इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया.. सुदर्शन फ़ाकिर

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया आप कहते थे कि रोने से न बदलेंगे...

आज की कहानी- हिरोशिमा

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आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-3)

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आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-2)

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आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-1)

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आज की कहानी- ख़्वाहिश

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शा’इरी की बातें (21): ग़ज़ल में मक़ता क्या होता है?

मक़ता: ग़ज़ल का आख़िरी शे'र मक़ता कहलाता है.अक्सर इसमें शा'इर अपने तख़ल्लुस (pen name) का इस्तेमाल करता है. तख़ल्लुस: शा'इर जिस नाम से शा'इरी करता...
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