जिगर मुरादाबादी

एक शाइर सौ शेर शाइरी

एक शाइर, सौ शेर: जिगर मुरादाबादी

1- अपना ज़माना आप बनते हैं अहल-ए-दिल हम वो नहीं कि जिनको ज़माना बना गया 2- आँखों का क़सूर था न दिल का क़सूर था आया जो मेरे सामने मेरा ग़ुरूर था 3- वो थे न मुझसे दूर न मैं उनसे दूर था आता न था नज़र तो नज़र का क़सूर था 4- जिस दिल […]

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दो शाइर दो ग़ज़लें शाइरी साहित्य दुनिया

दो शा’इर, दो ग़ज़लें (6): जिगर मुरादाबादी और इरफ़ान सिद्दीक़ी…

दो शा’इर, दो ग़ज़लें सीरीज़ में हम आज आपके सामने जिगर मुरादाबादी और इरफ़ान सिद्दीक़ी की ग़ज़लें पेश कर रहे हैं. जिगर मुरादाबादी की ग़ज़ल: हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं, हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं बे-फ़ायदा अलम नहीं […]

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दो शाइर दो ग़ज़लें शाइरी साहित्य दुनिया

दो शा’इर, दो ग़ज़लें(1): जिगर मुरादाबादी और साहिर लुधियानवी….

आज से हमने “भारत दुनिया” पर एक नयी सीरीज़ शुरू करने की सोची है. हम अब लगातार अपने पाठकों के लिए मशहूर शा’इरों की ग़ज़लें भी साझा किया करेंगे. इस सिलसिले को शुरू करते हुए हम आज दो ग़ज़लें आपके सामने पेश कर रहे हैं, एक ग़ज़ल जिगर मुरादाबादी की है जबकि दूसरी ग़ज़ल साहिर […]

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