दो शा’इर, दो ग़ज़लें(1): जिगर मुरादाबादी और साहिर लुधियानवी….

आज से हमने "भारत दुनिया" पर एक नयी सीरीज़ शुरू करने की सोची है. हम अब लगातार अपने पाठकों के लिए मशहूर शा'इरों की ग़ज़लें...

वज़ीर आग़ा की ग़ज़ल: “ऐसे गए कि फिर न कभी लौटना हुआ…”

बादल छटे तो रात का हर ज़ख़्म वा हुआ आँसू रुके तो आँख में महशर बपा हुआ ऐसे बढ़े कि मंज़िलें रस्ते में बिछ गईं...

सिकंदर की दूसरी किताब रिलीज़- ‘बदन से पहली मुलाक़ात याद है तुमको…. हमारा इश्क़ है उस वाक़ये से पहले का’

मौजूदा दौर में अच्छी शा'इरी करने वालों की तादाद कम हो गयी है लेकिन अभी भी मंज़र-ए-आम पर कुछ ऐसे शा'इर मौजूद हैं जो अपनी...

Birthday Special: इस दौर के सबसे मक़बूल शायरों में से एक राहत इन्दौरी; ‘हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा’

इस दौर के सबसे मक़बूल शायरों में से एक राहत इन्दौरी साहब का आज जन्मदिन है. राहत साहब का जन्म 1 जनवरी, 1950 को मध्यप्रदेश...

मौजूदा दौर में ग़ालिब सिर्फ़ स्टेटस सिम्बल की तरह है: पराग अग्रवाल

"हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे, कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और" ~ ग़ालिब उर्दू शा'इरी में यूँ तो मिर्ज़ा ग़ालिब...

ग़ालिब जितने बड़े शा’इर थे उतने ही बड़े फ़िलोसफ़र भी थे: ज़ीशान मीर

मशहूर शा'इर मिर्ज़ा ग़ालिब का आज 220वाँ जन्मदिन है. उर्दू और फ़ारसी के मशहूर शा'इर मिर्ज़ा असद उल्लाह बेग़ ख़ान का जन्म 27 दिसम्बर, 1797...
error: Content is protected !!