‘ख’ और ‘ख़’

खंड (21) किसी टूटी या फूटी हुई वस्तु का कोई अंश, टुकड़ा; किसी संपूर्ण वस्तु का कोई विशिष्ट भाग या विभाग।
खंडहर(22) वह स्थान जिस पर बनी हुई इमारत या भवन खंड-खंड होकर गिरा पड़ा हो, गिरे या टूटे हुए मकान का बचा हुआ अंश, भग्नावशेष।

खंभा(22) ईंट, पत्थर, लकड़ी, लोहे आदि की बनी हुई गोल या चौकोर रचना जिस पर छत, या कोई भारी चीज टिकी रहती है।
खगोल(121) आकाश मंडल।
खटकना(122) दो वस्तुओं के परस्पर टकराने से शब्द उत्पन्न होना; किसी बात का मन में भली न जान पड़ने के कारण कुछ कष्टदायक जान पड़ना, खलना।

खटाई(121) खट्टे होने की अवस्था, गुण या भाव; कोई खट्टी वस्तु।
खट्टा(22) जिसमें खटाई हो, आम, इमली आदि के से स्वाद वाला।
खड़ा(12) जो धरातल से सीधा ऊपर की ओर उठा हुआ हो।
खड़ाऊँ(122) काठ की बनी हुई एक प्रकार की पादुका जिसमें आगे की ओर पैर का अंगूठा और उंगली फंसाने के खूंटी लगी रहती है।
खनिज(12) खान से खोद कर निकाला हुआ। खनिज पदार्थ।
खपत(12) खपने या खपाने की क्रिया या भाव, माल की कटती या बिक्री।
खरा(12) जिसमें किसी प्रकार की खोट या मैल न हो, विशुद्ध;
खराद (121) एक प्रकार का यंत्र जो लकड़ी अथवा धातु की बनी हुई वस्तुओं को छीलकर उन्हें सुडौल तथा चिकना बनाता है या विशेष आकार देता है।

खलियान(221) वह समतल भूमि या मैदान जहाँ फसल काट कर रखी, मांडी तथा बरसाई जाती है; अव्यवस्थित रूप से लगाया हुआ ढेर।
खली(12) तिलहन का वह अंश जो उसे पेर-कर तेल निकालने के बाद बच रहता है जिसे गाय-भैसों को भूसे में मिलाकर खिलाया जाता है।
खस्ता(22) भुरभुरा, बहुत थोड़ी दाब से टूट जाने वाला, मुलायम तथा कुरकुरा; टूटा-फूटा, भग्न, दुर्दशा ग्रस्त।
खांसना(212) गले में रुका हुआ कफ़ या और कोई अटकी हुई चीज निकालने या केवल शब्द करने के लिए झटके से वायु कंठ के बाहर निकालना, खांसी आने या होने का-सा शब्द करना।

खाई(21) दुर्ग के चारो ओर खोदी हुई नहर;
खादी(22) हाथ से कते सूत का हाथ करघे पर बना कपड़ा, खद्दर।
खाद्य(22) जो खाए जाने के लिए हो अथवा खाये जाने के योग्य हो, भक्ष्य, भोज्य। खाए जाने वाले पदार्थ;भोजन।
खाद्यान्न(221) वे अन्न जो खाने के काम आते हों।
खान(21) वह स्थान जहां से धातु, पत्थर आदि खोद कर निकाले जाते हैं; वह स्थान जहां कोई वस्तु अधिकता से होती या पाई जाती है।
खाना(22) पेट भरने के लिए मुंह में कोई खाद्य वस्तु रखकर उसे चबाना और निगल जाना, भोजन करना। भोजन; दीवार, आलमारी, आदि में बना हुआ वह अंश या विभाग जिसमें वस्तुएं आदि रखी जाती हैं।

खारा (22) जिसमें क्षार का अंश या गुण हो, जो स्वाद में नमकीन हो।
खिड़की(22) घर, गाड़ी, जहाज आदि की दीवारों में बना हुआ वह बड़ा झरोखा जिसमें से धूप और रोशनी अंदर जाती है और जिसमें से झांक कर बाहर का दृश्य देखा जाता है

खिन्न(21) उदास, विकल; अप्रसन्न, अंसतुष्ट।
खिलखिलाना(2122) बहुत प्रसन्न होने पर जोर से हंसना
खिलना(22) कली या फूल का पंखुडियां खोलना; कोई सुखद कार्य या बात होने पर आनंदित या प्रसन्न होना; सुन्दर लगना, फबना।
खिलाड़ी(122) वह जो खेल खेलता हो।
खिलाना(122) किसी को कोई चीज खाने में प्रवृत्त करना, भोजन कराना; खेल खिलाना; दुलारना।
खिलौना(122) बच्चों के खेलने के लिए बनाई हुई धातु, मिट्टी आदि की आकृति, चीज या सामग्री; किसी के मन बहलाने का साधन या सामग्री।
खिसकना(122) बैठे-बैठे किसी ओर बढ़ना या हटना, सरकना; किसी वस्तु का अपने स्थान से कुछ हट जाना; चुपके से उठ कर चल देना।

खुजली(22) शरीर के किसी अंग में रक्त का संचार रुक जाने के कारण होने वाली सुरसुरी; एक चर्म रोग जिसमें शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं और बहुत अधिक खुजलाहट होती है, खाज।

खुजाना(122) शरीर के किसी अंग में खुजली होने पर उस स्थान को नाखूनों अथवा उंगलियों से बार-बार मलना या रगड़ना।

खुर(2) कुछ पशुओं के पैरों का अगला सिरा जो प्राय: गोल तथा बीच में से फटा हुआ होता है, टाप, सुम।
खुरचना(122) किसी नुकीली वस्तु को किसी दूसरी वस्तु पर इस प्रकार रगड़ना कि वह कुछ छिल जाए

खेत(21) वह भू-खंड जो फसल उपजाने के लिए जोता-बोया जाता है।
खेतिहर(212) जमीन को जोत-बोकर उसमें फसल उपजाने वाला व्यक्ति, किसान, कृषक।
खेती(22) खेत को जोतने-बोने तथा फसल उपजाने की कला तथा काम; खेत में बोई हुई फसल।
खेद(21) कोई अपेक्षित काम न करने अथवा कोई काम या बात ठीक तरह से न होने पर मन में होने वाला दु:ख, अप्रसन्नता, रंज।
खेना(22) डांडों की सहायता से नाव को चलाना।
खेल(21) समय बिताने तथा मन बहलाने के लिए किया जाने वाला कोई काम, क्रीडा;बहुत साधारण या तुच्छ काम।
खेल-कूद(2121) खेल, क्रीडा; (बच्चों की) उछलकूद, आमोद-प्रमोद, कलोल।
खेलना(212) मन बहलाने के लिए शारीरिक क्रियांए करना या व्यायाम करना; खेलवाड़ (खिलवाड़) समझकर और परिणाम का ध्यान छोड़कर कोई काम करना।

खोखला(212) जिसके भीतर कुछ न हो, भीतर से रिक्त; निस्सार, थोथा।
खोज(21) कोई नई बात, तथ्य आदि का पता लगाने का काम, शोध, अनुसंधान; किसी खोई या छिपी हुई वस्तु को ढूंढने की क्रिया।
खोजना(212) किसी खोई या छिपी हुई वस्तु के पता लगाने का प्रयत्न करना, ढूंढना; अनुसंधान या शोध करना।
खोट(21) दूसरों को ठगने के लिए सोने में मिलाया हुआ तांबा; दोष; किसी कार्य या व्यक्ति के प्रति मन में होने वाली बुरी भावना।
खोटा(22) मिलावटी; नकली, झूठा, बनाबटी।
खोदना(212) कुदाल आदि से जमीन पर आधात करके गड्ढा बनाना; उक्त क्रिया द्वारा दबी पड़ी हुई वस्तु बाहर निकालना
खोना(22) किसी वस्तु को भूल से कहीं छोड़ देना; असावधानी, दुर्घटना, मृत्यु आदि के कारण क्षति से ग्रस्त होना।
खोलना(212) अनावृत करना, आवरण हटाना
ख़ू(2) – आदत (habit)

ख़ूं(2) – ख़ून (blood)
ख़ाक (21)= धूलि, भूमि, राख
ख़ंजर(22)= छुरी
ख़ज़ां(ख़िज़ां) (12)= पतझड़, वृद्धावस्था, क्षय
ख़जालत (122)= लज्जा, लज्जाशालीनता
ख़जालत(122)= प्रसन्न, शुभ, भाग्यवान
ख़िज़ाना(ख़ज़ाना) (122)= धन संग्रह, कोष, राजकोष
ख़त (2)= पत्र, चिन्ह, लिखित
ख़तरा (22)= डर, भय, विपित्ति, जोखिम
ख़त्म (21)= अन्त, पूरा होना, अन्त करना, समाप्ती
ख़ता (12)= गलती, भूल, लापरवाही
ख़ातिर (22)= हृदय, मन, के लिये, की तरफ से, चयन, हित
ख़ुत्बा (22)= भाषण, धर्मोपदेश, प्रवेशन, परिचय
ख़िदमत (22)= सेवा, आवभगत, कर्तव्य, नौकरी
ख़ुद(2)= स्वयं, वक्तिगत, अपना, एकांत
ख़ुदा (12)= भगवान्
ख़ुदी (12)= घमंड, अहंकार, मन की चौकसी
ख़ानदान (2121)= कुल, परिवार, वंश
ख़ाना (22)= घर, कमरा, विभाग, हिस्सा
ख़ानुम(ख़ानम) (22)=श्रीमति, राजकुमारी, पत्नी
ख़ून (21)= रक्त, हत्या
ख़फ़ा (12)= छिपाव, गुप्तता, क्रोधित, अप्रसन्न
ख़बर (12)= समाचार, ज्ञान, सूचना, वर्णन, लोकवाद, चर्चा
ख़ूब (21)= बढ़िया, अच्छा, उत्तम, सुन्दर, मनभावन
ख़ाम (21)= कच्चा, हरा, नौसिखिया, अदक्ष, घमंडी
ख़ामोश (221)= चुप्प
ख़ुमार (121)= नशा
ख़याल (121)= विचार, कल्पना, मत, देखभाल, मान
ख़ियाबां (122)= पुष्पवाटिका, फूलों की क्यारी
ख़रीद (121)= खरीदना, मोल लेना, मोल ली हुई वस्तु
ख़राब (121)= बुरा, दुष्ट, बरबाद हुआ, बिगड़ा हुआ, अशिष्ट, अश्लील
ख़ुर्रम (22)= प्रसन्न
ख़ैर (21)= अच्छा, अतिउत्तम
ख़ैर (21)=कुशल क्षेम, कल्याण, हित, आनंद
ख़लास (121)= उद्धार, सवतन्त्रता, मुक्ति
ख़ालिस (22)= शुद्ध, असल, खरा, निष्कपट(मित्र)
ख़लिश (12)= चुभन, पीड़ा, चिन्ता, शंका
ख़िलाफ़ (121)= विरोध, विपक्षता, असत्यता
ख़िलाफ़ (121)= विस्र्द्ध
ख्व़ाब (21)= नींद, स्वप्न
ख्व़ार (21)= दुष्ट, उजाड़, मित्रहीन, निर्धन
ख्व़ाहिश (22)= लालसा, इच्छा, अनुनय, विनय, मांग
ख़ुश (2)= प्रसन्न, मनभावन
ख़ुश्क (21)= सूखा, निर्जल, मुर्झाया हुआ, चिड़चिड़ा आदमी
ख़ुर्शीद (221)=सूर्य
ख़स्ता (22)= घायल, टूटा हुआ, जरजर, उदासीन
ख़ास (21)= विशेष, व्यक्तिगत, विशिष्ट, अमिश्रित, श्रेष्ठजन

ख़ुलासा(122) (خلاصہ): ख़ुलासा का जो अर्थ आजकल मीडिया में इस्तेमाल हो रहा है वो इसके सही अर्थ से बिलकुल जुदा है. ख़ुलासा का अर्थ होता है सारांश जबकि मीडिया में इसे इस तरह इस्तेमाल किया जाता है मानो इसका अर्थ राज़ खोलना हो. इस लफ़्ज़ का वज़़्न 122 होता है. (ख़ु-1, ला-2, सा-2)

ख़िलाफ़त(122) (خلافت): ख़िलाफ़त एक ऐसा शब्द है जिसे अक्सर करके लोग ग़लत अर्थ में इस्तेमाल करते हैं. असल में लफ़्ज़ ख़िलाफ़ का अर्थ होता है विरूद्ध, मुख़ालिफ़ या विरोधी इसलिए लोगों को लगता है कि ख़िलाफ़त का अर्थ हो जाएगा किसी का विरोध करना जबकि ये बिलकुल ग़लत है. ख़िलाफ़त का अर्थ होता है ख़लीफ़ा की सरकार का अधिकार क्षेत्र. ख़लीफ़ा पैग़म्बर मुहम्मद साहब के उत्तराधिकारी को कहा जाता है. ख़िलाफ़त का वज़्न 122 लिया जाता है. (ख़ि-1, ला-1,फ़त-2)

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