से शा’इरी करता

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शा’इरी की बातें (20): ग़ज़ल का मतला क्या होता है?

मत’ला: ग़ज़ल या क़सीदे का वो शे’र जिसके दोनों मिसरों में रदीफ़ और क़ाफ़िये का इस्तेमाल होता है उसे मत’ला कहते हैं. अक्सर को ग़ज़ल

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अलफ़ाज़ की बातें (14): हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या “अल्फ़ाज़ों” का इस्तेमाल होता है

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शा’इरी की बातें (19): क़ाफ़िया क्या है?

क़ाफ़िया: रदीफ़ से ठीक पहले आने वाले वो शब्द जो एक ही आवाज़ पर ख़त्म होते हैं, उन्हें क़ाफ़िया कहते हैं.मत’ला में क़ाफ़िया दोनों मिसरों

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शा’इरी की बातें (18): रदीफ़ क्या है?

रदीफ़: ग़ज़ल या क़सीदे के शेरों के अंत में जो शब्द या शब्द-समूह बार-बार दुहराए जाते हैं, उन्हें रदीफ़ कहते हैं. मत’ले में रदीफ़ दोनों

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