नुसरत फ़तेह अली ख़ान की गायी ग़ज़लें

सादगी तो हमारी ज़रा देखिए ए'तिबार आप के वा'दे पर कर लिया बात तो सिर्फ़ इक रात की थी मगर...

ज़ेब ग़ौरी के बेहतरीन शेर

जितना देखो उसे थकती नहीं आँखें वर्ना ख़त्म हो जाता है हर हुस्न कहानी की तरह __ ज़ख़्म ही तेरा...

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो – बशीर बद्र

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके-चुपके पढ़ा...