साहित्य दुनिया सीरीज़ (9): 10 शा’इर, 10 शे’र..

1.
आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से,
इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए

ज़फ़र गोरखपुरी

2.
अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है
जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की

परवीन शाकिर

3.
कहते हैं ज़ौक़ आज यहाँ से गुज़र गया,
क्या ख़ूब आदमी था ख़ुदा मग़फ़रत करे

ज़ौक़

4.
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,
ख़ुदा बन्दे से ख़ुद पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है

इक़बाल

5.
मुझे सुने ना कोई मस्त-ए-बादा-ए-इशरत
मजाज़ टूटे हुए दिल की इक सदा हूँ मैं

मजाज़

6.
आँसूओं में हिज्र में बरसात रखिए साल भर,
हमको गर्मी चाहिए हरगिज़ ना जाड़ा चाहिए

नासिख़

7.
इक लफ़्ज़ ए मुहब्बत का अदना ये फ़साना है,
सिमटे तो दिल ए आशिक़ फैले तो ज़माना है

जिगर मुरादाबादी

8.
मैं और ज़ौक़ ए बादाकशी ले गयी मुझे,
ये कम निगाहियाँ तेरी बज़्म ए शराब में

मुफ़्ती सदरुद्दीन ख़ाँ “आज़ुर्दा”

9.
मेरी बातों से कुछ सबक़ भी ले,
मेरी बातों का कुछ बुरा भी मान

राहत इन्दौरी

10.
किसे ख़बर थी हमें राहबर ही लूटेंगे,
बड़े ख़ुलूस से हम कारवाँ के साथ रहे

हबीब जालिब

[फ़ोटो क्रेडिट(फ़ीचर्ड इमेज): प्रियंका शर्मा]

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