मिर्ज़ा ग़ालिब

एक शाइर सौ शेर शाइरी

एक शाइर, सौ शेर: मिर्ज़ा ग़ालिब

1. फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं, फिर वही ज़िंदगी हमारी है 2. बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं ‘ग़ालिब’ कुछ तो है जिसकी पर्दा-दारी है 3. हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने, ग़ैर को तुझ से मुहब्बत ही सही 4. हम कोई तर्क-ए-वफ़ा करते हैं, न सही इश्क़ मुसीबत ही सही 5. यार से छेड़ चली […]

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दो शाइर दो ग़ज़लें शाइरी

दो शाइर, दो ग़ज़लें (22): मिर्ज़ा ग़ालिब और परवीन शाकिर…

मिर्ज़ा ग़ालिब की ग़ज़ल घर हमारा जो न रोते भी तो वीराँ होता बहर गर बहर न होता तो बयाबाँ होता तंगी-ए-दिल का गिला क्या ये वो काफ़िर-दिल है कि अगर तंग न होता तो परेशाँ होता बाद यक-उम्र-ए-वरा बार तो देता बारे काश रिज़वाँ ही दर-ए-यार का दरबाँ होता ___________________________________ परवीन शाकिर की ग़ज़ल […]

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साहित्य दुनिया

मिर्ज़ा ग़ालिब की रुबाइयाँ…

मिर्ज़ा ग़ालिब (27 दिसंबर, 1796 – 15 फ़रवरी 1869) उर्दू के सबसे महान शा’इरों में शुमार किये जाते हैं.उनकी ग़ज़लें तो सभी जानते हैं कि कितनी मक़बूल हैं लेकिन उनकी रुबाइयाँ भी उतनी ही मज़ेदार और प्यारी हैं. 1. आताशबाज़ी है जैसे शग़्ले-अत्फ़ाल है सोज़े-जिगर का भी इसी तौर का हाल था मूजिदे-इश्क़ भी क़यामत […]

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दो शाइर दो रूबाई शाइरी साहित्य दुनिया

दो शा’इर दो रूबाई (3): ग़ालिब और फ़िराक़..

मिर्ज़ा ग़ालिब की रूबाई दुःख जी के पसंद हो गया है ‘ग़ालिब’, दिल रुककर बन्द हो गया है ‘ग़ालिब’, वल्लाह कि शब् को नींद आती ही नहीं, सोना सौगंद हो गया है ‘ग़ालिब’ …. नोट- मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के सबसे महान शा’इरों में शुमार किये जाते हैं. असद उल्लाह ख़ा “ग़ालिब” का जन्म 27 दिसंबर, […]

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साहित्य दुनिया

ग़ालिब के ख़तों के बारे में और उनका मुंशी हरगोपाल ‘तफ़्ता’ को लिखा ख़त

मिर्ज़ा ग़ालिब की शा’इरी के तो सभी दीवाने हैं लेकिन बात नस्र की करें तो उसमें भी ग़ालिब अव्वल ही आते हैं. उनके बारे में फ़िराक़ गोरखपुरी अपनी किताब ‘उर्दू भाषा और साहित्य’ में लिखते हैं,”ग़ालिब से पहले फ़ारसी के ढंग पर उर्दू के मुंशी लोग बनावटी और भारी भरकम ढंग से पत्र लिखा करते […]

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दो शाइर दो ग़ज़लें शाइरी साहित्य दुनिया

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (4): ग़ालिब और ज़ौक़…

“साहित्य दुनिया” केटेगरी के अंतर्गत “दो शा’इर, दो ग़ज़लें” सिरीज़ में हम आज जिन दो शा’इरों की ग़ज़लें आपके सामने पेश कर रहे हैं वो एक ही दौर के हैं और उर्दू शा’इरी में उस्ताद माने जाते हैं. शेख़ इब्राहिम “ज़ौक़” जो कि आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह “ज़फ़र” के उस्ताद थे और हमारे सबके […]

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साहित्य दुनिया

मीर मेंहदी के नाम मिर्ज़ा ग़ालिब का ख़त..

मीर मेंहदी के नाम मिर्ज़ा ग़ालिब का ख़त जाने-ग़ालिब ! अब की ऐसा बीमार हो गया था कि मुझको ख़ुद अफ़सोस था. पांचवें दिन ग़िज़ा खायी. अब अच्छा हूँ. तंदरुस्त हूँ, ज़िलहिज्ज १२७६ हिजरी तक कुछ खटका नहीं है. मुहर्रम की पहली तारीख़ से अल्लाह मालिक है. मीर नसीर उद्दीन आये कई बार. मैंने उनको […]

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