नुक़्ते वाले और बिना नुक़्ते वाले (1): “फ” और “फ़”….

उर्दू वर्णमाला में कुछ ऐसे अक्षर हैं जिनके बारे में अक्सर हिंदी भाषी कुछ परेशान से रहते हैं और उसका सही उच्चारण करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है. इन अक्षर (उर्दू में अक्षर को हर्फ़ कहते हैं) की बात करें तो ये फ़,क़, ख़, ग़, और ज़ हैं. असल में इन अक्षरों को बोलने में परेशानी की वजह ये है कि बिलकुल इन्हीं की तरह के अक्षर और भी होते हैं. वो हैं फ, क,ख, ग, और ज. इन सभी में नीचे बिंदी नहीं लगी है बाक़ी इनके लिखने का तरीक़ा बिलकुल एक ही है. लोग अक्सर इसको लेकर परेशान हो जाते हैं कि कौन से लफ़्ज़ में फ और कौन से में फ़ या कौन से में क़ है या क. आज हम “फ” और “फ़” से शुरू’अ होने वाले कुछ शब्दों की लिस्ट आपके सामने पेश कर रहे हैं.

फ- پھ – Ph

फूल, फिर,फैलाव, फिसलन ,फल, फेरी, फंदा (गाँठ या पाश), फँसना, फटकार(डाँट),फन (साँप का मुँह), फफ़ोला(छाला), फहराना, फाँक(छोटा टुकड़ा), फिटकरी, फीका(सादा), फुदकना, फुहार( बौछार), फूँक, फेफड़ा(कलेजा), फेरबदल (बदलाव, परिवर्तन), फेरा( चक्कर), फुग्गा( गुब्बारा), फिसड्डी, फागुन, फाँदना, फाँस, फलित(फलदायी), फड़कना (सिहरना या अनुभव हो सके ऐसे हिलना।।जैसे आँख का फड़कना), फाटक(दरवाज़ा), फटीचर( कंगाल), फफकना (धीमी आवाज़ में रोना), फबना (अच्छा लगना), फलीभूत( संतुष्ट, फलयुक्त), फुर्ती( चपलता), फुलझड़ी, फुसफुसाना( बहुत हल्की आवाज़ में बात करना), फुसलाना(बहलाना), फूट (भेदनीति), फिसल, फड़फड़ाना.
कुछ और लफ़्ज़ जिनमें फ़ का इस्तेमाल होता है लेकिन शुरू’अ में नहीं..सरफिरा, सरफिरी.

फ़- ف – F
फ़क़ीर, फ़ज़ा, फ़ना (मौत), फ़र्ज़, फ़रोश, फ़रेब, फ़र्श, फ़लक (आसमान), फ़लक़ (सवेरे का उजाला), फ़साना, फ़हीम (समझदार), फ़ाक़ा (भूके रहना), फ़िक्र, फ़ाश (ज़ाहिर, प्रकट, खुला हुआ..जैसे कहते हैं पर्दा फ़ाश कर दूँगा), फ़िक्रमंद, फ़िगार (घायल), फ़िराक़ (जुदाई), फ़ज़ूल, फ़ौज, फ़ौलाद, फ़िलबदीह (इसका अर्थ है बिना सोचे कुछ ऐसा कहना जो बहुत अच्छा हो… बिना सोचे शे’र कहने के लिए भी इसका प्रयोग होता है जैसे “फ़िलबदीह ग़ज़ल कहो तो है कोई बात”),फ़रोख़्त, फ़रमाइश, फ़रमान फ़रार (शुद्ध उच्चारण फ़िरार है, परन्तु उर्दू में फ़रार ही कहा जाता है), फ़र्श, फ़र्श ए गुल (फूलों का फ़र्श), फ़स्ल या फ़सल (इसका अर्थ पैदावार भी होता है और मौसम भी), फ़स्ल ए गुल (बहार का मौसम), फ़स्ल ए गर्मा (गर्मी का मौसम), फ़स्ल ए बाराँ (बरसात का मौसम), फ़ज़ूल (बेकार), फ़ौलाद, फ़ौरन, फ़ौज (अर्थ-सेना) , फ़ौज़ (कामयाबी), फ़ौज़ ए अज़ीम (बहुत बड़ी कामयाबी), फ़ज़ूलख़र्ची, फ़ानी (मिट जाने वाला), फ़रामोश (भूल जाने वाला), फ़राख़ (बड़ा, चौड़ा), फ़राख़दिल (दिल खोलकर ख़र्च करने वाला, बड़े दिल वाला), फ़क़त (ख़त्म, बस; केवल), फ़ज़्ल (कृपा, दया), फ़नकार( कलाकार), फ़ितूर(लगन), फ़िल्म, फ़ोन,फ़ीस,
फ़रमाबरदार(आज्ञाकारी).
कुछ और लफ़्ज़ जिनमें फ़ का इस्तेमाल होता है लेकिन शुरू’अ में नहीं.. पसफ़र्दा, लफ़्ज़, अलफ़ाज़, दफ़’अतन, सरफ़रोश,सफ़र, हमसफ़र,ख़िलाफ़त (ख़िलाफ़त का मतलब विरोध नहीं होता, ख़िलाफ़त का अर्थ प्रतिनिधित्व होता है),ख़िलाफ़.

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