रसगुल्ला का आम

सुबह-सुबह रसगुल्ला और ननकू उठकर बाहर आए तो घर में कोई भी नहीं दिखा..किचन में देखा तो भी कोई नहीं दिखा नानी, माँ और डॉली मौसी कोई भी दिख ही नहीं रहे थे।

“रसगुल्ला..सब कहाँ चले गए?”- ननकू हैरान होता हुआ बोला। रसगुल्ला कूदता हुआ बाहर की ओर जाने लगा ननकू मुस्कुराकर बोला- “हाँ..बाहर होंगें”

दोनों दौड़ते हुए बाहर गए तो बरामदे में भी कोई नहीं दिखा थोड़ा आगे जाकर देखा तो गार्डन में भी कोई नहीं। ननकू बरामदे के पास खड़ा होकर सोचने लगा रसगुल्ला उचक- उचक कर खेलने की कोशिश करने लगा।

“रसगुल्ला..अभी नहीं खेलेंगे…देख नहीं रहा सब कहाँ चले गए”- ननकू ने रसगुल्ला से ये कहा तो रसगुल्ला भी ननकू के साथ सोचने लगा। ननकू ने उसे गोद में उठाकर टेबल में बिठा दिया और ख़ुद कुर्सी में बैठ गया..रसगुल्ला ने ननकू को देखकर आवाज़ की।

“पता ही नहीं सब कहाँ गए? अब क्या करें?”- ननकू सोचता हुआ बोला। रसगुल्ला भी उदास होकर मुँह लटका लिया। दोनों थोड़ी देर वहीं बैठे रहे। ननकू अचानक उठ खड़ा हुआ और बोला- “आयडिया!!”

रसगुल्ला ये सुनकर खड़ा हो गया और ख़ुशी में पूँछ हिलाने लगा।

“रसगुल्ला..मैं माँ को फ़ोन करता हूँ, हम नानी और माँ का पता लगाकर ही रहेंगे”-रसगुल्ला भी पूरे जोश के साथ ननकू के सामने खड़ा हो गया। ननकू घर के अंदर की तरफ़ जाने लगा तो पीछे से रसगुल्ला ने आवाज़ दी..ननकू पलटा तो उसे याद आया कि रसगुल्ला इतना छोटा है कि वो टेबल से नहीं उतर सकता। ननकू रसगुल्ला को गोद में लेकर अंदर ले गया। दोनों फ़ोन की तरफ़ लपके कि

“ये देख रसगुल्ला..टेबल पर क्या रखा है…”- ननकू बोला

हॉल के फ़ोन के पास टेबल में दो पके हुए आम रखे थे..ननकू झट से एक आम उठाकर उसे देखने लगा। गोद में चढ़ा रसगुल्ला आम के पास नाक ले जाकर ख़ूशबू लेने लगा और चाटने के लिए जैसे ही जीभ निकाला कि ननकू ने उसे सोफ़े पर बिठा दिया और ख़ुद आम को देखकर सोचने लगा। रसगुल्ला भी लालच से आम को देखने लगा।

“रसगुल्ला..ये आम..आया किधर से?” ननकू सोचते हुए बोला बोला। पर रसगुल्ला की पूरा ध्यान आम पर ही लगा रहा और उसका कोई जवाब न सुनकर ननकू ने उसे देखा तो रसगुल्ला आम को लालच भरी नज़र से देख रहा था। ननकू ने आम वाले हाथ को ऊपर किया तो रसगुल्ला ने मुँह ऊपर किया..फिर ननकू ने हाथ नीचे किया तो रसगुल्ला ने भी आम के साथ सिर नीचे किया..ननकू आम को अपने चेहरे की तरफ़ लाया और जैसे ही रसगुल्ला की नज़र वहाँ तक आयी ननकू ने आम वाला हाथ पीछे हटा दिया। रसगुल्ला ने ननकू को देखा और शर्माता हुआ मुँह बना लिया।

“रसगुल्ला..आम खाएँगे..पर ये तो सोचो कि माँ और नानी गए कहाँ और ये आम…”- ननकू हाथ ऊपर लाने ही वाला था कि उसे याद आ गया अगर आम सामने आया तो रसगुल्ला बात नहीं करेगा। इसलिए उसने चुपके से आम टेबल में दूसरे आम के पास रख दिया। रसगुल्ला की नज़र अभी भी आम को ढूँढ रही थी और ननकू ये सोच रहा था कि आख़िर सब गए कहाँ।

“देख रसगुल्ला..मैं और तू छोटे हैं तो माँ हमें ऐसे अकेले छोड़ के तो जाएँगी नहीं..कहीं नानी अपने रूम में तो नहीं हैं..चल देखते हैं”

रसगुल्ला को नीचे उतार के ननकू और वो दोनों नानी के रूम में गए, लेकिन वहाँ भी कोई नहीं था।

“नानी भी नहीं है और माँ भी नहीं है..डॉली मौसी भी तो नहीं है..रसगुल्ला सब हमें छोड़कर कहाँ गए?..ननकू उदास होकर बोला।

रसगुल्ला ने ननकू के पैरों के पास अपना सिर लगा लिया। ननकू ने बैठकर रसगुल्ला को गले लगाया और उसके मुँह से निकला “ईद मुबारक रसगुल्ला…”- वो अचानक चौंका “रसगुल्ला कहीं माँ और नानी दोनों बेनज़ीर मौसी के यहाँ तो नहीं चले गए?..उनका घर तो बहुत दूर है हम दोनों अकेले जा भी नहीं पाएँगे..पता है उनके घर में कितनी अच्छी सेंवई बनती है..तुझे भी खिलाया था न…मुझे तो भूक लगने लगी”- ननकू ने रसगुल्ला को देखकर कहा। रसगुल्ला ने भी भूक वाला चेहरा बनाया और हल्के से आवाज़ की।

“चल देखते हैं कुछ खाने के लिए रखा है क्या?”- ननकू और रसगुल्ला दोनों किचन की तरफ़ चल दिए। उचक-उचक के ननकू ने देखा कि कुछ ढककर रखा तो है लेकिन उस तक ननकू तो पहुँच ही नहीं पाया।

“अब क्या करें?”- ननकू ने रसगुल्ला को देखकर कहा तो रसगुल्ला झट से बाहर टेबल की तरफ़ भागा जहाँ आम रखा था।

“हाँ..हम आम खा सकते हैं लेकिन ये आया कहाँ से?…” ननकू फिर सोचने लगा कि रसगुल्ला ने उसके पैर के पास उछलकूद शूरु कर दी।

“हाँ..हाँ..दे रहा हूँ पर पहले धोने दे..माँ कहती हैं फल धोकर खाना चाहिए”- ननकू ने दोनों आम लिया और उसे धोकर लाया अब छिलना या काटना तो कैसे होता बस ननकू ने आम को ऊपर से खोला और रस टपकने लगा। ननकू ने एक आम रसगुल्ला को दिया और एक आम वो ख़ुद खाने लगा। दोनों के हाथ पैर और मुँह में आम ही आम का रस बिखर गया था पर बड़े मज़े से दोनों आम खा रहे थे।

“अच्छा..तो सुबह उठते ही आम खाना शुरू…?” माँ की आवाज़ सुनकर ननकू और रसगुल्ला दोनों ख़ुश हो गए। दोनों माँ की तरफ़ भागने को थे कि माँ बोलीं- “नहीं..नहीं..नहीं..पूरा घर गन्दा होगा..चलो बाहर सीधे गार्डन में…पहले नहाओ दोनों..ननकू तू उठा रसगुल्ला को”

ननकू ने रसगुल्ला को उठाया तो रसगुल्ला उसे चाटने लगा ननकू भी रसगुल्ला को आम ही लग रहा था। माँ दोनों की शरारत देखकर मुस्कुरा उठीं। गार्डन में रसगुल्ला को नहलाते हुए ननकू माँ से पूछा- “माँ आप कहाँ गयी थी..पता मैंने और रसगुल्ला ने आपको कितना ढूँढा..कोई भी मिल ही नहीं रहा था..नानी भी नहीं है और डॉली मौसी भी नहीं है..हम दोनों छोटे बच्चे को छोड़कर सब कहाँ गए थे?”

“मेरा बच्चा..हम कहाँ जाएँगे तुझे छोड़कर..हम तो छत में आम तोड़ रहे थे..मैं तुम दोनों के लिए वहीं से तो आम लाकर रखी थी और बस अभी ऊपर गयी थी..चल अब तू नहा इसका हो गया..मैं तेरा कपड़ा लाती हूँ”- ये कहकर माँ अंदर चली गयीं

“देखा रसगुल्ला आम में ही सारा सीक्रेट था और तुझे उसको ही खाने की जल्दी लगी थी..तू बहुत लालच करता है”- ननकू रसगुल्ला को डाँट ही रहा था कि रसगुल्ला ने ननकू के गाल चाट लिए वहाँ आम लगा था। ननकू को हँसी आ गयी।

(आम तो होता ही ऐसा है कि ननकू और रसगुल्ला क्या हमको भी लालच आ जाता है। पर सोचो तो जब कभी आप उठते हो और माँ नहीं दिखती तो आप उनको कहाँ- कहाँ ढूँढते हो? सुबह-सुबह माँ को देखना ज़रूरी होता है न तो अपनी माँ को अभी जाकर प्यार से गले लगाओ और सोचो तो माँ कितनी प्यारी होती है..वैसे ननकू और रसगुल्ला नहा लिए और अब वो भी जाएगा छत पर आम देखने..आप भी चलो जल्दी से)

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