दो कहानीकार, दो कहानियाँ (3): ख़लील जिब्रान और सआदत हसन मंटो…

ख़लील जिब्रान की कहानी: तीन चीटियाँ

एक व्यक्ति धूप में गहरी नींद में सो रहा था.तीन चींटियाँ उसकी नाक पर आकर इकट्ठी हुईं.तीनों ने अपने-अपने क़बीले की रिवायत के अनुसार एक दूसरे का अभिवादन किया और फिर खड़ी होकर बातचीत करने लगीं.

पहली चींटी ने कहा, ‘मैंने इन पहाड़ों और मैदानों से अधिक बंजर जगह और कोई नहीं देखी.” मैं सारा दिन यहां अन्न ढ़ूंढ़ती रही, लेकिन मुझे एक दाना तक नहीं मिला.’

दूसरी चींटी ने कहा,”मुझे भी कुछ नहीं मिला, हालांकि मैंने यहाँ का चप्पा-चप्पा छान मारा है.मुझे लगता है कि यही वह जगह है, जिसके बारे में लोग कहते हैं कि एक कोमल, खिसकती ज़मीन है जहाँ कुछ नहीं पैदा होता.”

तब तीसरी चींटी ने अपना सिर उठाया और कहा,”मेरे मित्रो! इस समय हम सबसे बड़ी चींटी की नाक पर बैठे हैं,जिसका शरीर इतना बड़ा है कि हम उसे पूरा देख तक नहीं सकते.इसकी छाया इतनी विस्तृत है कि हम उसका अनुमान नहीं लगा सकते.इसकी आवाज़ इतनी उँची है कि हमारे कान के पर्दे फट जाऐं.वह सर्वव्यापी है.”

जब तीसरी चींटी ने यह बात कही, तो बाकी दोनों चींटियाँ एक-दूसरे को देखकर जोर से हँसने लगीं.उसी समय वह व्यक्ति नींद में हिला.उसने हाथ उठाकर उठाकर अपनी नाक को खुजलाया और तीनों चींटियाँ पिस गईं.

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सआदत हसन मंटो की कहानी: कम्युनिज़्म

वह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया|
एक ने ट्रक के सामान पर नज़र डालते हुए कहा,” देखो यार, कितने मज़े से अकेला इतना सामान उड़ाए चला जा रहा है|”
सामान के मालिक ने कहा.”जनाब माल मेरा है|”
दो तीन आदमी हँसे,” हम सब जानते हैं|”
एक आदमी चिल्लाया,” लूट लो! यह अमीर आदमी है, ट्रक लेकर चोरियाँ करता है|”

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