एक शाइर, सौ शेर: जिगर मुरादाबादी

एक शाइर, सौ शेर: जिगर मुरादाबादी

1- अपना ज़माना आप बनते हैं अहल-ए-दिल
हम वो नहीं कि जिनको ज़माना बना गया

2- आँखों का क़सूर था न दिल का क़सूर था
आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था

3- वो थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था
आता न था नज़र तो नज़र का क़सूर था

4- जिस दिल को तुमने लुत्फ़ से अपना बना लिया
उस दिल में इक छिपा हुआ नश्तर ज़रूर था

5- चेहरे तक आस्तीन वो लाकर चले गए
क्या राज़ था कि जिसको छुपाकर चले गए

6- रग रग में इस तरह वो समाकर चले गए
जैसे मुझी को मुझसे चुराकर चले गए

7-आए थे दिल कि प्यास बुझाने के वास्ते
इक आग सी वो और लगाकर चले गए

8-शुक्र-ए-करम के साथ ये शिकवा भी हो क़बूल
अपना सा क्यूँ न मुझको बनाकर चले गए

9- लब थरथरा के रह गए लेकिन वो ए ‘जिगर’
जाते हुए निगाह मिलाकर चले गए

10- आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है

11-आज क्या बात है कि फूलों का
रंग तेरी हँसी से मिलता है

12- मिल के भी जो कभी नहीं मिलता
टूटकर दिल उसी से मिलता है

13-कुछ खटकता तो है पहलू में मिरे रह रह कर
अब ख़ुदा जाने कि तिरी याद है या दिल मेरा

14-दिल ले के मुझसे देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे

15- डाला है बेख़ुदी ने अजब राह पर मुझे
आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे

16-सीने से दिल अज़ीज़ है, दिल से हो तुम अज़ीज़
सबसे मगर अज़ीज़ है तेरी नज़र मुझे

17- अब तो ये भी नहीं रहा एहसास
दर्द होता है या नहीं होता

18- दिल हमारा है या तुम्हारा है
हमसे ये फ़ैसला नहीं होता

19- जिस पे तेरी नज़र नहीं होती
उसकी जानिब ख़ुदा नहीं होता

20- वो हमारे क़रीब होते हैं
जब हमारा पता नहीं होता

21-हो के एक बार सामना उनसे
फिर कभी सामना नहीं होता

22-इश्क़ में ला-जवाब हैं हम लोग
माहताब आफ़्ताब हैं हम लोग

23- नाज़ करती है ख़ाना-वीरानी
ऐसे ख़ाना-ख़राब हैं हम लोग

24- तू हमारा जवाब है तन्हा
और तेरा जवाब हैं हम लोग

25-ख़ूब हम जानते हैं अपनी क़द्र
तेरे नाकामयाब हैंहम लोग

26- जब मिली आँख होश खो बैठे
कितने हाज़िर-जवाब हैं हम लोग

27- एहसास-ए-आशिक़ी ने बेगाना कर दिया है
यूँ भी किसी ने अक्सर दीवाना कर दिया है

28- अब क्या उम्मीद रक्खूँ ऐ हुस्न-ए-यार तुझ से
तूने तो मुस्कुरा कर दीवाना कर दिया है

29- तुझसे ख़ुदा ही समझे तूनेकिसी को ऐ दिल
मुझसे भी कुछ ज़ियादा दीवाना कर दिया है

30- मुझको जुनूँ से अपने शिकवा जो है तो ये है
मेरी मोहब्बतों को अफ़्साना कर दिया है

31- मुझसे ही पूछते हैं ये शोख़ियाँ तो देखो
मेरे ‘जिगर’ को किसनेदीवाना कर दिया है

32- ऐ हुस्न-ए-यार शर्म ये क्या इंक़लाब है
तुझसे ज़ियादा दर्द तिरा कामयाब है

33-आशिक़ की बे-दिली का तग़ाफ़ुल नहीं जवाब
उस का बस एक जोश-ए-मोहब्बत जवाब है

34- उससे दिल-ए-तबाह की रूदाद क्या कहूँ
जो ये न सुन सके कि ज़माना ख़राब है

35-अपने हुदूद से न बढ़े कोई इश्क़ में
जो ज़र्रा जिस जगह है वहीं आफ़्ताब है

36-वो लाख सामने हों मगर इसका क्या इलाज
दिल मानता नहीं कि नज़र कामयाब है

37- मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर
फिर भी तिरा शबाब तिरा ही शबाब है

38- मैं उस का आईना हूँ वो है मेरा आईना
मेरी नज़र से उस की नज़र कामयाब है

39- क्या बराबर का मोहब्बत में असर होता है
दिल इधर होता है ज़ालिम न उधर होता है

40- हमनेक्या कुछ न किया दीदा-ए-दिल की ख़ातिर
लोग कहते हैं दुआओं में असर होता है

41- मैं गुनहगार-ए-जुनूँ मैंने ये माना लेकिन
कुछ उधर से भी तक़ाज़ा-ए-नज़र होता है

42- जब उस रुख़-ए-पुर-नूर का जल्वा नज़र आया
काबा नज़र आया न कलीसा नज़र आया

43- ये हुस्न ये शोख़ी ये करिश्मा ये अदाएँ
दुनिया नज़र आई मुझे तो क्या नज़र आया

44- इक सरख़ुशी-ए-इश्क़ है इक बे-ख़ुदी-ए-शौक़
आँखों को ख़ुदा जाने मिरी क्या नज़र आया

45- जब देख न सकते थे तो दरिया भी था क़तरा
जब आँख खुली क़तरा भी दरिया नज़र आया

46- क़ुर्बान तिरी शान-ए-इनायत के दिल ओ जाँ
इस कम-निगही पर मुझे क्या क्या नज़र आया

47- क्या कशिश हुस्न-ए-बे-पनाह में है
जो क़दम है उसी की राह में है

48- मय-कदे में न ख़ानक़ाह में है
जो तजल्ली दिल-ए-तबाह में है

49- हाए वो राज़-ए-ग़म कि जो अब तक
तेरे दिल में मिरी निगाह में है

50- मैं जहाँ हूँ तिरे ख़याल में हूँ
तू जहाँ है मिरी निगाह में है

51- हुस्न को भी कहाँ नसीब ‘जिगर’
वो जो इक शय मिरी निगाह में है

52- कोई ये कह दे गुलशन गुलशन
लाख बलाएँ एक नशेमन

53- क़ातिल रहबर क़ातिल रहज़न
दिल सा दोस्त न दिल सा दुश्मन

54- फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
लेकिन अपना अपना दामन

55- ख़ैर मिज़ाज-ए-हुस्न की या-रब
तेज़ बहुत है दिल की धड़कन

56- आ कि न जाने तुझ बिन कब से
रूह है लाशा जिस्म है मदफ़न

57- आज न जाने राज़ ये क्या है
हिज्र की रात और इतनी रौशन

58- उम्रें बीतीं सदियाँ गुज़रीं
है वही अब तक इश्क़ का बचपन

59- बैठे हम हर बज़्म में लेकिन
झाड़ के उट्ठे अपना दामन

60- रंगीं फ़ितरत सादा तबीअत
फ़र्श-नशीं और अर्श-नशेमन

61- काम अधूरा और आज़ादी
नाम बड़े और थोड़े दर्शन

62- शम्अ है लेकिन धुंदली धुंदली
साया है लेकिन रौशन रौशन

63- काँटों का भी हक़ है कुछ आख़िर
कौन छुड़ाए अपना दामन

64- चलती फिरती छाँव है प्यारे
किस का सहरा कैसा गुलशन

65- तबीअत इन दिनों बेगाना-ए-ग़म होती जाती है
मिरे हिस्से की गोया हर ख़ुशी कम होती जाती है

66- वही हैं शाहिद-ओ-साक़ी मगर दिल बुझता जाता है
वही है शम्अ’ लेकिन रौशनी कम होती जाती है

67- वही है ज़िंदगी लेकिन ‘जिगर’ ये हाल है अपना
कि जैसे ज़िंदगी से ज़िंदगी कम होती जाती है

68- क़दम क़दम मिरी हिम्मत बढ़ाई जाती है
नफ़स नफ़स तिरी आहट सी पाई जाती है

69- वो इक नज़र जो ब-मुश्किल उठाई जाती है
वही नज़र रग-ओ-पै में समाई जाती है

70- सुकूँ है मौत यहाँ ज़ौक़-ए-जुस्तुजू के लिए
ये तिश्नगी वो नहीं जो बुझाई जाती है

71- ख़ुदा वो दर्द-ए-मोहब्बत हर एक को बख़्शे
कि जिस में रूह की तस्कीन भी पाई जाती है

72- वो मय-कदा है तिरी अंजुमन ख़ुदा रक्खे
जहाँ ख़याल से पहले पिलाई जाती है

73- तुझे ख़बर हो तो इतनी न फ़ुर्सत-ए-ग़म दे
कि तेरी याद भी अक्सर सताई जाती है

74- वो चीज़ कहते हैं फ़िरदौस-ए-गुमशुदा जिस को
कभी कभी तिरी आँखों में पाई जाती है

75- बे-कैफ़ दिल है और जिए जा रहा हूँ मैं
ख़ाली है शीशा और पिए जा रहा हूँ मैं

76- मजबूरी-ए-कमाल-ए-मोहब्बत तो देखना
जीना नहीं क़ुबूल जिए जा रहा हूँ मैं

77- वो दिल कहाँ है अब कि जिसे प्यार कीजिए
मजबूरियाँ हैं साथ दिए जा रहा हूँ मैं

78- वो जो रूठें यूँ मनाना चाहिए
ज़िंदगी से रूठ जाना चाहिए

79- ज़िंदगी है नाम जोहद ओ जंग का
मौत क्या है भूल जाना चाहिए

80- है इन्हीं धोकों से दिल की ज़िंदगी
जो हसीं धोका हो खाना चाहिए

81- उनसे मिलने को तो क्या कहिए ‘जिगर’
ख़ुद से मिलने को ज़माना चाहिए

82- दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद
अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

83- मुद्दत हुई इक हादसा-ए-इश्क़ को लेकिन
अब तक है तिरे दिल के धड़कने की सदा याद

84- हाँ हाँ तुझे क्या काम मिरी शिद्दत-ए-ग़म से
हाँ हाँ नहीं मुझ को तिरे दामन की हवा याद

85-क्या लुत्फ़ कि मैं अपना पता आप बताऊँ
कीजे कोई भूली हुई ख़ास अपनी अदा याद

86- मोहब्बत में ये क्या मक़ाम आ रहे हैं
कि मंज़िल पे हैं और चले जा रहे हैं

87-ये कह कह के हम दिल को बहला रहे हैं
वो अब चल चुके हैं वो अब आ रहे हैं

88- जफ़ा करने वालों को क्या हो गया है
वफ़ा कर के भी हम तो शर्मा रहे हैं

89- मिज़ाज-ए-गिरामी की हो ख़ैर या-रब
कई दिन से अक्सर वो याद आ रहे हैं

90- नज़र मिला के मिरे पास आ के लूट लिया
नज़र हटी थी कि फिर मुस्कुरा के लूट लिया

91- दुहाई है मिरे अल्लाह की दुहाई है
किसी ने मुझ से भी मुझ को छुपा के लूट लिया

92- सलाम उस पे कि जिस ने उठा के पर्दा-ए-दिल
मुझी में रह के मुझी में समा के लूट लिया

93- यहाँ तो ख़ुद तिरी हस्ती है इश्क़ को दरकार
वो और होंगे जिन्हें मुस्कुरा के लूट लिया

94- बड़े वो आए दिल ओ जाँ के लूटने वाले
नज़र से छेड़ दिया गुदगुदा के लूट लिया

95- नया ज़माना बनाने चले थे दीवाने
नई ज़मीन नया आसमाँ बना न सके

96- आ कि तुझ बिन बहुत दिनों से ये दिल
एक सूना मकान है प्यारे

97- तू जहाँ नाज़ से क़दम रख दे
वो ज़मीन आसमान है प्यारे

98- अपने जी में ज़रा तो कर इंसाफ़
कब से ना-मेहरबान है प्यारे

99- मुझ में तुझ में तो कोई फ़र्क़ नहीं
इश्क़ क्यूँ दरमियान है प्यारे

100- हम से जो हो सका सो कर गुज़रे
अब तिरा इम्तिहान है प्यारे

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