आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-1)

आज की कहानी: मर्याना, हैरत और कोक्स्टर (भाग-1)

(यह कहानी साहित्य दुनिया टीम के सदस्य/ सदस्यों द्वारा लिखी गयी है और इस कहानी के सर्वाधिकार साहित्य दुनिया के पास सुरक्षित हैं। बिना अनुमति के कहानी के किसी भी अंश, भाग या कहानी को अन्यत्र प्रकाशित करना अवांछनीय है. ऐसा करने पर साहित्य दुनिया दोषी के ख़िलाफ़ आवश्यक क़दम उठाने के लिए बाध्य है।)

आज की कहानी साहित्य दुनिया के लिए अरग़वान रब्बही ने लिखी है.
_________________________________

1.

कुश्ती के लिए बीच में एक सर्कल बना था, वो किनारे बैठे सोच रहा था कि इसे फिर से कैसे शुरू किया जाए। वो रोज़ यहाँ आकर बैठता था, रोज़ सोचता था और पुराने दिन याद करता था.
उसका काम अच्छा नहीं है… कभी चोरी कभी किसी और तरह के छोटे मोटे क्राइम..पर बचपन से उसे कुश्ती से लगाव था लेकिन ये कुश्ती भी अलग क़िस्म की थी, इसमें इंसान जब तक अधमरा न हो जाये तब तक उसकी हार नहीं होती थी और दूसरा जीत नहीं सकता था…. उसने घड़ी देखी शाम के 4 बजे थे.. अचानक उसका फ़ोन बजा
“हैलो… अच्छा..क्या वो अच्छा डॉक्टर है, ये तुम क्या कह रहे हो…” वो बेतहाशा ख़ुश हो गया….

उसने फ़ोन रखा और किसी और को फ़ोन किया
“ओ बावा… कुश्ती का एलान कर दो…इस इतवार को… हाँ हाँ इसी इतवार को”

रविवार

“डॉक्टर कहाँ है?” उसने अपनी फ़्रेंच कट दाढ़ी छूते हुए पास बैठे शख़्स से पूछा
उसने इशारे से बताया कि वो सामने बैठा है.. “ये तो लड़का है”
“पर अपने काम का है”, उसने भरोसे का जवाब दिया..

कुश्ती शुरू हुई और खेल के नियम के मुताबिक़ ज़ोरदार लड़ाई चली..सब मज़े ले रहे थे, दाँव लगा रहे थे मगर वो ख़ामोश था और जाने क्या सोच रहा था तभी.. “मैं जीत गया… मैं जीत गया”, की आवाज़ आयी, वो खड़ा हो गया…. वो जल्दी से हारे हुए अधमरे पड़े इंसान को रिंग की रस्सी पकड़ कर देखने लगा… उसकी साँस नहीं चल रही थी..
देर से अपने फ़ोन में लगे डॉक्टर को पहली बार में आवाज़ भी सुनाई न दी…
“ओह… गाना लगा लिया था तो सुना नहीं” उसने जल्दी में कहा..तभी डॉक्टर की नज़र ज़मीन में बेसुध पड़े शख़्स पर पड़ी… “क्या हुआ ये..हटो हटो सब…”
उसने अपनी चीज़ें अपने बैग से निकालीं…
रिंग की रस्सी पकड़े खड़ा वो शख़्स उसे ही देख रहा था लेकिन डॉक्टर ने चुटकियों में उसे ठीक कर दिया… कोस्क्टर को भरोसा हो गया
“आपका नाम क्या है?” उसने डॉक्टर से नाम पूछा.
डॉक्टर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा-“हैरत”
“वाह..हैरत..हैरत है”
हैरत ने कोक्स्टर से हाथ मिलाया और चला गया.

डॉक्टर श्रीवास्तव के मर जाने के बाद सबसे बड़ा झटका कोकस्टर को यही लगा था। उसके पास उसके हारे हुए खिलाड़ियों को बचाने वाला कोई नहीं था…. कोकस्टर उसका असली नाम नहीं है, उसका असली नाम क्या है ये तो अब उसे भी नहीं याद होगा।

डॉक्टर हैरत के आने से उसका खेल पूरी तरह से शुरू हो गया था। हैरत जानता था कि ये ग़ैर-क़ानूनी है पर उसे भी इस तरह का रिस्क लेने में मज़ा आता था…

हर इतवार को कुश्ती होने लगी थी, … हैरत उनसे 5000 माँगता था और वो फ़ौरन दे देते थे, इस तरह वो इतवार के रोज़ काम करके 20000 कमाने लगा था, ये उसकी एक्सट्रा कमाई थी।

__________________________

जारी..

(इस कहानी का अगला भाग कल प्रकाशित होगा)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!