नाराज़ रसगुल्ला

नाराज़ रसगुल्ला

इतने दिनों से ननकू कुछ इस तरह पढ़ाई- लिखाई और स्कूल में व्यस्त हो गया कि बस शाम को खेलने के बाद ही उसे ऐसी नींद आती कि वो कुछ भी नहीं कर पाता। चीकू को तो पहले से पता था कि स्कूल के समय ननकू बस इतना ही समय निकाल पाता है लेकिन रसगुल्ला..रसगुल्ला के लिए तो ये नयी बात थी। एक-दो बार तो वो सोता ही रह गया कि ननकू स्कूल के लिए चला भी गया और जब वापस आया तो खाना खाकर सो गया और उठकर पढ़ाई करने लगा और फिर सोने का टाइम हो गया।

अब तो रसगुल्ला ननकू से पहले ही उठ जाता है और ज़िद करके उसके साथ नहाने चला जाता है। दोनों थोड़ी मस्ती कर लेते हैं, चीकू धीरे से आँखें खोलकर उन्हें देखता है और फिर सो जाता है। कई बार तो रसगुल्ला इतनी ज़िद करता है कि पापा और ननकू के साथ रसगुल्ला भी गाड़ी में सवार हो जाता है। फिर माँ को साथ जाना पड़ता है। पापा सीधे ऑफ़िस चले जाते हैं और रसगुल्ला माँ के साथ वापस घर आता है। 

लेकिन आज रसगुल्ला ज़रा सा नाराज़ है हो भी क्यों न? जाने कितने दिनों से ननकू उसके साथ खेला ही नहीं है। हाँ..हाँ.. रसगुल्ला जानता है कि ननकू की परीक्षा चल रही है लेकिन रसगुल्ला की भी तो परीक्षा चल रही है न। रसगुल्ला भी तो आँगन में चिड़ियों के पीछे दौड़ना सीख रहा है, एक भी चिड़िया उसके साथ नहीं खेलती सारी की सारी उड़ जाती हैं। उस दिन तो कितने धीरे-धीरे गया था लेकिन फिर भी चिड़िया उड़ गयीं और जल्दी से जाता है तब तो झट से उड़ जाती हैं। ननकू होता तो चिड़िया से रसगुल्ला की दोस्ती करवा देता लेकिन ननकू को तो पढ़ाई से फ़ुर्सत ही नहीं है।

आख़िर इतने दिन ननकू के आगे-पीछे घूमने के बाद आज रसगुल्ला ननकू से नाराज़ हो ही गया। ननकू बैठा है दादी के पास लेकिन रसगुल्ला तो आँगन में बैठा है। रसगुल्ला यही सोच रहा है कि ननकू आकर उसे मनाए, वो चुपके- चुपके उसे देखता भी है लेकिन ननकू तो दादी के साथ बातें कर रहा है। रसगुल्ला से भी रहा नहीं गया और वो पास जाकर सुनने लगा कि आख़िर बात हो क्या रही है। 

“बबलू का तो झट से हो गया था..मेरे पेपर में पानी गिर गया तो फिर टीचर ने कहा कि जल्दी से फिर से सब लिख दो, फिर मैंने जल्दी-जल्दी सब लिख दिया”

“मेरा राजा बेटा..इतनी जल्दी लिख लिया”

“नहीं दादी, पूरा नहीं लिख पाया टाइम हो गया तब टीचर बोलीं कि ननकू दस मिनट और बैठकर लिख लो..”

“अच्छा..”

“हाँ..सबकी छुट्टी हो गयी लेकिन मुझे बैठकर सब लिखना पड़ा”

रसगुल्ला को तो बातें समझ ही नहीं आ रहीं थीं। उसने सोचा कि ननकू आकर खेलता क्यों नहीं है? एक बार को मन हुआ कि दौड़कर ननकू के पास चला जाए। उठने को ही था कि याद आया वो तो नाराज़ है ऐसे कैसे चला जाए..बस वहीं तनकर बैठा रहा। तभी माँ हॉल में आयीं और रसगुल्ला को देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं- 

“ननकू.. तेरा दोस्त तुझसे नाराज़ हो गया है..देख ले कैसे बैठा है”

माँ की बात सुनकर रसगुल्ला को थोड़ा अच्छा लगा कि कम से कम किसी को पता तो चला कि वो नाराज़ है। उसने ननकू को देखा तो ननकू उसे ही देख रहा था, रसगुल्ला का मन हुआ झट से दौड़कर ननकू की गोद में चढ़ जाए लेकिन अब तो उसकी नाराज़गी की बात पता चल गयी है अब नहीं जा सकता। बस किसी तरह वहीं बैठा रहा। 

“रसगुल्ला, तू नाराज़ क्यों हो गया? आज तो परीक्षा ख़त्म हुई है.. चल खेलेंगे”

खेलने की बात सुनकर रसगुल्ला बड़ा ख़ुश हुआ लेकिन कुछ देर और ननकू मनाए तो मज़ा आए ये सोचकर बैठा रहा। ननकू रसगुल्ला के पास आया और उसको गोद में लेकर ऐसा गुदगुदाया कि बस सारी नाराज़गी उड़नछू, दोनों एक- दूसरे के साथ उछ्लने लगे। 

फिर क्या ननकू ने निकाली सायकिल और रसगुल्ला को सामने बिठाकर निकल चला मोहल्ले की सैर को, चीकू ने जैसे ही दोनों को बाहर जाते देखा दौड़ता हुआ वो भी हो गया उनके साथ। 

(आपकी ही तरह ननकू भी बहुत व्यस्त था अपनी पढ़ाई में लेकिन अब परीक्षा हो गयी है ख़त्म तो थोड़ी मौज मस्ती भी होगी और रोज़ न सही पर हर इतवार को आएगा ननकू आपके पास, रसगुल्ला और चीकू से भी होगी आपकी मुलाक़ात)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!