शा’इरी की बातें(16): वज़्न करने का तरीक़ा (10)

आज हम आपको उर्दू शाइरी में इस्तेमाल की जाने वाली जिस बह्र के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम है बह्र ए मुतदारिक. इसका रुक्न “फ़ा-इ-लुन(2-1-2)” है. इस रुक्न के बारे में हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं. इस बह्र की सभी ग़ज़लें इसी रुक्न पर आधारित होंगी.

मुरब’अ: फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन (2-1-2 2-1-2) [इसमें मु-फ़ा-ई-लुन रुक्न दो बार आया है]
शे’र:
तुम मिरे पास हो,
पास है ज़िन्दगी

इस शेर को तक़ती’अ करके देखिये-

तुम-2, मि-1,रे-2, पा-2,स-1, हो-2,
पा-2,स-1, है-2, ज़िन्-2,द-1, गी-2

दोनों मिसरों को ध्यान से देखिये, मिसरा ए ऊला (पहले मिसरे) में 2-1-2 2-1-2 का इस्तेमाल हुआ है और यही दूसरे मिसरे में हुआ है. एक भी गिनती इधर से उधर होने पर शेर बे-वज़्नी कहा जाएगा.

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मुसद्दस: फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन (2-1-2 2-1-2 2-1-2) [इसमें फ़ा-इ-लुन रुक्न में तीन बार आया है]

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मसम्मन: फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन (2-1-2 2-1-2 2-1-2 2-1-2)[इसमें फ़ा-इ-लुन रुक्न चार बार आया है]

शेर:
कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई आवाज़ आती रही रात भर (मख़दूम मुहिउद्दीन)

इस शेर को तक़ती’अ करके देखिये-
को-2,ई-1 दी-2,वा-2,ना-1 गलि-2,यों-2 में-1, फिर-2,ता-2, र-1,हा-2
को-2,ई-1 आ-2,वा-2,ज़-1 आ-2,ती-2 र-1,ही-2, रा-2,त-1 भर-2


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मुइज़ाफ़ी मुसम्मन: फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन फ़ा-इ-लुन(2-1-2 2-1-2 2-1-2 2-1-2 2-1-2 2-1-2 2-1-2 2-1-2) [इसमें फ़ा-इ-लुन रुक्न आठ बार आया है]

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