मन की भावनाओं के द्वार खोलता है रश्मि रविजा का कहानी संग्रह “बंद दरवाज़ों का शहर”

बंद दरवाज़ों का शहर रश्मि रविजा का कहानी संग्रह है। इस कहानी संग्रह में भावनाओं के अलग-अलग द्वार खुलते हैं, फिर वो चाहे प्रेम को ख़ुद से दूर करती तलाक़शुदा महिला हो या महानगर में दिनभर घर में अकेली बातों को तरसती स्त्री हो, एक बेरोज़गार युवा हो या छोटी बहन की ख़ुशियों को पूरा करने की चाह रखती धोका खायी बड़ी बहन..अपने प्यार को छुपाता नौजवान हो या अपने प्यार के स्वार्थ को पहचानती लड़की..नशे की लत में उलझा युवा हो या ज़िंदगी जीने के लिए मुश्किल जगह से ज़िंदगी की तलाश में निकली लड़की..न जाने ऐसे कितने ही किरदार इस कहानी संग्रह के ज़रिए सामने आते हैं, जो कल्पनालोक के नहीं लगते, न उनकी ज़िंदगी कल्पनालोक जैसी है और न ही उनकी भावनाएँ, ये सभी किरदार हमें आसपास दिखते हैं। उनके हावभाव, अभिव्यक्ति, व्यवहार और कश्मकश कहीं भी काल्पनिक नहीं लगती ये सब वास्तविक समाज के ही लोग हैं, जिनसे हम रोज़ टकराते हैं लेकिन तब हम उनकी मन में चल रही भावनाओं का न तो अंदाज़ा लगा पाते हैं और न ही इस बारे में सोचने की ज़हमत ही उठाते हैं।

रश्मि रविजा अपनी लेखनी से रोज़मर्रा के इन किरदारों को देखने का हमारा नज़रिया बदलती हैं। इन कहानियों से गुज़रते हुए हम इन सभी किरदारों की भावनाओं से रूबरू होते हैं और हमें एक वक़्त पर ये अहसास होता है कि ये कहानियाँ नहीं हैं बल्कि ये तो हमारे आसपास फैला जीवन है। ऐसे ही तो होते हैं न आम लोग, यही सारी जद्दोजहद रोज़ हम सभी के सामने आती हैं। कभी हमने किसी दूसरे की मुश्किलों को इतनी गम्भीरता से न तो सोचा है और न ही सोचना चाहा है।

किस तरह कोई युवा नशे की लत में फँसता है, किस तरह घर में काम करने वाली औरतों का जीवन जटिल होता है। किस तरह समाज का ढाँचा एक इंसान को अपने प्रेम का इज़हार करने से रोकता है, किस तरह लड़की को प्रेम के बदले भी सिर्फ़ बलिदान की माँग मिलती है, किस तरह एक बड़ी बहन अपनी छोटी बहन के प्रेम को पूरा करने का प्रयास करती है, किस तरह महानगरों के बंद दरवाज़ों के पीछे जिंदगियाँ सिसकती हैं और भी न जाने ऐसे कितने ही सवाल हैं जिनका सामना ये कहानी संग्रह करवाता है।

जहाँ इतने सवाल सामने आते हैं वहीं अधिकांश समय इन सवालों का एक हल भी लेखिका उपलब्ध करवाती हैं साथ ही लोगों को देखने का एक नया नज़रिया भी मुहैया करवाती हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए ये महसूस होता है कि जहाँ हमने कभी आसपास के लोगों और उनकी भावनाओं पर ग़ौर ही नहीं किया वहीं लेखिका समाज के विभिन्न तबके से न सिर्फ़ वाक़िफ़ हैं बल्कि उनकी भावनाओं को समझने और उन्हें लोगों तक पहुँचाने में भी सक्षम हैं। कहानी संग्रह की हर कहानी के बारे में कुछ न कुछ कहा जा सकता है लेकिन ये हम पढ़ने वालों के लिए छोड़ना सही समझते हैं। आप भी इस किताब को पढ़कर हमें बताएँ कि आपका विचार हमारे विचार से कितना मेल खाता है। अगली किताब के साथ हम जल्द हाज़िर होंगें किताब दुनिया में।

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