परी की कहानी

आज रसगुल्ला, चीकू और ननकू ने अपना डेरा जमाया राखी बुआ के पास कमरे में..पापा तो दोनों चाचा के साथ छत पर गए और माँ दादी और मौसी दादी के साथ उनके कमरे में सोने गयीं। राखी बुआ ने रसगुल्ला को अपने पास सुलाया और उसके एक ओर तकिया लगा दिया जिससे कि वो गिरे न..ननकू और चीकू एक चारपाई में सो गए। लेकिन ये बच्चे इतनी आसानी से कहाँ सोने वाले थे राखी बुआ ने सुलाने के लिए ननकू, रसगुल्ला और चीकू को एक परी की कहानी सुनाना शुरू किया..

“एक परी अपने परलोक से उड़कर दुनिया में लोगों के साथ रहने आ गयी और उसकी दोस्ती एक छोटे बच्चे से हो गयी। बस वो बच्चा और परी रोज़ खेला करते फिर परी पेड़ के ऊपर सो जाती और बच्चा अपने घर चले जाता लेकिन एक रोज़ जब वो बच्चा खेलने नहीं आया तो परी को बहुत चिंता हुई और वो उसे ढूँढने गाँव में चली गयी। गाँव जाकर परी ने देखा कि उस बच्चे को तो चोट लग गयी है..”

ये बात सुनते ही रसगुल्ला झट से अपना पैर आगे करके बुआ को दिखाने लगा..बुआ मुस्कुराकर उसके पैर को सहलायी और रसगुल्ला को प्यार किया..रसगुल्ला फिर से कहानी सुनने के लिए तैयार हो गया.. “रसगुल्ला के जैसे चोट लग गयी थी?- ननकू ने पूछा

राखी बुआ ने कहा- “हाँ..रसगुल्ला के जैसे चोट लग गयी थी। जब परी वहाँ आयी तो उसने देखा कि बच्चा तो चल नहीं पा रहा तो परी ने पास आकर अपनी जादू की छड़ी घुमायी और बच्चे को झट से ठीक कर दिया। बस बच्चे की माँ ख़ुश हो गयी और सारे गाँव वाले भी ख़ुश हो गए सबने परी को ढेर सारा खाना खिलाया और तब..”

“फिर क्या हुआ बुआ?”- ननकू आँखें बड़ी करके पूछने लगा

“फिर…तुम्हें सुलाने के लिए कहानी सुना रही हूँ और तुम तो और बड़ी-बड़ी आँखें खोल रहे हो..”- राखी बुआ हँसकर बोलीं और उन्होंने ननकू को थपकना शुरू किया और आगे की कहानी सुनाने लगीं- “फिर क्या..जब परी ने ढेर सारा खाना खाया तो उसको अपनी माँ की याद आ गयी और जैसे ही उसने अपनी माँ को याद किया कि परी रानी आ गयी अपनी बेटी को लेने..फिर परी अपनी माँ के साथ जाते हुए बोली..” राखी बुआ ने रुककर देखा कि ननकू सच में सो गया है या जाग रहा है..ननकू ने नींद से भरी हुई आँखें धीरे से खोलकर पूछा- “क्या बोली?”

राखी बुआ मुस्कुराकर थपकी देते हुए बोलीं- “परी को जाते देखकर बच्चा रोने लगा..तो परी ने कहा कि वो यहाँ रोज़ उसके साथ खेलने आएगी और उसको भी एक बार परीलोक लेकर जाएगी। ऐसा कहकर परी अपनी माँ के साथ परीलोक चली गयी और बच्चे को उसकी माँ ने प्यार किया”

ये कहकर राखी बुआ ने देखा ननकू और चीकू तो सो गए थे। राखी बुआ पलटीं तो रसगुल्ला उनको देख रहा था..राखी बुआ ने रसगुल्ला को प्यार से सहलाया और पूछीं – “ओ मेरा बच्चा..तू क्यों जाग रहा है..आ जा सो जा” राखी बुआ ने रसगुल्ला को अपने पास में करके सहलाया और रसगुल्ला की भी आँखें नींद से भरने लगी। वो भी सो गया और राखी बुआ भी।

जब राखी बुआ जागीं तो ननकू और चीकू सो रहे थे लेकिन रसगुल्ला कहीं नहीं था। राखी बुआ झट से उठीं और पलंग के नीचे झाँकी रसगुल्ला उन्हें नज़र ही नहीं आया। उन्होंने ननकू की चारपाई के नीचे देखा तो ननकू की आँख खुल गयी..वो राखी बुआ को देखते ही बोला
“परी कहाँ गयी बुआ?’

“रसगुल्ला कहाँ गया” – राखी बुआ परेशान होकर बोलीं

ननकू झट से उठकर बैठ गया उसने पूछा “परी रसगुल्ला को भी ले गयी..अब हम परीलोक से रसगुल्ला को कैसे लाएँगे”

राखी बुआ ननकू को देखकर बोलीं- “परियाँ तो कहानी में होती है न ननकू..रसगुल्ला घर में होगा..चल देखते हैं”

ननकू उठकर बुआ के साथ बाहर आ गया वो कुछ सोच रहा था “बुआ अगर रसगुल्ला परी बन गया तो..?”

राखी बुआ को हँसी आ गयी..वो ननकू को छेड़ते हुए बोलीं “फिर तो उसका नाम रसगुल्ली रखना पड़ेगा..और वो उड़-उड़ के आम के पेड़ पर बैठकर आम खाएगी..”

ननकू को मज़ा आ गया वो हँसने लगा और उसके साथ बुआ भी कि अचानक बुआ को याद आया- “आम..चल आम के पास होगी तेरी परी”

दोनों सीढ़ी के नीचे रखी आम की टोकरी के पास गए तो देखा रसगुल्ला वहाँ बैठा आम खा रहा है। राखी बुआ को रसगुल्ला पर प्यार आ गया..ननकू उसे उठाने जाने लगा लेकिन राखी बुआ ने रोक लिया

“खा लेने दे इसको आम..दो दिन से ख़ुद आम नहीं खा रहा न तो इसका मन नहीं भरा..ठीक हो गया रसगुल्ला”

“हाँ बुआ..रसगुल्ला अपने आप यहाँ तक आ गया..और आम भी खा रहा है..अब तो हम खेल सकते हैं”- ननकू ख़ुश होकर बोला

उनकी आवाज़ सुनकर माँ उठकर आ गयीं। दोनों को हॉल में चारपायी पर बैठे देख माँ ने पूछा-
“क्या हुआ..इतनी सुबह कैसे उठ गए..सूरज भी नहीं निकला अभी तो?”

राखी बुआ ने सीढ़ी की तरफ़ इशारा किया। माँ ने देखा रसगुल्ला बैठकर आम खा रहा है, माँ भी मुस्कुरा उठीं और उनके बाज़ू में चारपायी में बैठ गयीं..ननकू माँ की गोद में चढ़ता हुआ बोला – “माँ रसगुल्ला ठीक हो गया..ख़ुद से चल के आ गया..आम भी खा रहा है”

माँ ने ननकू को प्यार किया और बोली- “हाँ..बिलकुल ठीक हो गया..राखी अब तो आम संभालना पड़ेगा..नहीं तो चारपायी के पास ही रख के सोना..रोज़ कितना जागोगी”

माँ और राखी बुआ हँसने लगे। इतने में कमरे में अकेला सोया चीकू भी उठकर आ गया और माँ के पैर से लगकर वापस सो गया। ननकू भी माँ की गोद में सो गया था राखी बुआ और माँ बातें करने लगे थे।

(रसगुल्ला हो गया पूरी तरह ठीक और अब उसकी मस्तियाँ शुरू हो गयी है। रसगुल्ला से आम को बचाना बड़ा मुश्किल है, लेकिन आम होते भी तो इतने अच्छे हैं। माँ ने चीकू और ननकू को सोने दिया और रसगुल्ला के आम ख़त्म होते ही उसे भी अच्छे से साफ़ करके सुला दिया है..उठकर रसगुल्ला, चीकू और ननकू तीनों करेंगे ढेर सारी मस्ती आप भी तैयार रहिएगा)

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