यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो – बशीर बद्र
यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा…
तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद – फ़रहत अब्बास शाह
तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद तू है…
इश्क़ पर ख़ूबसूरत शेर
ये ज़ाफ़रानी पुलोवर उसी का हिस्सा है, कोई जो दूसरा पहने तो दूसरा ही लगे बशीर बद्र —— उजाले अपनी…
The Quietus – अरग़वान
“8 साल हो गए मेरी इस नौकरी को, 8 साल…क्या मिला? कुछ महीनों के ख़र्च के रुपए और कुछ उम्मीदें,…
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है – सलीम कौसर
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है मैं…
सफ़र के वक़्त – जौन एलिया
तुम्हारी याद मिरे दिल का दाग़ है लेकिन सफ़र के वक़्त तो बे-तरह याद आती हो बरस बरस की हो…
उर्दू शायरी और शब्द: हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?
अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या…
ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम – मोमिन ख़ाँ मोमिन
ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम पर क्या करें कि हो गए नाचार जी से हम…
अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से – परवीन शाकिर
अब इतनी सादगी लाएँ कहाँ से ज़मीं की ख़ैर माँगें आसमाँ से अगर चाहें तो वो दीवार कर दें हमें…