उड़ा रसगुल्ला

ननकू और रसगुल्ला दौड़ते हुए घर पहुँचे दादी बरामदे में बैठी थीं..पापा भी वहीं उनके पास बैठे थे। माँ कहीं नहीं दिख रही थीं..

“दादी…ये देखो ये रसगुल्ला है”- ननकू ने दादी से कहा। रसगुल्ला ननकू के पीछे छुप गया तो ननकू उसे सामने लाते हुए बोला- “रसगुल्ला! डर मत दादी हैं ये”

दादी ने रसगुल्ला को प्यार किया तो रसगुल्ला दादी का हाथ चाटने लगा। इसी बीच डॉली मौसी आ गयीं साथ में विक्की और विन्नी थे।

“ननकू चल नैंसी के ट्री हाउस में चलते हैं”- विक्की बोला

ननकू को याद आया कि दादी को तो ट्री हाउस दिखाया ही नहीं..वो उन्हें ट्री हाउस के बारे में बताने वाला था कि चीकू उछल के ननकू के पास आ गया और उसके साथ खेलने लगा। दोनों को खेलते देख रसगुल्ला भी आ गया और अब ननकू, चीकू और रसगुल्ला खेलने लगे। पापा को देखकर ननकू को अच्छा लगा वो जाकर उनकी गोद में बैठ गया। पापा बोले-

“नदी किनारे पिकनिक पर चलें?”

“हाँ..पापा हम न पिकनिक पर गए थे..” ननकू ने बोलना शुरू किया था कि नैंसी कहीं से आ गयी। ननकू ने उसे देखा तो उसने ननकू को चुप रहने का इशारा किया और उसे बुलायी..ननकू जब नैंसी के पास पहुँच तो नैंसी ने एक बैग़ सामने किया और बोलीं-

“नानी का बड्डे केक है..सीक्रेट है किसी को बताना नहीं”

“अच्छा..पर मैं कहाँ रखूँगा?”- ननकू ने पूछा

“ट्री हाउस में रख देते हैं..” – नैंसी बोली

“हम नदी के किनारे रख देते हैं, जहाँ रसगुल्ला के लिए घर बनाया था”- विन्नी बोली

सारे बच्चे तैयार हो गए। जब निकलने वाले थे कि तभी ज़ोर-ज़ोर से सब तरफ़ आम गिरने लगा..आँधी आ गयी थी..दादी, पापा, चीकू तो दिख ही नहीं रहे थे। ननकू, विक्की, विन्नी, नैंसी और रसगुल्ला ही थे। तभी और ज़ोर से आँधी आने लगी आम के साथ-साथ ननकू, रसगुल्ला, विक्की, विन्नी भी उड़ने लगे कि तभी नैंसी एक परी बन गयी और उसने एक रस्सी नीचे डाली और सबको ट्री- हाउस में खींचने लगी। विक्की, विन्नी और ननकू तो आ गए लेकिन जब ननकू रसगुल्ला को खींचने लगा तो कहीं से हवा आयी और रसगुल्ला को उड़ा ले गयी…ननकू ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगा

“रसगुल्ला..रसगुल्ला..रसगुल्ला”

“ननकू..क्या हुआ?”- माँ ने नींद में रसगुल्ला का नाम पुकारते ननकू को उठाया तो ननकू उठते ही माँ के गले लगकर बोला- “माँ! रसगुल्ला को आँधी ले गयी..मेरा रसगुल्ला”- ननकू रोने लगा

“अरे मेरा बच्चा..सपना था..रसगुल्ला यहीं है”- माँ उसे समझाने लगी

“रसगुल्ला नहीं है..उसको ट्री हाउस में नहीं चढ़ा पाए वो उड़ गया…”- ननकू अपनी बात कहता जाता और रोता भी जाता

ननकू का रोना सुनकर रसगुल्ला दूध छोड़कर दौड़ता हुआ आ गया था। रसगुल्ला आँखें बड़ी करके ननकू को देखने लगा..

“अच्छा..और ये कौन है?”- माँ ने सामने खड़े रसगुल्ला को दिखाकर पूछा

ननकू ने झट से रसगुल्ला को गले से लगा लिया और प्यार करने लगा- “मेरा रसगुल्ला..तू उड़ गया था..वापस आ गया..मेरा रसगुल्ला”

रसगुल्ला भी ननकू के गले से लग गया और उसे प्यार करने लगा..माँ ने प्यार से ननकू को गले लगाया..

“सपना देख रहा था?..कितना डर गया..मेरा ननकू”- माँ ने ननकू के गाल पर हाथ फेरा और छोटी-छोटी आँसुओं की बूँद पोंछी। अब ननकू बिस्तर पर माँ की गोद से टिका हुआ था और रसगुल्ला उसके बाज़ू में बैठा था, वो माँ को अपना सपना सुनाने लगा। माँ उसे प्यार करते हुए उसकी बात सुन रही थी। ननकू रसगुल्ला को पकड़े हुए थे और रसगुल्ला भी सारी बातें सुन रहा था।

(ये तो ननकू का सपना था..जब आप कभी सपना देखते हुए डर जाते हो तो आपको भी माँ ऐसे ही डुलार करती होगी न..आप भी अपने सपने की सारी बात माँ को बता देना, जैसे ननकू बता रहा है)

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