शा’इरी की बातें(4): वज़्न करने का तरीक़ा (1)

इसके पहले कि हम आगे की बात करें मिर्ज़ा ग़ालिब के एक शे’र की मदद से वज़्न क्या है ये समझने की कोशिश करते हैं-

बदल कर फ़क़ीरों का हम भेस ‘ग़ालिब’,
तमाशा ए अहले करम देखते हैं

इसका वज़्न करके आपको दिखाते हैं-

ब(1)दल(2)कर(2) फ़(1)क़ी(2)रों(2) का(1)हम(2)भे(2) स(1)ग़ा(2)लिब(2),
त(1)मा(2)शा(2) ए(1)अह(2)ले(2) क(1)रम(2)दे(2) ख(1)ते(2)हैं(2)

अगर नोटिस करें तो पहले मिसरे का वज़्न 122 122 122 122 है और इसी क्रम में यही वज़्न दूसरे मिसरे का भी है. इसी को शे’र का वज़्न में होना कहते हैं.

इसके पहले कि हम आगे की बात करें, यहाँ ये बता देना ज़रूरी है कि ग़ज़ल के सभी अश’आर एक ज़मीन में होते हैं, रदीफ़ और क़ाफ़िए की पाबंदी होती है और हर मिसरा एक ही वज़्न पर होता है.वज़्न को उनके बोलने के आधार पर 2 1 में विभाजित करके समझा जा सकता है (हालाँकि तकनीकी तरीक़ा अलग है लेकिन फ़िलहाल समझने के लिए इसे गणितीय वज़्न के हिसाब से समझने की कोशिश करेंगे, आगे हम तकनीकी तरह से भी बताएँगे). अक्सर हिंदी के वो अक्षर जिनमें मात्राएँ लगी होती हैं उनका वज़्न 2 लिया जाता है जैसे ‘रोज़’ में ‘रो’ का वज़्न 2 होगा और ‘ज़’ का 1, ‘उ’ की मात्रा और  ‘इ’ की मात्रा में वज़्न 1 लिया जाता है, उसके अलावा सभी मात्राओं का वज़्न 2 लिया जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो कम आवाज़ वाली मात्राओं का वज़्न 1 लेते हैं और मज़बूत आवाज़ वाली मात्राओं का 2. इसमें एक बात ध्यान रखने वाली है कि किसी भी हर्फ़ या हर्फ़ के जोड़े का वज़्न 1 या 2 ही होता है.

एक अक्षर वाले शब्दों का वज़्न
* एक अक्षर के शब्द जिनमें ई, ऊ, आ, ए, ऐ, ओ, औ में से कोई एक मात्रा लगी हो, ऐसे शब्दों का वज़्न 2 होगा लेकिन गिरा कर पढने पर इसे 1 भी लिया जा सकता है. जैसे- रो,के, ये,में, गा, जा, जी, माँ, या, तो, सो, गो,बू, लू, जू (नदी), ला, वो, याँ (याँ का अर्थ यहाँ होता है), वाँ (वाँ का अर्थ वहाँ होता है), इत्यादि.

* एक अक्षर के शब्द जिनमें इ या उ की मात्रा आती है उनका वज़्न 1 होगा. जैसे- कि.

दो अक्षर (हर्फ़) वाले शब्दों का वज़्न

* दो अक्षर वाले ऐसे शब्द जिनमें ई, ऊ, आ, ए, ऐ, ओ, औ में से कोई मात्रा नहीं होती, उनका वज़्न 2 होता है. जैसे दम. दम का वज़्न 2 इसलिए होता है क्यूँकि इसमें द और म को अलग-अलग नहीं पढ़ सकते. इसी प्रकार हम, कम, ख़म, जम, नम, दुःख, सुख, बन, मन,इक (अगर एक लिखेंगे तो वज़्न 21 होगा, इस बारे में आगे चर्चा होगी), गन, शब, इत्यादि का वज़्न 2 ही होगा. इस प्रकार से अक्सर दो हरूफ़ (हर्फ़ का बहुवचन) वाले शब्दों का वज़्न 2 होगा. इसी प्रकार अगर इ या उ की मात्रा के साथ दो हरूफ़ वाले शब्द देखें तो- बिन, दिख,बिल, टिप, झुन, गुण, दिन, मिल, गुल, ग़ुल,पुल, कुछ इत्यादि का वज़्न भी 2 ही होगा. इसकी वजह भी वही है कि ‘बिन’ में ‘बि’ और ‘न’ को अलग-अलग पढ़ने पर अजीब सा लगेगा, इसलिए इन सभी का वज़्न 2 होता है. क्या का वज़्न भी 2 होगा.

* दो अक्षर वाले ऐसे शब्दों का वज़्न जिनके पहले अक्षर में ‘ई, ऊ, आ, ए, ऐ, ओ, औ’ में से कोई एक मात्रा हो-
ऐसे शब्दों का वज़्न 21 होगा, इसकी वजह ये है कि इन मात्राओं की वजह से पहला अक्षर प्रभावी हो जाता है और इसकी आवाज़ मज़बूत हो जाती है इसलिए पहले अक्षर का वज़्न 2 होता है. आख़िरी अक्षर अकेला रह जाता है, इसलिए उसका वज़्न 1 होगा. जैसे फूल (फू-2, ल-1), खेल, खौल, भूल, फूल, जून, गोल, रोल, पोल, झोल, खोल, खोद, लूट, लोट, लौट, भूक,रात, साथ,ज़ात,बात, और, ओर, घोर, ज़ोर, हीर, मीर,तीर, जीभ,दाल,डाल, ख्व़ाब(इसका सही उच्चारण ‘ख़ाब’ है,इसलिए इसे इस श्रेणी में रक्खा गया है) इत्यादि.

* दो अक्षर वाले ऐसे शब्दों का वज़्न जिनके आख़िरी अक्षर में ‘ई, ऊ, आ, ए, ऐ, ओ, औ’ में से कोई एक मात्रा हो-
ऐसे शब्दों का वज़्न 12 होगा क्यूँकि आखिरी अक्षर में इन मात्राओं में से किसी एक मात्रा के आ जाने की वजह से ये अधिक प्रभावी हो जाती है. जैसे- ख़ला, मज़ा, सज़ा, ख़ता, बता, अदा, खिला, गिला, मिला,तुझी, दुखी, सुखी, सुला, फुला, घुसा, बसी, हँसी,मिरा(‘मिरा’ और ‘मेरा’ का अर्थ सामान है लेकिन ‘मिरा’ का वज़्न 12 जबकि ‘मेरा’ का 22 होगा), तिरा (‘तिरा’ और ‘तेरा’ का अर्थ सामान है लेकिन ‘तिरा’ का वज़्न 12 जबकि ‘तेरा’ का 22 होगा), गिरा, गुमां, यहाँ, वहाँ, जहां, जहाँ, कहाँ, अयाँ, खड़ा, इत्यादि.(आख़िरी अक्षर को गिरा कर पढ़ने पर वज़्न 11 भी हो सकता है.)

* दो अक्षर वाले ऐसे शब्दों का वज़्न जिनके दोनों अक्षरों में ‘ई, ऊ, आ, ए, ऐ, ओ, औ’ में से कोई एक मात्रा हो-
ऐसे शब्दों का वज़्न 22 होगा जैसे मेरा (मे-2, रा-2), तेरा, फेरा, जीरा, खीरा, फूलों, झूलों, कूदी, कूदा, इत्यादि.

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