हिंदी-उर्दू को बचाने की एक मुहिम है साहित्य दुनिया, होने जा रहा है पहला इवेंट

साहित्य दुनिया एक ऐसा मंच है जो हिंदी और उर्दू साहित्य को आम जन तक पहुँचाना चाहता है। एक हिंदी भाषी राष्ट्र होते हुए भी अगर हम देखें तो हम हिंदी बोलने से कतराते हैं और हिंदी बोलने वालों को कमतर भी आँकतें हैं। वहीं अगर उर्दू की बात आए तो सही उच्चारण आम बात नहीं है। बहुत कम लोग ही ऐसे मिलते हैं जो नुक़्ते सही जगह लगा पाते हैं और उनका वैसे ही उच्चारण भी करते हैं।


ऐसे में एक नया ट्रेंड ये शुरू हुआ है कि अपने मन से एक नयी भाषा बना ली जाए जहाँ हिंदी, उर्दू को इंग्लिश के मेल से अनोखी भाषा में बदल दिया जाए। ज़्यादातर युवाओं का रुझान इस ओर देखा जा सकता है और युवा ही क्या हर पीढ़ी का रुझान इसी ओर है। ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि भाषा को बचाया जाए। नयी चीज़ों का स्वागत करना ज़रूरी है क्यूँकि बदलाव इसी तरह आते हैं लेकिन उसके लिए ये ज़रूरी नहीं है कि हम पुरानी बातों को पूरी तरह भुला दें। इसी ओर साहित्य दुनिया का काम है, जहाँ उर्दू और हिंदी साहित्य से जुड़ी बातों को सरल शब्दों में सिखाने की कोशिश है।

साहित्य दुनिया की कई सिरीज़ हैं जिनके ज़रिए शेर, ग़ज़ल नज़्म, रुबाई, व्याकरण, लघुकथा, कविता, कहानी पढ़ने के लिए उपलब्ध है। इसमें धीरे-धीरे साहित्य की हर विधा को शामिल करने की योजना है। फ़िलहाल सारी तैयारी है साहित्य दुनिया के पहले इवेंट की ओर..ये पहली बार है जब साहित्य दुनिया, वेबसाइट, फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्रैम जैसे अपने वर्चूअल वर्ल्ड से निकलकर लोगों के बीच आने वाला है। अब तक पेज को और काम को सराहना मिलती रही है उसी प्यार की उम्मीद के साथ साहित्य दुनिया आ रहा है आपसे मिलने..मिलकर सीखेंगे: “नुक़्ते के गुर, व्याकरण के पेंच”

नोट- ‘नुक़्ते के गुर, व्याकरण के पेंच’ का पहला इवेंट-cum-वर्कशॉप’ विवा वौइस् अकादमी, मुम्बई में 1 सितंबर को हो रहा है। इसके बारे में और सूचनाओं के लिए आप साहित्य दुनिया के फ़ेसबुक पेज से जुड़े रहिए, आप हमें ईमेल भी कर सकते हैं। ईमेल करने का पता है- sahityadunia@gmail.com

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