ननकू का पौधा

माँ आँगन से लगे बरामदे में बैठीं अख़बार पढ़ रहीं थीं कि ननकू बाहर से आता दिखा। ननकू के एक हाथ में लकड़ी थी तो दूसरे में पौधा,

माँ ने पूछा- “ननकू, ये पौधा कहाँ से उठा लाया?

“बबलू के घर का है..पता है गमला रास्ते में गिर गया था और ये पौधा रो रहा
था..”- ननकू मुँह बना के बोला

“ओह्हो..तो रमा चाची को देना था न पौधा..यहाँ लेकर आ गया अब बबलू रोएगा”

“बबलू और रमा चाची तो नानी के घर गए..”

“अरे हाँ…चल ये पौधा लगा देते हैं, बबलू आएगा तो उसको दे देना”

माँ पेपर रखकर उठी और आँगन में ननकू को लेकर पौधा लगाने के लिए गमले में मिट्टी डालने लगी। ननकू खड़ा-खड़ा देखता रहा। माँ ने उसके हाथ से पौधा लेकर मिट्टी में लगाया और उसे चारों ओर से मिट्टी से ढाँक दिया। ननकू लकड़ी घुमाकर खेलने लगा।

“ये लकड़ी फेंक लग जाएगी..जा पानी ले आ..इसको नहला देते हैं”- माँ की बात सुनकर ननकू दौड़कर पानी ले आया। माँ पौधे में पानी डालने लगी ननकू ध्यान से देख रहा था। ननकू दौड़ के तौलिया ले आया..और माँ को देते हुए बोला-

“माँ अब इसको पोंछ दो..” और कुछ सोचकर बोला- “लेकिन ये पैंट कैसे पहनेगा..?

ननकू को सोच में पड़ा देख माँ हँस दी और उसे समझाते हुए बोलीं-

“पौधा बस नहाता है और ख़ूब बड़ा-बड़ा हो जाता है”

“अच्छा..मैं भी पौधा होता तो नहा-नहा के जल्दी-जल्दी बड़ा हो जाता..है न माँ?”

“हाँ…फिर बड़ा होकर ख़ूब सारा काम करता, ढेर सारी पढ़ाई करता और..”

“और…पेड़ से आम तोड़ के खा लेता”- ननकू उछलते हुए बोला

“अच्छा…और नानी के घर तो नहीं जाता..है न”- माँ ये कहकर ननकू की तरफ़ देखने लगी

“नानी के घर…” ननकू ने आँखें बड़ी-बड़ी कर लीं..”माँ हम नानी के घर कब जाएँगे?”

“मैं तो परसों जा रही हूँ…लेकिन इस पौधे की देखभाल के लिए अब तुझे यहीं छोड़ जाऊँगी”- माँ ने ननकू को छेड़ा

“नहीं माँ..रमा चाची बोलती हैं कि छोटे बच्चों को मम्मी के साथ रहना चाहिए..मैं तो छोटा हूँ न,मैं भी नानी के घर जाऊँगा”

“और इस पौधे का क्या होगा?…” माँ ने आँखों से ननकू को इशारा किया

“दादी है न..दादी इसको नहला देंगी। दादी मुझे भी नहलाती हैं न और ये तो पैंट भी नहीं पहनता..मैं दादी को बोलूँगा..”

“क्या खिचड़ी पक रही है माँ-बेटे में…?”- दादी बाहर आते हुए बोलीं

“देख लीजिए माँ जी…ये आपको काम देकर नानी के घर जाने को तैयार हो रहा है”- मम्मी दादी की ओर देखकर मुस्कुराईं। दादी अपनी बहु की मुस्कान से समझ गयीं कि ननकू के साथ माँ मज़ाक़ कर रही हैं। दादी भी माँ की टीम में शामिल होते हुए बोलीं- “ना…ना..मेरा लाडला ननकू कहीं नहीं जाएगा..मैं कैसे रहूँगी तेरे बिना, कितनी दूर जाना है 10 घंटे रेलगाड़ी में बैठकर जाना है..बहु तू जा ननकू मेरे पास रहेगा”

माँ दादी पोते को बाहर छोड़कर अंदर चली गयीं। ननकू सोच में पड़ गया..अब दादी को छोड़कर जाए तो कैसे..दादी तो उसको बहुत प्यार करती हैं और ढेर सारी अच्छी-अच्छी चीज़ें खिलाती हैं..कविता लिखना भी तो दादी ने सिखाया है और जब पहली बार ननकू कविता लिखकर लाया तो दादी ने उसको ढेर सारा प्यार किया था और ननकू की कविता के बारे में सभी को बताया था। दादी को लेकर सोच में बैठे ननकू की आँखों के सामने अचानक से नानी की तस्वीर आ गयी। वैसे तो वो नानी को अच्छे से पहचान नहीं पाता था क्योंकि पिछले दो सालों से वो नानी के घर गया ही नहीं बल्कि पापा-मम्मी के साथ कहीं घूमने गया था। उसे जगह का नाम तो नहीं पता लेकिन नानी के घर में उसे ज़्यादा मज़ा आएगा ये वो जानता था क्योंकि मम्मी बताती थीं कि नानी के घर में झूला भी है और नानी को बहुत सारी कहानियाँ भी आती हैं..ननकू झूले में झूलना चाहता था और कहानियाँ तो उसे बहुत पसंद थीं। लेकिन दादी…

ननकू इसी सोच में डूबा था कि दादी ने उसे आवाज़ लगायी..”ननकू..क्या हुआ? रहेगा न मेरे पास..?

“दादी…”- ननकू मनाने के अन्दाज़ में बोला कि दादी ने उसे गोद में उठाकर कहा- “चले जाना मम्मी के साथ नानी के घर..”

ननकू ने आँखें बड़ी करके दादी को देखते हुए पूछा- “सच्ची..”

“हाँ..सच्ची-मुच्ची..” दादी ननकू के गाल को पुचकारती हुई बोलीं…”लेकिन,मुझे रोज़ एक चिट्ठी भेजना..भेजेगा न?”

“चिट्ठी..? हाँ..मैं नानी के घर से चिट्ठी लिखूँगा और कविता भी लिखकर भेजूँगा..और न मैं अभी आपको एक चिट्ठी लिखता हूँ”

ननकू अंदर कॉपी और पेंसिल लेने भागा..दादी उसे देखकर मुस्कुराने लगी।

(ननकू ऐसे तो छोटा है लेकिन उसे दादी और माँ ने अच्छी तरह पढ़ना-लिखना सिखा दिया है..वो चिट्ठी भी लिखता है और छोटी-छोटी कविता भी..अभी तो ननकू अंदर चला गया नहीं तो आपको अपनी कविता की छोटी सी कॉपी दिखाता। पर कोई बात नहीं जब ननकू अपनी कॉपी के साथ होगा न तो ज़रूर आपको अपनी कविता भी सुनाएगा और बताएगा ढेर सारे क़िस्से भी.. आप ननकू के पौधे की चिंता मत करना उसको तो दादी रोज़ सुबह-शाम पानी देकर ख़ूब बड़ा कर देंगी)

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