ननकू की चिट्ठी

“दादी पता है मैं न नैंसी के घर गया था और उसके घर में न बहुत अच्छे-अच्छे पेड़ हैं। एक बड़े से पेड़ के ऊपर छोटा-सा घर है Tree house..मैं विक्की भैया और विन्नी दीदी के साथ वहाँ गया था। नैंसी तो स्टोरी की परी के जैसे है उसके पास तो कितनी सारी जादू वाली चीज़ है। दादी पता है मुझे आप याद आती हो। पता है यहाँ पर बहुत बड़ा पहाड़ भी है वो स्टोरी के जैसा, दादी यहाँ पर स्टोरी वाली सारी चीज़ है। रसगुल्ला मुझे खाना खिलाने बोल रहा है। पता है वो बहुत बदमाशी करता है चीकू से भी ज़्यादा..वो मेरे जैसे छोटा बच्चा है न..पता है अभी आपकी चिट्ठी को खा जाता लेकिन मैं उसको बिस्तर से नीचे उतार दिया। पता अभी वो कूद रहा है दादी मैं उसको ऊपर बिठा लेता हूँ..मैं उसको बोलूँगा कि आपकी चिट्ठी नहीं खाए।

दादी पता है रसगुल्ला को ऊपर बिठा दिया न तो वो चिट्ठी नहीं खा रहा। दादी आपको पता है यहाँ पर न नदी भी है और उसके पास बहुत सुंदर-सुंदर चीज़ मिलती है नैंसी के पास है। नैंसी एक दिन मुझे भी नदी लेकर जाएगी। दादी पता है कल रात में न लाइट चली गयी सब अँधेरा- अँधेरा हो गया था। कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा था माँ नानी को देखने बाहर गयीं न तो रसगुल्ला भी पीछे-पीछे भाग गया। माँ जब आयीं न तो रसगुल्ला मिला ही नहीं। पता है रसगुल्ला न बिस्तर के नीचे बैठ के बिस्कुट खा रहा था। पता है दादी हम लोग न फिर छत में सोने के लिए गए। पता है छत में सोने से बहुत अच्छा लगता है इतने सारे तारे दिख रहे थे..रसगुल्ला और मैं ढेर सारे तारे गिने और चंदा मामा तो आधे थे छोटू से..रसगुल्ला जितने छोटू। पता है दादी छत में बहुत मज़ा आया।

दादी आपको एक सीक्रेट बताऊँ..पता है नानी न कहानी सुनाते-सुनाते सो जाती हैं। नानी को मैंने आपकी वाली सारी कहानी सुना दी। नानी न मुझे लड्डू बोलती हैं। दादी पता है हमारा सीक्रेट न माँ को पता चल गया, लेकिन नानी को पता ही नहीं चला। बहुत मज़ा आया। दादी पता है माँ का नाम न सुमन है। दादी मैं जल्दी से आपके पास आ जाऊँगा। पापा को बाद में चिट्ठी लिखूँगा अभी मैं थक गया।”

ननकू की चिट्ठी तीसरी बार पढ़कर दादी मुस्कुरा रही थी। पापा ऑफ़िस से लौटे और दादी के पास बैठे। दादी ने ननकू की चिट्ठी पापा को दे दी।

(ननकू ये चिट्ठी दादी को मिलकर देता पर माँ ने ये चिट्ठी पोस्ट ऑफ़िस में डाल दी और ये दादी को मिल गयी। वैसे दादी से ननकू की रोज़ बात होती है फिर भी जब दादी को ये चिट्ठी मिली तो उन्हें बहुत ख़ुशी हुई। आपको पता है हाथों से चिट्ठी लिखकर भेजने से सबको अच्छा लगता है, सिर्फ़ दूर जाने से नहीं बल्कि ऐसे भी अगर आप चिट्ठी लिखकर किसी को देंगे तो उसको बहुत अच्छा लगेगा)

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