रसगुल्ला

हॉल में नानी के साथ बैठकर माँ बातों में लगीं थीं। डॉली भी बीच-बीच में आकर बातों में शामिल हो जाती।

“डॉली..बच्चों को देख ले..कब से आवाज़ भी नहीं आ रही है उनकी”- माँ ने कहा

“सुमन दीदी..बाबू विक्की और विन्नी के साथ बाहर ही है..खिलौना लेकर बैठे हैं..थोड़ी देर पहले तो देख के आयी थी”

“सुमन..बच्चे बाहर भी जाएँगे तो कुछ नहीं होता पास-पड़ोस तो तू जानती ही है”- नानी ने माँ को समझाया

“लेकिन माँ सब छोटे हैं…”- माँ की बात पूरी भी नहीं हो पायी कि बाहर से ननकू ज़ोर से चिल्लाया-

“माँ….माँ….जल्दी आओ…”

उसकी आवाज़ सुनते ही माँ, डॉली और नानी बाहर की ओर भागे..

“क्या हुआ..”तीनों एक साथ बोले और सामने देखा तो ननकू मुस्कुराता हुआ खड़ा था उसके पास ही विक्की और विन्नी भी खड़े थे। ननकू के सारे कपड़े में मिट्टी लगी थी और उसके हाथ में मिट्टी से सना हुआ एक सफ़ेद नन्हा पप्पी था। डॉली सीधे विक्की और विन्नी को डाँटने लगी-

“तुम दोनों को बोली थी न बाहर नहीं जाना..बाबू छोटा है..ये पप्पी कौन लाकर दिया इसको..”

विक्की और विन्नी की शक्ल उतर गयी, विन्नी रुआंसी होकर बोली- “हमने नहीं दिया..अपने आप लेकर आया है..हम तो कित्ता मना किए”- विक्की ने भी उसकी बात पर हामी भरी।

माँ ने विन्नी और विक्की के सिर पर हाथ फेरा और डॉली से कहा कि उन्हें न डाँटे। अब ननकू की बारी थी..ननकू तो इन बातों से अनजान उस पप्पी के साथ खेलने में लगा था। माँ मुस्कुराहट छुपाते हुए बोलीं “ननकू..कहाँ से लेकर आया है इसको?”

ननकू बड़ी-बड़ी आँखें करके माँ को सारी बात बताने लगा, “हमारी बॉल बाहर चली गयी थी उसको लेने बाहर गए न, तो ये गड्ढे में गिरा हुआ था..रो रहा था”- ननकू उदास सा मुँह बनाकर बोला

“मैं तो इसको बोला कि चल मम्मी को लेकर आते हैं”- विक्की ने तुरंत अपनी सफ़ाई दी

“हाँ..लेकिन बाबू बोला मैं इसको छोड़ के नहीं जाऊँगा..फिर हम घर कैसे आते बाबू को छोड़ के..” विन्नी ने आगे की बात पूरी की। माँ को विन्नी का ननकू के लिए प्रेम देखकर बहुत अच्छा लगा।

“फिर…?” डॉली पूछ बैठी

“फिर क्या..विक्की भैया गड्ढे में उतर के इसको बाहर निकाला..तब से बाबू इसको छोड़ ही नहीं रहा है..घर ले आया”- विन्नी ने पूरी बात बतायी

“माँ..मैं इसको नहला दूँ..जैसे चीकू और मैं नहाते हैं..माँ ये छोटा चीकू है न?”- ननकू चहकते हुए बोला
माँ, नानी और डॉली ननकू की बात सुनकर मुस्कुरा उठे, विन्नी और विक्की भी ख़ुश हो गए। माँ समझाते हुए बोलीं- “हाँ, ये छोटा चीकू है तो इसको हम इसकी मम्मी के पास छोड़कर आएँगे..मम्मी के बिना ये रोएगा न”

“लेकिन इसकी मम्मी तो वहाँ पर नहीं थी..ये अकेला ही था वहाँ..”- विक्की बोला। ननकू और विन्नी ने भी सिर हिलाकर उसकी बात पर हामी भरी।

“माँ मेरे पास एक आयडिया है…”- ननकू उछलते हुए बोला

“कैसा आयडिया…?” माँ ने पूछा

“जैसे दादी चीकू की नानी हैं न वैसे ही आप इसकी मम्मी बन जाओ और नानी इसकी नानी बन जाएँगी तो ये भी नानी के घर आया है..माँ हम इसका नाम क्या रखेंगे…छोटा चीकू..?

माँ ननकू को कुछ समझातीं उससे पहले नानी ने उन्हें रोक दिया और कहा- “छोटा चीकू नहीं..”

“तो..?”- ननकू, विक्की और विन्नी एक साथ बोल पड़े

“इसका नाम होगा..रसगुल्ला..”- नानी बोलीं

“रसगुल्ला”- तीनों बच्चे ख़ुश हो गए

“हाँ..तू मेरा लड्डू ये तेरा रसगुल्ला..” नानी ने ननकू को छेड़ा पर ननकू तो पप्पी में ही खोया हुआ था। माँ के कहने पर ननकू अपने साथ रसगुल्ला को नहलाने ले गया। नन्हा रसगुल्ला नहाकर और चमकदार हो गया। ठुमक- ठुमक कर चलता और कभी-कभी लुढ़क जाता। ननकू, विन्नी, विक्की ही नहीं डॉली भी सारे कामकाज भूलकर रसगुल्ला में खोए थे। कटोरी में भरकर रसगुल्ला को दूध पिलाया गया..दूध पीते ही वो तो आँख बंद करके सो गया और ननकू, विक्की और विन्नी ने साथ में खाना खाया। दोपहर की धूप बढ़ गयी थी तो अब बच्चों को घर के अंदर ही खेलना था, वैसे भी तीनों बच्चे रसगुल्ला के आसपास ही बैठे थे।

(ननकू, विक्की और विन्नी ने रसगुल्ला की जान बचा ली, ज़रा सोचो तो अगर रसगुल्ला को वो बाहर निकालकर घर नहीं लाते तो गरमी में रसगुल्ला कितना परेशान होता। आपने कभी किसी की मदद की है, ज़रूर की होगी। लेकिन अब रसगुल्ला की मम्मी उसके लिए कितनी परेशान होगी न..क्या रसगुल्ला को उसकी मम्मी के पास जाने मिलेगा..फिर ननकू को भी तो दुःख होगा न..अब क्या होगा? ये तो तभी पता चलेगा जब रसगुल्ला उठेगा लेकिन वो तो आराम से सो रहा है। तो अभी रसगुल्ला को सोने देते हैं और हम भी खेलते हैं ननकू, विक्की और विन्नी की तरह)

2 thoughts on “रसगुल्ला

  1. ननकू की कहानी की सीरीज बहुत पसंद आ रही है। बस एक दो जगह प्रूफ रीडिंग की जरूरत है

    1. बहुत शुक्रिया आपको कहानियाँ पसंद आ रही हैं। प्रूफ़ रीडिंग के बारे में चेताने का शुक्रिया..हम इस ओर ध्यान देंगे आगे से आपको इस तरह की शिकायत नहीं होगी :))

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