अलफ़ाज़ की बातें

अलफ़ाज़ की बातें

अलफ़ाज़ की बातें (16): जावेद या ज़ावेद?

हमसे बहुत से सवाल ईमेल और सोशल मीडिया के ज़रिए पूछे जाते हैं. कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में हमने कभी सोचा ही नहीं था. इसी में से एक शब्द की चर्चा हम आज करेंगे. एक बहुत कॉमन नाम जो सुनने को मिलता है वो है “जावेद”, इस नाम से एक मशहूर शाइर भी […]

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साहित्य दुनिया

अलफ़ाज़ की बातें (15): लखनऊ या लख़नऊ?

लखनऊ एक ऐसा शहर है जो पूरी दुनिया में अपनी ज़बान और तहज़ीब के लिए जाना जाता है. लखनऊ शहर को उर्दू के बहुत नज़दीक माना जाता है लेकिन ये भी सच है कि पिछले कुछ सालों में यहाँ एक नया शहर बस गया है. नए बसे लोग भी धीरे-धीरे पुराने शहर की तहज़ीब को […]

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अलफ़ाज़ की बातें

अलफ़ाज़ की बातें (14): हालातों, जज़्बातों, अल्फ़ाज़ों ग़लत क्यूँ?

अक्सर हम देखते हैं कि सोशल मीडिया पर हमें ऐसे लेख पढ़ने को मिल जाते हैं जिनमें “हालातों”, “जज़्बातों” या “अल्फ़ाज़ों” का इस्तेमाल होता है जबकि ये पूरी तरह से ग़लत है. हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे कारण क्या है. अस्ल में “हाल” शब्द का अर्थ होता है “अवस्था” या “स्थिति” (condition). इस […]

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अलफ़ाज़ की बातें साहित्य दुनिया

अलफ़ाज़ की बातें (13): मेरे, मिरे, तेरे, तिरे, दिवाने, दीवाने, एक, इक…

हम अक्सर उर्दू शाइरी में मिरे, तिरे, दिवाने, इक, ख़मोशी इत्यादि शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. जिन शब्दों का हम ज़िक्र कर रहे हैं अगर उनको हम समझें तो आमतौर पर इन शब्दों की जगह क्रमशः मेरे, तेरे, दीवाने, एक,ख़ामोशी इस्तेमाल में लाये जाते हैं. आप लोगों को बिलकुल परेशान होने की ज़रुरत नहीं है, […]

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अलफ़ाज़ की बातें (12): अलविदा’अ, शाइरी, त’अज्जुब…

अलविदा’अ(الوداع): इसका अर्थ होता है इस शब्द को अक्सर लोग अलविदा पढ़ते हैं लेकिन इसको सही तरह से पढेंगे तो अलविदा’अ पढेंगे. उर्दू शा’इरी में इसका वज़्न 2121 लिया जाता है. (अल-2, वि-1,दा-2,अ-1) मख़मूर सईदी का शेर- घर में रहा था कौन कि रुख़्सत करे हमें, चौखट को अलविदा’अ कहा और चल पड़े _________ शा’इरी […]

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अलफ़ाज़ की बातें (11): हमला-आवर, आशुफ़्ता, गुज़िश्ता, दस्त और दश्त…

हमला-आवर (حملہ آور): हमला-आवर एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे आम लोग ‘हमलावर’ पढ़ते हैं जोकि सही नहीं है. इसका सही उच्चारण हम’ल’आवर ही है. उर्दू शा’इरी में इसका वज़्न 21-22 लिया जाता है,(हम-2, ल-1, आ-2, वर-2). साक़ी फ़ारूक़ी का मत’ला देखिये- हमला-आवर कोई अक़ब से है, ये तआक़ुब में कौन कब से है (अक़ब- पीछे) […]

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अलफ़ाज़ की बातें (10): फूल, फिर, सरफिरा..

फूल (پھول):: फूल (अर्थ- flower) एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे आजकल की पीढ़ी फ़ूल (Fool) बोलने लगी है जबकि इसमें फ के नीचे कोई बिंदी नहीं लगी है, इस वजह से इसे Ph (प के साथ ह की आवाज़ रहेगी एकमुश्त) की आवाज़ में लिया जाएगा और फूल(Phool) पढ़ा जाएगा.उर्दू शा’इरी में फूल का वज़्न […]

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अलफ़ाज़ की बातें(9): सागर, साग़र और जलील, ज़लील…

सागर(ساگر) और साग़र (ساغر) दो ऐसे लफ़्ज़ हैं जिनके उच्चारण में जो अंतर है वो यूँ तो साफ़ है लेकिन अक्सर लोग इसका उच्चारण ग़लत कर जाते हैं. कुछ लोगों को दोनों लफ़्ज़ों का अर्थ भी एक ही लगता है लेकिन दोनों लफ़्ज़ों के बोलने का तरीक़ा और अर्थ दोनों ही अलग-अलग हैं. सागर लफ़्ज़ […]

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अलफ़ाज़ की बातें(8): क़मर, कमर और उरूज, अरूज़..

क़मर (قمر)  और कमर (کمر)  अक्सर लोगों को कमर और क़मर एक से लगते हैं पर थोड़े से अलग हैं. दोनों शब्दों का अर्थ भी बिलकुल जुदा है.  पहला शब्द क़मर है, जिसका अर्थ होता है चाँद जबकि दूसरा शब्द कमर है, कमर का अर्थ होता है शरीर का एक हिस्सा जिसे अंग्रेज़ी में Waist […]

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अलफ़ाज़ की बातें(7): ज़िम्’मदार, ज़ियादा, ज़ियादत…

ज़िम्’मदार (ज़िम्मेदार)– इसका अर्थ होता है ज़मानत, जवाबदेही, कार्यभार। ये लफ़्ज़ ज़िम्मा से बनता है, ज़िम्मा का अर्थ है उत्तरदायित्व। ज़िम्मेदार एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे अधिकतर लोग जिम्मेवार पढ़ने और लिखने लगे हैं, इतना ही नहीं एक साल सिविल सेवा की परीक्षा के प्रश्न पत्र में इसे जिम्मेवार लिख दिया गया था और इस […]

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