उफ़्फ़ ये सर्दी

उफ़्फ़ ये सर्दी

रसगुल्ला बिस्तर में ननकू के पैर के पास बैठा उसको देख रहा था कि तभी ननकू उठा और ज़ोर से छींका
“आं…..छूँ”

उसकी आवाज़ से डरकर रसगुल्ला थोड़ी दूर जाकर बैठा गया। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि ननकू को हुआ क्या है..दादी ननकू के बाज़ू में बैठी थीं उन्होंने ननकू के सिर पर हाथ फेरा, तब तक माँ आ गयीं उन्हें देखते ही रसगुल्ला उनकी तरफ़ भागा और माँ की ओर चिंता से देखने लगा।

माँ ने रसगुल्ला को देखा और ननकू की तरफ़ बढ़ गयी। दादी, माँ को देखते ही बोलीं- “बच्चे का छींक-छींक के बुरा हाल है”

“कोई बात नहीं माँ..ठीक हो जाएगा, ये सूप लायी हूँ पियेगा तो आराम मिलेगा..आप भी आराम कर लीजिए”- माँ ने ननकू को देखा.. “ननकू चल सूप पी ले..उठ जा”

दादी ने ननकू के सिर पर हाथ फेरा और उठकर आराम करने गयी। ननकू ने आँखें छोटी सी खोलकर माँ को देखा और कुछ बोलने को मुँह खोला ही था कि..

“आं…..छूँ…आं…..छूँ….आं…..”

रसगुल्ला डरकर आँखें बड़ी करके ननकू को देखने लगा..उसे कुछ समझ नहीं आया तो वो जाकर माँ के पास खड़ा हो गया और माँ के पास उछलने लगा। माँ ने ननकू को गले लगाया और रसगुल्ला को देखकर आँख से इशारा किया। रसगुल्ला चुपचाप खड़ा होकर माँ को देखने लगा और फिर ननकू को देखने लगा।

माँ ने ननकू को गोद में लिया और धीरे-धीरे सूप पिलाने लगीं। ननकू ने आनाकानी की लेकिन माँ ने उसकी एक न मानी। सूप पीकर ननकू को आराम मिला और अब उसे आराम लगने लगा, माँ ने उसको बाम लगाया और उढ़ा दिया। ननकू को देखने के लिए रसगुल्ला उछलकर बिस्तर पर चढ़ने की कोशिश करने लगा..माँ ने रसगुल्ला को हल्के से शांत रहने का इशारा किया। माँ की बात देखते ही रसगुल्ला चुप करके दूर बैठ गया लेकिन उसकी नज़र अब भी ननकू पर लगी थी।

ननकू को नींद आ गयी तो माँ चुपके से उठकर बाहर आने लगीं..रसगुल्ला माँ को देखने लगा उसे समझ नहीं आया कि वो माँ के साथ बाहर जाए या ननकू के पास रुके..आख़िर उसने सोचा कि वो भी ननकू के पास ही रुका रहेगा। रसगुल्ला फ़र्श पर बैठा और वही ऐसे मुँह करके बैठ गया जैसे उसे ननकू दिखता रहे।

माँ ने उसे देखा और मुस्कुरा दीं..जब बाहर निकलकर दरवाज़ा बंद करने लगी तो रसगुल्ला ने हल्के से आवाज़ की। थोड़ी देर में जब माँ ननकू को देखने के लिए आयीं तो अंदर घुसते ही देखी रसगुल्ला भी सो गया था। माँ ने उसे मुस्कुराकर देखा..आगे बढ़कर ननकू के सिर पर हाथ फेरा तो ननकू ने आँख खोली, अब उसको अच्छा लग रहा था सूप ने असर दिखाया था।

“अभी कैसा लग रहा है बेटा?”- माँ ने प्यार से पूछा

ननकू माँ के गले लगते हुए बोला- “नाक में कैसा-कैसा लग रहा है?”

“मेरा बच्चा…”

माँ ननकू के सिर पर हाथ फेरकर उसे गले से लगायी कि..

“आं…..छूँ”

ननकू और माँ ने चौंककर देखा तो रसगुल्ला छींक रहा था लगातार..

“आं…..छूँ…आं…..छूँ….आं…..”

(लो भई ननकू को सर्दी लगी ही हुई थी अब लग गयी रसगुल्ला को भी..अब माँ कैसे ठीक करेंगी ननकू और रसगुल्ला को..क्या रसगुल्ला को भी पीना पड़ेगा सूप? क्या होगा ये तो माँ ही जाने। आप तो बस इतना ही जानिए कि हर रविवार आपकी होगी मुलाक़ात ननकू से)

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