हिंदी की पहली कहानी

साहित्य दुनिया

घनी कहानी, छोटी शाखा: चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” का अंतिम भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’” की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” ..आज पढ़िए तीसरा और अंतिम भाग) सुखमय जीवन- चंद्रधर शर्मा “गुलेरी” भाग-3 (अब तक आपने पढ़ा..कहानी के नायक जयदेवशरण वर्मा अपने दोस्त से मिलने सायकिल लेकर निकलते हैं, रास्ते में सायकिल के चक्के की हवा निकल जाने की वजह से उनकी […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” का दूसरा भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’” की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” ..आज पढ़िए दूसरा भाग) सुखमय जीवन- चंद्रधर शर्मा “गुलेरी” भाग-2 (अब तक आपने पढ़ा..अपने एल. एल. बी. के परिणाम के इंतज़ार में घर में बैठना मुश्किल पाकर, कहानी का नायक अपने घर सितारपुर से पाँच मील दूर कालानगर अपने मित्र से […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” का पहला भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..आज से पेश है “चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’” की लिखी कहानी “सुखमय जीवन” ..आज पढ़िए पहला भाग) सुखमय जीवन- चंद्रधर शर्मा “गुलेरी” भाग-1 परीक्षा देने के पीछे और उसके फल निकलने के पहले दिन किस बुरी तरह बीतते हैं, यह उन्हीं को मालूम है जिन्हें उन्हें गिनने का अनुभव हुआ है। सुबह उठते ही परीक्षा से आज तक कितने दिन गए, […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: बंग महिला राजेंद्रबाला घोष की लिखी कहानी “दुलाईवाली” का अंतिम भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “बंग महिला राजेंद्रबाला घोष” की लिखी कहानी “दुलाईवाली”..आज पढ़िए तीसरा और अंतिम भाग) दुलाई वाली- बंग महिला राजेंद्र बाला घोष  भाग-3 (अब तक आपने पढ़ा…बंशीधर अपनी ससुराल बनारस से अपनी पत्नी जानकी को जल्दी विदा करा लाते हैं क्योंकि उनके ममेरे भाई और बहुत अच्छे मित्र नवलकिशोर […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: बंग महिला राजेंद्रबाला घोष की लिखी कहानी “दुलाईवाली” का दूसरा भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “बंग महिला राजेंद्रबाला घोष” की लिखी कहानी “दुलाईवाली”..आज पढ़िए दूसरा भाग) दुलाई वाली- बंग महिला राजेंद्र बाला घोष   भाग-2   (अब तक आपने पढ़ा…इलाहाबाद के रहने वाले बंशीधर अपनी पत्नी जानकी को उसके मायक़े से वापस ले जाने के लिए बनारस आए हुए हैं..उनके ससुराल में सास […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: बंग महिला राजेंद्रबाला घोष की लिखी कहानी “दुलाईवाली” का पहला भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..आज से पेश है “बंग महिला राजेंद्रबाला घोष” की लिखी कहानी “दुलाईवाली” ..आज पढ़िए पहला भाग) दुलाई वाली- बंग महिला राजेंद्र बाला घोष   भाग-1 काशी जी के दशाश्वमेध घाट पर स्नान करके एक मनुष्य बड़ी व्यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती और दूसरे […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: जयशंकर प्रसाद की लिखी कहानी “ग्राम” का अंतिम भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “जयशंकर प्रसाद” की लिखी कहानी “ग्राम” ..आज दूसरा और अंतिम भाग) ग्राम- जयशंकर प्रसाद  भाग-2 (अब तक आपने पढ़ा। गाँव के स्टेशन पर मोहनलाल ट्रेन से उतरते हैं, स्टेशन मास्टर से बातचीत के दौरान ये पता चलता है कि वो कुसुमपुर के अपने इलाक़े में लोगों […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: जयशंकर प्रसाद की लिखी कहानी “ग्राम” का पहला भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..आज से पेश है “जयशंकर प्रसाद” की लिखी कहानी “ग्राम” ..आज पढ़िए पहला भाग) ग्राम- जयशंकर प्रसाद  भाग-1  टन! टन! टन! स्टेशन पर घण्टी बोली। श्रावण-मास की सन्ध्या भी कैसी मनोहारिणी होती है! मेघ-माला-विभूषित गगन की छाया सघन रसाल-कानन में पड़ रही है! अँधियारी धीरे-धीरे अपना अधिकार पूर्व-गगन में जमाती हुई, सुशासनकारिणी महारानी के समान, विहंग प्रजागण […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: राधिकारमण प्रसाद सिंह की लिखी कहानी “कानों में कँगना” का अंतिम भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “राधिकारमण प्रसाद सिंह” की लिखी कहानी “कानों में कँगना”..आज पढ़िए तीसरा और अंतिम भाग) कानों में कँगना-राधिकारमण प्रसाद सिंह  भाग-3   (अब तक आपने पढ़ा..नरेंद्र, जो हृषीकेश में अपने पिता के मित्र योगीश्वर के पास रहकर धर्म ग्रंथों की शिक्षा ले रहा है, योगीश्वर की बेटी किरन की […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: राधिकारमण प्रसाद सिंह की लिखी कहानी “कानों में कँगना” का दूसरा भाग

(हिंदी की पहली कहानी कौन-सी है? इस सवाल पर अलग-अलग जानकारों के अलग-अलग मत हैं..और उन मतों के अनुसार ही कुछ कहानियों को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है। कुछ दिनों से आप “घनी कहानी छोटी शाखा” में पढ़ रहे हैं, ऐसी ही कुछ कहानियों को, जो मानी जाती हैं हिंदी की पहली कहानियों में से एक..इन दिनों आप पढ़ रहे हैं “राधिकारमण प्रसाद सिंह” की लिखी कहानी “कानों में कँगना”..आज पढ़िए दूसरा भाग) कानों में कँगना-राधिकारमण प्रसाद सिंह  भाग-2   (अब तक आपने पढ़ा..किरन से रोज़ भेंट होने के बाद भी कहानी के नायक के मन में उसके लिए प्रेम का वो भाव नहीं उपजा था जो किरन को कानों […]

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