अलफ़ाज़ की बातें(7): ज़िम्’मदार, ज़ियादा, ज़ियादत…

ज़िम्’मदार (ज़िम्मेदार)– इसका अर्थ होता है ज़मानत, जवाबदेही, कार्यभार। ये लफ़्ज़ ज़िम्मा से बनता है, ज़िम्मा का अर्थ है उत्तरदायित्व। ज़िम्मेदार एक ऐसा लफ़्ज़ है जिसे अधिकतर लोग जिम्मेवार पढ़ने और लिखने लगे हैं, इतना ही नहीं एक साल सिविल सेवा की परीक्षा के प्रश्न पत्र में इसे जिम्मेवार लिख दिया गया था और इस पर किसी ने आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई। बहरहाल, सही लफ़्ज़ ज़िम्मेदार है और इसके सही बोलने का तरीक़ा ज़िम्-मदार है. इसका वज़्न भी इसी आधार पर लिया जाएगा, ज़िम्’मदार का वज़्न 2121 होगा (ज़िम-2, म-1,दा-2,र-1). ग़ज़ल की ज़मीन के मुताबिक़ ज़िम्’मदार के साथ ऐतबार, इंतज़ार, बे-क़रार,साज़गार, ग़ुबार, इख़्तियार, दरार, क़रार, इत्यादि क़ाफ़िए लिए जा सकते हैं.

शफ़ीक़ जौनपुरी का शे’र देखिये-
“कश्ती का ज़िम्’मदार फ़क़त नाख़ुदा नहीं,
कश्ती में बैठने का सलीक़ा भी चाहिए”

(नाख़ुदा – नाव चलाने वाला)

*कुछ और लफ़्ज़*
ज़ियादा या ज़्यादा: इस शब्द का अर्थ होता है अधिक, प्रचुर, बहुत, अतिरिक्त। इसी से जुड़े कुछ और शब्द हम आज आपसे साझा कर रहे हैं।
ज़ियादा ख़ोर: पेटू, बहुत खानेवाला
ज़ियादा गो: बहुत बातें करने वाला
ज़ियादा गोई: बहुत बातें करना
ज़्यादातर: अक्सर, अधिकतर
ज़ियादा-तलबी: अपने हिस्से से अधिक मांगना
ज़्यादा सितानी: अपने हिस्से से अधिक लेना
ज़ियाद: इसका अर्थ अधिक, बहुत होता है। इससे मिल कर बनने वाले कुछ अल्फ़ाज़
ज़ियादत: अधिकता
ज़ियादती: अधिकता, इतना अधिक कर देना कि कोई परेशान हो जाये, अत्याचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!