‘ननकू पहुँचा मौसी-दादी के घर’

सफ़र के दौरान ही ननकू और रसगुल्ला सो गए थे, कुछ देर बाद चीकू भी सो गया. ननकू के कान में अचानक ही माँ की आवाज़ सुनाई पड़ी..
“अरे उठो ननकू, चीकू, रसगुल्ला…मौसी-दादी का घर आने वाला है..चलो उठ जाओ सब”
ननकू ने आँखों पर हाथ मलते हुए देखा तो पापा ड्राइविंग सीट पर थे और माँ उनके बाज़ू की सीट पर बैठी थीं. “अरे माँ, आप तो गाड़ी चला रही थीं..अचानक इधर कैसे आ गयीं..”, रसगुल्ला भी जग चुका था और ननकू के सवाल पर ध्यान से माँ और पापा को देखने लगा. माँ ने समझाते हुए कहा,”मैं थक गई थी तो गाड़ी रोकी और सीट बदल ली..फिर पापा ने गाड़ी चलाई”. जब ऐसा हुआ था तब चीकू जग रहा था इसलिए वो ननकू और रसगुल्ला की ओर समझदारी से देखने लगा.
“अच्छा, वो सब छोड़ो…मौसी-दादी का घर आने वाला है, अगली गली में ही है..”ननकू और चीकू बाहर झाँकने लगे, रसगुल्ला भी उचक-उचक कर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन वो कार की खिड़की तक नहीं पहुँच पा रहा था..चीकू हलके से ननकू की ओर भौंका..ननकू फट से समझ गया..”अच्छा रसगुल्ला को लेता हूँ गोद में..”
कुछ ही मिनटों में मौसी दादी का घर आ गया. पापा ने नीम के पेड़ के नीचे कार रोकी, ननकू रसगुल्ला को गोद में लिए हुए उतरा. चीकू को माँ ने अपनी गोद में लिया. पापा सामान निकालने लगे कि इतने में मौसी दादी के बेटे रॉकी ने पापा को देख लिया..”अरे भाईसाब नमस्ते..नमस्ते भाभी .. आप चलिए ना अन्दर..हम लेकर आते हैं सामान..”
“थोड़ा मैं भी ले लेता हूँ..” पापा ने एक बैग लेते हुए कहा..रॉकी ने उनसे वो बैग लगभग छीनते हुए कहा,”आप चलिए न अन्दर.. हम ले आएँगे न..”
छोटे से दरवाज़े से अन्दर घुसते ही ननकू को दादी दिख गईं..”दादी..” ननकू जल्दी से दादी के पास पहुँचा, रसगुल्ला को ज़मीन पर उतारा और दादी के गले लग गया..अगले ही पल ननकू को अचानक नीचे रसगुल्ला दिखा, रसगुल्ला ननकू की तरफ़ देख रहा था. ननकू ने झट से रसगुल्ला को गोदी में लिया..”दादी, ये रसगुल्ला है.. मैंने बताया था न आपको फ़ोन पे..”
“ओह हो..तो ये है रसगुल्ला..”दादी ने ननकू की गोद से रसगुल्ला को लेते हुए कहा. इतने में आँगन के बाज़ू के कमरे से मौसी-दादी आयीं..
“मौसी दादी…”, ननकू तो मौसी-दादी को देख कर ख़ुश हो गया..”मौसी-दादी..ये रसगुल्ला है..”, मौसी-दादी ने ननकू के गालों पर हाथ फेरते हुए कहा,”मुझे सब पता है…तेरी दादी ने सब बताया मुझे..अच्छा इधर आ..”
मौसी-दादी ने उसे गले लगा लिया..”माँ-पापा कहाँ रह गए और वो चीकू?”
“हम यहाँ हैं माँ…”, मौसी-दादी और दादी ने आवाज़ सुनकर दरवाज़े की ओर देखा तो चीकू माँ की गोद में और पापा आ रहे थे. दादी और मौसी-दादी को देख चीकू तो उछलने सा लगा,
“अच्छा-अच्छा..”माँ ने चीकू की बात को समझते ही उसे गोदी से उतारा और वो झट से मौसी दादी की गोद में चढ़ गया.
“अच्छा तुम लोग ज़रा हाथ-मुँह धो लो, फिर कुछ नाश्ते का इंतज़ाम करते हैं..” दादी ने कहा.
“माँ पर बाक़ी सब दिखाई नहीं दे रहे?”, माँ ने घर में किसी और के न होने की वजह से सवाल किया.
“गाँव के किनारे घर है न..उनके यहाँ शादी है, सब वहीं हैं…आते ही होंगे, रॉकी को रोक लिया था..तुम लोग आ रहे थे इसलिए” दादी ने रॉकी की ओर देखते हुए कहा.
रॉकी ने दादी और मौसी-दादी जिस चारपाई पर बैठी थीं उसी के बग़ल एक चारपाई लगा दी और बीच में स्टूल लगा दिया. स्टूल पर जग में पानी और चार गिलास रख दिए. चारपाई का बाँध कुछ ढीला था तो बैठने पर हल्का सा दबने का एहसास होता था. यही वजह थी कि चारपाई पर बैठते ही ननकू को मज़ा आने लगा, रसगुल्ला को तो चारपाई झूले की तरह लगने लगी.
“तुम लोग अपने झूले के चक्कर में मौसी-दादी की चारपाई ख़राब कर दोगे…तमीज़ से बैठो..”माँ ने हल्की सी डांट ननकू और रसगुल्ला को लगा दी. चीकू चुपके से माँ की साड़ी के पल्लू के पीछे छुप सा गया.
“थोड़ा बाँध ढीला है इस चारपाई का..रुको अन्दर से दूसरी लगवाती हूँ..” मौसी-दादी ने रॉकी को इशारा करते हुए कहा,”भैया, अन्दर से ले आओ दूसरी चारपाई..”
“अरे..माँ ठीक है चारपाई, बस ये बच्चे ही शैतानी कर रहे हैं..”
“लो भला..बच्चे मौसी दादी के घर आए हैं तो शैतानी भी न करें.. तुम लोग बच्चों पर ज़ोर न चलाओ..” मौसी-दादी ने माँ को प्यार के अंदाज़ में डांटा तो ननकू, रसगुल्ला को हल्की सी हँसी आ गई..चीकू को भी हल्की सी हँसी आयी लेकिन वो माँ के बग़ल में था तो वो जल्दी से चुप गया..”

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