घनी कहानी छोटी शाखा

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घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का अंतिम भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद भाग-7 (अब तक आपने पढ़ा…लेखक यहाँ अपने एक मित्र ढपोरशंख की कहानी सुना रहे हैं। ढपोरशंख ने जब लेखक को अपने एक दोस्त के विषय में बताया तो उनकी पत्नी ने उस दोस्त करुणाकर को धोखेबाज़ कहा इस बात पर फ़ैसला करने के लिए लेखक को पाँच बनाकर लेखक को ढपोरशंख करुणाकर […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का छटवाँ भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद भाग-6 (अब तक आपने पढ़ा…लेखक यहाँ अपने एक मित्र ढपोरशंख की कहानी सुना रहे हैं। ढपोरशंख ने जब लेखक को अपने एक दोस्त के विषय में बताया तो उनकी पत्नी ने उस दोस्त करुणाकर को धोखेबाज़ कहा इस बात पर फ़ैसला करने के लिए लेखक को पाँच बनाकर लेखक को ढपोरशंख करुणाकर […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का पाँचवाँ भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद भाग-5 (अब तक आपने पढ़ा…लेखक यहाँ अपने एक मित्र ढपोरशंख की कहानी सुना रहे हैं। ढपोरशंख ने जब लेखक को अपने एक दोस्त के विषय में बताया तो उनकी पत्नी ने उस दोस्त करुणाकर को धोखेबाज़ कहा इस बात पर फ़ैसला करने के लिए लेखक को पाँच बनाकर लेखक को ढपोरशंख करुणाकर […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का चौथा भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद भाग-4 (अब तक आपने पढ़ा…लेखक अपने एक मित्र के यहाँ आए हैं जिन्हें वो ढपोरशंख कहकर बुलाते हैं। इस मित्र के यहाँ आने पर उन्हें ढेर सारी चिट्ठियाँ मिलती हैं, जिसके बारे में पूछने पर पता चलता है कि वो उन्हें एक नए मित्र करुणाकर ने लिखी हैं। इस बात पर मित्र […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का दूसरा भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद  भाग-2 (अब तक आपने पढ़ा…लेखक अपने मित्र के बारे में बताते हैं जिन्हें वो रत्न मानते हैं लेकिन ढपोरशंख कहकर बुलाते हैं क्योंकि उनके मित्र भले ही अभावों में रह लें लेकिन न किसी के सामने हाथ फैलाते हैं और न ही अपनी ग़रीबी का रोना रोते। अगर कोई उन्हें बच्चों के […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: मुंशी प्रेमचंद की कहानी “ढपोरशंख” का पहला भाग

ढपोरशंख- मुंशी प्रेमचंद  भाग-1  मुरादाबाद में मेरे एक पुराने मित्र हैं, जिन्हें दिल में तो मैं एक रत्न समझता हूँ पर पुकारता हूँ ढपोरशंख कहकर और वह बुरा भी नहीं मानते। ईश्वर ने उन्हें जितना ह्रदय दिया है, उसकी आधी बुद्धि दी होती, तो आज वह कुछ और होते ! उन्हें हमेशा तंगहस्त ही देखा; मगर […]

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घनी कहानी छोटी शाखा: सत्यजीत रे की कहानी “कॉर्वस” का अंतिम भाग

कॉर्वस- सत्यजीत रे भाग- 6 (अब तक आपने पढ़ा…इस कहानी में हमें लेखक सत्यजीत रे ने एक वैज्ञानिक श्रीमान शोंकू की डायरी की बातें हमें पढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक शोंकू को बचपन से ही पक्षियों में काफ़ी रुचि रही है और इस रुचि में बढ़ोतरी होती है जब एक दिन उनकी पालतू मैना “भूचाल-भूचाल” चिल्लाने […]

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घनी कहानी छोटी शाखा: सत्यजीत रे की कहानी “कॉर्वस” का पाँचवाँ भाग

कॉर्वस- सत्यजीत रे भाग- 5 (अब तक आपने पढ़ा…इस कहानी में हम एक वैज्ञानिक श्रीमान शोंकू की डायरी की बातें पढ़ रहे हैं। जिससे हमें पता चलता है कि श्रीमान शोंकू को बचपन से ही पक्षियों और उनकी विलक्षण प्रतिभाओं में रुचि थी, जिसके चलते उन्होंने बाद में एक मशीन बनायी। इस मशीन के ज़रिए […]

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घनी कहानी छोटी शाखा: सत्यजीत रे की कहानी “कॉर्वस” का चौथा भाग

कॉर्वस- सत्यजीत रे भाग- 4 (अब तक आपने पढ़ा…सत्यजीत रे की इस कहानी में हम एक वैज्ञानिक की डायरी की प्रविष्टियाँ पढ़ रहे हैं। जिसमें वैज्ञानिक यानी श्रीमान शोंकू बचपन से ही पक्षियों के गुणों से प्रभावित हैं और वो उन पर काम करना चाहते हैं आख़िरकार उन्हें सालों बाद इस बात की याद आती […]

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घनी कहानी छोटी शाखा: सत्यजीत रे की कहानी “कॉर्वस” का तीसरा भाग

कॉर्वस- सत्यजीत रे भाग- 3 (अब तक आपने पढ़ा..सत्यजीत रे इस कहानी में एक वैज्ञानिक की डायरी की प्रविष्टियाँ हमें पढ़ा रहे हैं। यहाँ वैज्ञानिक बचपन से अपने पक्षी प्रेम के बारे में बताते हुए ये बताते हैं कि किस तरह उनके घर की पालतू मैना ने आम बोलचाल के सीखे हुए शब्द से अलग […]

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