10 शा’इर 10 शे’र

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (13): 10 शा’इरों के 10 शेर

1. आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये मीर तक़ी मीर 2. रात आई उधर सितारों ने शबनमी पैरहन लिबास किया रसा चुग़ताई 3. दुश्मन-ए-जाँ कई क़बीले हुए फिर भी ख़ुशबू के हाथ पीले हुए नोशी गिलानी 4. बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे मिर्ज़ा […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (12): तितलियों पर 10 शा’इरों के 10 शेर

1. तितलियाँ जुगनू सभी होंगे मगर देखेगा कौन हम सजा भी लें अगर दीवार-ओ-दर देखेगा कौन नोशी गिलानी 2. काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा परवीन शाकिर 3. उजाड़ तपती हुई राह में भटकने लगी न जाने फूल ने क्या कह दिया था तितली से […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (11): बरसात पर 10 शा’इरों के 10 शेर

1. याद आई वो पहली बारिश जब तुझे एक नज़र देखा था नासिर काज़मी 2. आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए ज़फ़र गोरखपुरी 3. तमाम रात नहाया था शहर बारिश में वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे जमाल एहसनी 4. […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (10): 10 शा’इर, 10 शे’र..

1. वो बेदर्दी से सर काटें ‘अमीर’ और मैं कहूँ उनसे, हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता जनाब आहिस्ता आहिस्ता अमीर मीनाई 2. चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़ तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद दाग़ देहलवी 3. आदतन तुम ने कर दिए वादे आदतन हम ने ए’तिबार किया गुलज़ार 4. सोचो तो बड़ी चीज़ है तहज़ीब बदन […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (9): 10 शा’इर, 10 शे’र..

1. आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से, इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए ज़फ़र गोरखपुरी 2. अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की परवीन शाकिर 3. कहते हैं ज़ौक़ आज यहाँ से गुज़र गया, क्या ख़ूब आदमी था ख़ुदा मग़फ़रत […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (8): 10 शा’इर, 10 शे’र..

1. चाहिए उसका तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या बहादुर शाह “ज़फ़र” 2. अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ शाम आ गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या मुनीर नियाज़ी 3. ख़ुदा से क्या मोहब्बत कर सकेगा जिसे नफ़रत है उसके आदमी से नरेश […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (7): 10 शा’इर, 10 शे’र..

1. उस बिन जहान कुछ नज़र आता है और ही, गोया वो आसमाँ नहीं, वह ज़मीं नहीं जुर’अत 2. आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक, कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक मिर्ज़ा ग़ालिब 3. दर्दे दिल, पासे वफ़ा, जज़्बए ईमाँ होना, आदमीयत है यही और यही इंसाँ होना बृज नारायण […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (6): 10 शा’इर, 10 शे’र..

1. दोनों जहान देके वो समझे यह ख़ुश रहा याँ आ पड़ी यह शर्म कि तकरार क्या करें मिर्ज़ा ग़ालिब 2. अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए ओबैदुल्लाह अलीम 3. ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (5): 10 शा’इर, 10 शे’र..

साहित्य दुनिया की इस विशेष सीरीज़ में हम आज जिन 10 शा’इरों के शे’र आपके सामने पेश कर रहे हैं वो हैं इफ़्तिख़ार आरिफ़,अहमद मुश्ताक़, मीर तक़ी मीर, जोश मलीहाबादी,हसरत मोहानी, जाफ़र अली “हसरत”,बेहज़ाद लखनवी, अकबर इलाहाबादी, अब्दुल हमीद “अदम” और बशीर बद्र. 1. एक हम ही तो नहीं हैं जो उठाते हैं सवाल जितने […]

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साहित्य दुनिया सीरीज़ (4): 10 शा’इर, 10 शे’र..

साहित्य दुनिया की इस विशेष सीरीज़ में हम आज जिन 10 शा’इरों के शे’र आपके सामने पेश कर रहे हैं वो हैं क़तील शिफ़ाई, आरज़ू लखनवी, असरार उल हक़ मजाज़,मुनीर नियाज़ी, सलीम कौसर, माधव राम जौहर, ज़हरा निगाह, साहिर लुधियानवी, परवीन शाकिर और अमीर मीनाई. 1. अहबाब को दे रहा हूँ धोका चेहरे पे ख़ुशी […]

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