सआदत हसन मंटो

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घनी कहानी, छोटी शाखा: सआदत हसन ‘मंटो’ की कहानी ‘नया क़ानून’ का तीसरा भाग

नया क़ानून (तीसरा भाग) तालीम में सिफ़र होने के बावजूद मंगू कोचवान को उसके अड्डे पर एक अक़्लमंद आदमी समझा जाता था. वो अपनी सवारियों की आपस की बातचीत से कुछ वैश्विक ख़बरें पा जाता था जिसको वो अड्डे पर सुनाता था और वाहवाही लूटता था. उसे अंग्रेज़ों से सख्त़ नफ़रत थी, उसकी वजह ये […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: सआदत हसन ‘मंटो’ की कहानी ‘नया क़ानून’ का दूसरा भाग

नया क़ानून (दूसरा भाग) तालीम में सिफ़र होने के बावजूद मंगू कोचवान को उसके अड्डे पर एक अक़्लमंद आदमी समझा जाता था. वो अपनी सवारियों की आपस की बातचीत से कुछ वैश्विक ख़बरें पा जाता था जिसको वो अड्डे पर सुनाता था और वाहवाही लूटता था. उसे अंग्रेज़ों से सख्त़ नफ़रत थी, उसकी वजह ये […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: सआदत हसन ‘मंटो’ की कहानी ‘नया क़ानून’ का पहला भाग

नया क़ानून (पहला भाग) मंगू कोचवान अपने अड्डे में बहुत अक़्लमंद आदमी समझा जाता था, हालाँकि उसकी तालीमी हैसियत सिफ़र के बराबर थी और उसने कभी स्कूल का मुँह भी नहीं देखा था। लेकिन इसके बावजूद उसे दुनिया भर की चीज़ों का इल्म था। अड्डे के वह तमाम कोचवान जिनको यह जानने की ख्व़ाहिश होती […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: सआदत हसन मंटो की कहानी “खोल दो” का अंतिम भाग

खोल दो-सआदत हसन मंटो  भाग-2  (अब तक आपने पढ़ा..जब स्पेशल ट्रेन अमृतसर से मुग़लपुरा पहुँचते ही सिराजुद्दीन ख़ुद को लोगों की भीड़ में पाता है और कुछ देर भटकने के बाद उसे अपनी बेटी सकीना की याद आती है, जिसे वो अपनी मरती बीवी के कहने पर बचाकर लाया होता है। सकीना को अपने साथ न पा […]

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घनी कहानी, छोटी शाखा: सआदत हसन मंटो की कहानी “खोल दो” का पहला भाग

खोल दो-सआदत हसन मंटो  भाग-1  अमृतसर से स्पेशल ट्रेन दोपहर दो बजे चली और आठ घंटों के बाद मुगलपुरा पहुंची। रास्ते में कई आदमी मारे गए। अनेक ज़ख़्मी हुए और कुछ इधर-उधर भटक गए। सुबह दस बजे कैंप की ठंडी जमीन पर जब सिराजुद्दीन ने आँखें खोलीं और अपने चारों तरफ मर्दों, औरतों और बच्चों […]

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दो कहानीकार, दो कहानियाँ (6): हरिशंकर परसाई और मंटो

हरिशंकर परसाई की कहानी: अपना-पराया “आप किस स्कूल में शिक्षक हैं?” “मैं लोकहितकारी विद्यालय में हूँ, क्यों, कुछ काम है क्या?” “हाँ, मेरे लड़के को स्कूल में भर्ती करना है” “तो हमारे स्कूल में ही भर्ती करवा दीजिए।” “पढ़ाई-वढ़ाई कैसी है?” “नम्बर वन! बहुत अच्छे शिक्षक हैं, बहुत अच्छा वातावरण है, बहुत ही अच्छा स्कूल […]

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“एक लेखक क़लम तभी उठाता है जब उसकी समझ को आघात पहुँचता है”

आज एक मेसेज मेरे पास आया, उस मेसेज में ये बताने की कोशिश की गयी है कि उर्दू के मशहूर कहानीकार मंटो की पैदाइश लोग भूल गए हैं. गोया ये बात सच भी है लेकिन शायद नहीं भी है. ब-तारीख़ हम भूल भी गए हों लेकिन मंटो हमारे आस पास ही है, मेरे आपके, हम […]

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दो कहानीकार, दो कहानियाँ (3): ख़लील जिब्रान और सआदत हसन मंटो…

ख़लील जिब्रान की कहानी: तीन चीटियाँ एक व्यक्ति धूप में गहरी नींद में सो रहा था.तीन चींटियाँ उसकी नाक पर आकर इकट्ठी हुईं.तीनों ने अपने-अपने क़बीले की रिवायत के अनुसार एक दूसरे का अभिवादन किया और फिर खड़ी होकर बातचीत करने लगीं. पहली चींटी ने कहा, ‘मैंने इन पहाड़ों और मैदानों से अधिक बंजर जगह […]

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दो कहानीकार, दो कहानियाँ (2): अमृता प्रीतम और मंटो

अमृता प्रीतम की कहानी- जंगली बूटी अगूरी, मेरे पड़ोसियों के पड़ोसियों के पड़ोसियों के घर, उनके बड़े ही पुराने नौकर की बिलकुल नई बीवी है। एक तो नई इस बात से कि वह अपने पति की दूसरी बीवी है, सो उसका पति ‘दुहाजू’ हुआ। जू का मतलब अगर ‘जून’ हो तो इसका मतलब निकला ‘दूसरी […]

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