वापसी की तैयारी

ननकू की छुट्टियाँ ख़त्म होने को आयी हैं और सभी लोग अब वापिस जाने की तैयारी कर रहे हैं. इन तैयारियों में राखी बुआ सबकी मदद करा रही हैं लेकिन साथ ही उनका मन ये भी है कि कुछ दिन और ननकू और सब रुक जाते तो…वो माँ से सवाल करती हैं..
“कुछ दिन और रुक जाते भाभी..बच्चों का तो कितना मन लग गया”
“फिर आ जाएँगे न..अभी ननकू के स्कूल की छुट्टियाँ ख़त्म हो गईं हैं तो अब तो जाना ही होगा..”
बेमन से राखी बुआ ने अपनी भाभी की बात मान ली और कपड़े तह करने में उनकी मदद करने लगीं.
जब से ननकू को मालूम चला है कि अब उनको घर जाना है तब से ननकू भी उदास है. ननकू को मौसी दादी, राखी बुआ और रॉकी चाचा तो ख़ूब पसंद आ गए हैं, ख़ासतौर से ननकू राखी बुआ को मिस करने वाला है. रसगुल्ला भी आज मस्ती नहीं कर रहा है और चीकू चुपचाप ननकू के पास बैठा है..
अचानक कुछ देख कर रसगुल्ला थोड़ा सा उछलता है लेकिन चीकू धीरे से उस पर भौंकता है और वो फिर चुपचाप वहीं बैठ जाता है.

बच्चों को उदास देख मौसी-दादी और दादी को भी अच्छा नहीं लग रहा. दादी ने ननकू को आवाज़ दी.. “ननकू..इधर तो आ ज़रा”
दादी की आवाज़ सुनकर रसगुल्ला और चीकू ने भी ननकू की तरफ़ देखा, ननकू दादी के पास जाने लगा तो रसगुल्ला भी पीछे चलने को था कि चीकू ने रसगुल्ला को जाने क्या इशारा किया कि वो रुक गया..और वापिस अपनी जगह बैठ गया.

सर पर हाथ रखकर दादी ने ननकू से पुछा,”क्या हुआ मेरे बच्चे को..सब क्यूँ इतने उदास हो..” दादी ने रसगुल्ला और चीकू की ओर इशारा करते हुए कहा,”तुम लोग क्यूँ वहाँ बैठे हो, चलो यहाँ आओ..”, दादी की पुकार सुनकर रसगुल्ला का मन हुआ उठने का लेकिन वो इंतज़ार कर रहा था कि चीकू उठे..तभी चीकू उठा और पीछे-पीछे रसगुल्ला भी आ गया..
चीकू को मौसी दादी ने गोद में ले लिया और रसगुल्ला ननकू की गोद में चढ़ बैठा…पास में चारपाई पर बैठीं दादी ने ननकू से कहा,”क्यूँ इतने उदास हो, मैंने राखी और रॉकी सबको बोला है कि वो अगले हफ़्ते ही हमारे घर आएँ..”
ननकू ने बड़ी ही मासूमियत से दादी की बात सुनकर कहा,”दादी..क्या हम राखी बुआ को अपने साथ नहीं ले जा सकते?”
“क्यूँ नहीं, पर वो भी तो पढ़ाई कर रही हैं..उनकी भी तो अभी छुट्टियाँ ख़त्म हो गईं न… लेकिन वो अपने कॉलेज में कुछ रोज़ की छुट्टी लेकर हमारे घर आएँगी.. रॉकी चाचा भी आ जाएँगे”
“अच्छा..दादी क्या मैं राखी बुआ से पूछकर आऊँ कि वो हमारे घर आएँगी?”
“हाँ…पूछकर आओ और हमें भी बताओ कि वो कब तक आएँगी..”

ननकू दौड़ते हुए कमरे में जाता है, पीछे-पीछे रसगुल्ला और चीकू भी दौड़ते हैं…माँ को पैकिंग में मदद कर रहीं राखी बुआ के पास जाकर ननकू पूछता है…”आप हमारे घर आएँगी न?”
राखी बुआ ने ननकू को फ़ौरन गोद में ले लिया..”क्यूँ नहीं आएँगे भई, पर हमको तो कोई बुला ही नहीं रहा है..”
“अरे पर मैं तो बुला रहा हूँ न..दादी भी बुला रही हैं और माँ भी..” तभी ननकू को कुछ ख़याल आया और माँ की ओर देखते हुए कहा,”है न माँ”
माँ ने कहा..”हाँ भई, हम सभी चाहते हैं कि राखी हमारे साथ चलें लेकिन अभी नहीं तो अगले हफ़्ते ही आना है..”
राखी बुआ मुस्कुरा दीं, ननकू तो ख़ूब ख़ुश हो गया..रसगुल्ला मस्त उछलने लगा और चीकू भौंकता हुआ दादी के पास पहुँच गया…
ननकू और रसगुल्ला पीछे पीछे दौड़ते हुए आये..”दादी..राखी बुआ आ रही हैं हमारे घर..माँ ने उन्हें कहा है कि जल्दी ही आ जाएँ..”
ननकू ये कहते हुए दादी की गोद में आ गया, मौसी दादी ने उसके सर पर हाथ रखा और चीकू, रसगुल्ला मस्त गोल गोल नाचने लगे..

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