मिशन चीकू

कल शाम को चीकू और पापा आए थे और सुबह हो चुकी है लेकिन अब तक चीकू ननकू से नाराज़ ही है। चीकू जब से आया है तब से वो माँ के आसपास रहता है या फिर अकेले किसी किनारे बैठ जाता है। ननकू ने चीकू को अपने पास बुलाने की कोशिश की तो उसने अनसुना सा कर दिया और जब ननकू चीकू के पास गया तो वो उस जगह से ही हट गया। ननकू को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे चीकू को मनाए और कैसे रसगुल्ला और चीकू की दोस्ती कराए?

बहुत देर से ननकू अपने मन ही मन में जाने क्या सोच रहा था और उसकी हर सोच पर रसगुल्ला अपने रिएक्शन दे रहा था। अचानक ननकू ने कहा,”आईडिया”

रसगुल्ला का चेहरा खिल गया, और वो ननकू के ऊपर ही चढ़ गया, हल्के-हल्के भौंकने लगा..

“अच्छा,, अच्छा बताता हूँ..”- रसगुल्ला ध्यान से सुनने लगा..

“मैं न चीकू को सॉरी बोल देता हूँ..वो मान जाएगा”

नन्हे रसगुल्ला को इस बात में ख़ास मज़ा नहीं आया और वो फिर से ननकू के पास शांत होकर बैठ गया..

“क्या हुआ? अच्छा आईडिया नहीं है..”- रसगुल्ला ने ना में सर हिलाते हुए जवाब दिया

“हाँ, ये बात भी सही है..सॉरी से तो वो क्यूँ मानेगा, उसे मनाने का कुछ बढ़िया सा तरीक़ा सोचना पड़ेगा…”

ननकू ये सब सोच ही रहा था कि रसगुल्ला के दिमाग़ में कोई आईडिया आ गया, उसने ननकू की पैंट खींचनी शुरू की और जब ननकू समझा तो वो उसे फ़्रिज की ओर ले गया..फ़्रिज के पास जाकर वो भौंकने लगा..

“यहाँ हम चीकू को मनाने की सोच रहे हैं और तुम्हें आम खाने की पड़ी है..”- ननकू ने आधे मन से फ़्रिज में रखे इकलौते आम को निकाला और रसगुल्ला ने झट से उसे ननकू के हाथ से ले लिया..और वो दौड़ पड़ा नानी के कमरे से लगी गैलरी की ओर जहाँ चीकू बैठा था..

रसगुल्ला ने बड़े प्यार से चीकू की ओर आम रख दिया और ख़ुद एक क़दम पीछे हट गया। ननकू ये देखकर हैरान सा हो गया क्यूँकि रसगुल्ला को तो आम बहुत ही पसंद हैं और उसे ये भी पता है कि ये घर में इकलौता आम है। ननकू ज़रा दूर से ही रसगुल्ला की कोशिश को देख रहा था..रसगुल्ला धीरे से भौंका, उसने चीकू को बताने की कोशिश की कि ये आम वो चीकू के लिए लाया है..चीकू ने एक नज़र रसगुल्ला की ओर देखा, ज़रा उठने लगा लेकिन फिर बैठ गया। रसगुल्ला एक और बार भौंका..चीकू ने कोई भी रिएक्शन नहीं दिया। रसगुल्ला थोड़ी देर तक देखता रहा मानो सोच रहा हो कि आम को कोई कैसे इतनी देर बिना खाए सामने रख सकता है।

जब थोड़ी देर हो गयी तो रसगुल्ला से रहा नहीं गया..वो धीरे से आगे बढ़ा और आम को अपने क़ब्ज़े में ले लिया। बस वहीं बैठकर खाना शुरू कर दिया..चीकू ने रसगुल्ला को देखा और एक बार ज़ोर से भौंका लेकिन फिर वहीं बैठ गया..इधर ननकू ने अपने सिर पर हाथ मारा- “ये आयडिया भी फ़ेल..”

रसगुल्ला थोड़ा आम खाने के बाद शरीर पर आम लगाए बचा हुआ आम मुँह में दबाकर वापिस ननकू के पास आ गया..

“तुझे खाने की क्या ज़रूरत थी.. रखा रहने देता न, वो बाद में खा लेता.. ऐसे कौन सामने खाता है..”, रसगुल्ला ने ननकू की बात पर तवज्जो न दी और बचा हुआ आम खाने लगा।

इधर सामान पैक करती हुई माँ उधर आयीं और उन्होंने रसगुल्ला को आम में लथपथ देखकर कहा-
“ननकू इसको नहला बाहर…” ये सुनते ही चीकू के कान खड़े हो गए। वो ख़ुशी से उठा ही था कि देखा ननकू रसगुल्ला को उठाकर बाहर ले जा रहा है। अचानक ननकू की नज़र चीकू पर पड़ी उसे कुछ समझ नहीं आया फिर वो चीकू को देखकर बोला- “आ जा चीकू..तुझे भी नहला दूँ”

चीकू दोनों को देखकर मुँह फेरकर बैठ गया। ननकू ने रसगुल्ला को देखा वो तो अपने पंजे में लगे बचे हुए आम को चाटने में व्यस्त था।

(फ़िलहाल “मिशन चीकू” कामयाब नहीं हो सका है बल्कि चीकू तो और भी नाराज़ हो गया। लेकिन रसगुल्ला और ननकू कोई न कोई नया आईडिया ज़रूर लाएँगे और चीकू को मना लेंगे, आपको क्या लगता है चीकू जल्दी मानेगा?)

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