ननकू और चीकू

“माँ, मैं चीकू के साथ खेलने जाऊँ?” – ननकू कमरे से निकलकर किचन के दरवाज़े के पास खड़ा होकर माँ से बोला।

“तू पहले दूध पी…तेरा चीकू भी बाहर बैठ के रोटी खा रहा है..”

“चीकू को आप रोटी दे दिए?..मैं देता हूँ न”- ननकू मुँह बना के बोला

माँ दूध का गिलास ननकू को देतीं हुई बोलीं- “तू सोता रहेगा तो चीकू भी भूका रहेगा…वो तो कब से उठ जाता है..चल-चल जल्दी से दूध पी ले..थोड़ी देर खेल के फिर बग़ीचे में नहा ले…चीकू को साथ में नहलाना उसको भी गरमी लगती है न..ज़्यादा पानी नहीं गिराना”

ननकू ने जल्दी से दूध पीकर गिलास रखा और भागते हुए बाहर निकला..चीकू ननकू को देखते ही रोटी छोड़कर ज़ोर-ज़ोर से पूँछ हिलाता ननकू की तरफ़ भागा और ननकू के आसपास घूमने लगा। ननकू चीकू को पुचकारने लगा और चीकू जाकर बग़ीचे में पड़ी बॉल उठा लाया। दोनों बॉल खेलने लगे। थोड़ी देर बाद आकर माँ ने दोनों को नहाने को कहा तो बस आँगन के नल के नीचे रखी बाल्टी भरकर ननकू चीकू को नहलाने लगा। चीकू पर जैसे ही पानी पड़ता वो अपना सिर झुका लेता और झट से अपना शरीर झटककर सारा पानी उड़ा देता ननकू को लगता कि मानो बारिश हो रही है और वो खिलखिला के हँस पड़ता। वो तो माँ ने बीच में आकर दोनों को रोक लिया नहीं तो ननकू और चीकू पूरी टंकी ख़ाली कर देते। नहाना रुका तो चीकू ने झटककर शरीर से पानी झाड़ा और बरामदे में बैठकर अपने पंजे चाटने लगा। माँ ननकू को तौलिए में लपेटीं और उठाकर ले चलीं बरामदे में।

“माँ…चीकू भी हमारे साथ नानी के घर जाएगा न?”- ननकू चीकू को प्यार से देखकर बोला

“नहीं..चीकू यहीं रहेगा दादी के पास..तू हिलना बंदकर कपड़े पहनाने दे”- माँ ननकू को सीधा करती हुई बोलीं

“लेकिन फिर चीकू रोएगा..इसको कौन नहलाएगा..इसके साथ कौन खेलेगा? इसको बहुत बुरा लगेगा..”- ननकू ने अपनी चिंता बतायी

माँ सोचते हुए बोलीं- “हम्म..सही बोल रहा है ननकू..ऐसा करते हैं कि मैं अकेले नानी के घर चली जाती हूँ..तू यहाँ आराम से दादी और पापा के पास रहना..चीकू के साथ खेलना और मुझे चिट्ठी लिख के भेजना..ठीक है”

“मैं इतना छोटा बच्चा हूँ..आप मुझे अकेले छोड़ के जाओगे?”- ननकू आँखें बड़ी करते हुए बोला

“अकेले कहाँ बाबा..दादी हैं न यहाँ तेरे पास..दादी कितना प्यार करती हैं तुझे”- माँ ने गम्भीर मुँह बनाकर ननकू को छेड़ा और उसका गाल पकड़कर कंघी से उसके बाल बनाने लगीं। दोनों गाल पकड़ने से ननकू का मुँह गोल हो गया था, वो फिर भी बोल पड़ा।

“माँ मुझे आपके साथ जाना पड़ेगा..नानी को मेरी याद आती है”- फिर ननकू चीकू की तरफ़ देखकर बोला “चीकू..मैं नानी के घर से जल्दी आ जाऊँगा, तू मुझे चिट्ठी लिखना..रोज़ नहाना और मैं तेरे लिए बॉल छोड़ दूँगा” तभी उसे कुछ याद आया- “माँ नानी के घर में बॉल है?”

“नहीं…नानी के घर में झूला है, ढेर सारी कॉमिक्स है और आम का पेड़ है”

“नानी के घर में एक भी खिलौना नहीं हैं?”- ननकू ने बड़े आश्चर्य से पूछा। माँ ने मुस्कुरा के न का इशारा किया..ननकू कुछ देर सोचकर बोला- “चीकू, मुझे बॉल लेकर जाना पड़ेगा..नहीं तो मैं वहाँ कैसे खेलूँगा?”- माँ को ननकू की इस बात पर हँसी आ गयी, प्यार से उसके गाल को पुचकारती हुई बोलीं

“चीकू की बॉल ले जाने की ज़रूरत नहीं है..तेरे और खिलौने भी तो हैं। उनको ले चलेंगे..बॉल इसके पास रहने दे”- चीकू ने पूँछ हिलाकर माँ की बात का समर्थन किया।

” सारे खिलौने…” ननकू ख़ुशी से उछल के बोला

“नहीं बस थोड़े से..और अभी बातें बनाना छोड़..दोनों अंदर बैठो..धूप तेज़ हो रही है..चल कॉमिक्स पढ़कर सुनाना चीकू को”- माँ ननकू को लेकर अंदर की तरफ़ चलीं..चीकू भी पीछे-पीछे चल पड़ा।

“मैं कॉमिक्स की कहानी सुनाता हूँ तो ये सो जाता है…” ननकू भीतर जाते-जाते माँ से चीकू की शिकायत लगाने लगा

“तू भी दादी से कहानी सुन के सो जाता है न..तो ये भी सो जाता है”

“मैं चीकू की दादी हूँ?”- ननकू ने चौंक के पूछा..माँ खिलखिला उठीं।

“नहीं…तू इसका दोस्त है- माँ ने दोनों को अंदर करके दरवाज़ा बंद किया।

(ननकू मोहल्ले के सभी बच्चों के साथ खेलता है लेकिन उसके दो सबसे अच्छे दोस्त हैं एक तो है चीकू और दूसरा है बबलू। चीकू ननकू को एक दिन घर के बाहर ही मिला था तभी से ननकू उसे रोटी खिलाने लगा और दोनों में दोस्ती हो गयी। अब तो चीकू ननकू के घर में ही रहता है। वैसे ननकू आपको बबलू से भी मिलवाएगा पर बाद में क्योंकि अभी तो बबलू अपनी नानी के घर गया हुआ है। नानी के घर जाने की तैयारी तो ननकू भी कर रहा है,लेकिन नानी के घर में खिलौने ही नहीं हैं। अब ननकू कौन-कौन से खिलौने लेकर जाएगा आपको ज़रूर बताएगा..लेकिन हमें पता है कि ननकू अपनी कविता वाली कॉपी तो साथ लेकर ही जाएगा और जब तक ननकू अपनी नानी के घर में रहेगा आप चाहें तो चीकू के साथ खेलने आ जाना..चीकू बॉल बहुत अच्छे से कैच करता है)

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