कहाँ सोएगा रसगुल्ला

ननकू के साथ घर आकर रसगुल्ला ख़ुश तो है लेकिन यहाँ उसे पहले घर से अलग भी लग रहा है। ननकू जैसे नानी के यहाँ रहता था और जैसे मौसी दादी के यहाँ रहता था वहाँ से बिलकुल अलग तरह से यहाँ रहता है। नन्हा रसगुल्ला जब से आया है तभी से देख रहा है यहाँ तो ननकू किसी से कुछ पूछता भी नहीं उसे तो सब पता होता है कि क्या चीज़ कहाँ रखी है..रसगुल्ला ने ऐसे ननकू को तो देखा ही नहीं था। चीकू भी तो कैसे आराम से जाकर एक गद्दे पर सो जाता है उसे तो जैसे पता है कि ये गद्दा उसका ही है। चीकू को पूरे घर के बारे में भी सब पता है और रसगुल्ला को तो ये भी नहीं पता कि वो खेलने के लिए बाहर जाए भी कि नहीं? ननकू के पास बैठा रसगुल्ला बड़ी-बड़ी आँखें करके घर में इधर-उधर देख रहा था और ये सारी बातें सोच रहा था।

ननकू तो पेट के बल लेटा हुआ नानी माँ को चिट्ठी लिख रहा था, उसने वादा किया था कि घर पहुँचते ही नानी माँ को चिट्ठी लिखेगा। जब माँ ने रसगुल्ला को इतनी उत्सुकता से इधर-उधर देखते हुए देखा तो मुस्कुराने लगीं और किचन से खड़ी-खड़ी पुकारीं-

“रसगुल्लाssss..इधर आ तो ज़रा”

रसगुल्ला ने झट से माँ को देखा और उनकी तरफ़ छोटे-छोटे क़दमों से मटकते हुए दौड़ लगा दी। माँ ने रसगुल्ला के लिए हाथ फैला दिए..रसगुल्ला सीधे माँ के पास पहुँचा और उनके हाथों में समा गया माँ ने रसगुल्ला को झट से गोद में उठा लिया और प्यार करने लगीं…रसगुल्ला को मज़ा आया। माँ उसको गुदगुदी करने लगीं रसगुल्ला उछलने लगा। बड़ी देर बाद रसगुल्ला को मज़ा आया था। माँ रसगुल्ला को गोद में लेकर किचन में गयीं और रसगुल्ला को एक छोटा सा आम थमाकर उसे हॉल में बिठा दीं। रसगुल्ला मज़े लेकर आम खाने लगा।

माँ को अब अच्छा लगा रसगुल्ला जब से आया था चुप-चुप था अब जाकर ख़ुश हुआ। ननकू ने भी नानी को चिट्ठी लिख ली थी और वो आकर माँ के गले से लग गया। उधर रसगुल्ला को माँ ने प्यार किया तो चीकू भी पास आकर खड़ा था। माँ ने दोनों को देखकर कहा- “कैसे बड़े बच्चे हो तुम दोनों..रसगुल्ला को प्यार की तो दोनों के दोनों आ गए..अभी इसके साथ खेल भी नहीं रहे थे..बदमाश लोग”- ये कहकर माँ ने दोनों को प्यार किया।

शाम हो चुकी थी पापा भी घर लौट आए थे। आज तो पापा को देखकर ननकू और चीकू बड़े ख़ुश थे और इन दोनों को ख़ुश देखकर रसगुल्ला भी ख़ुश था। रसगुल्ला उनके आगे-पीछे घूम रहा था तभी पापा की गाड़ी की आवाज़ आयी कि ननकू और चीकू भागे बाहर रसगुल्ला भी दौड़ पड़ा दोनों के पीछे..तीनों को देखकर पापा समझ चुके थे कि प्लान क्या है?

गाड़ी खोलकर ननकू बैठा और चीकू भी घुस गया अंदर..रसगुल्ला बाहर उछलने लगा कि माँ ने आकर उसे भी अंदर किया। माँ ने ननकू को हल्की सी डाँट भी लगा दी- “ननकू..रसगुल्ला का ध्यान नहीं है तुझे..ये तो तुझसे भी छोटा है न?”

ननकू को अपनी ग़लती याद आ गयी उसने झट से रसगुल्ला को गले से लगा लिया और सहलाने लगा रसगुल्ला भी ख़ुश होकर ननकू को चाटने लगा। आख़िर पापा ने गाड़ी आगे बढ़ायी और तीनों चले घूमने के लिए। ढेर सारी मस्ती करके जब वापस लौटे तो तीनों थक गए थे। आते ही माँ ने उन्हें खाना दिया और अब तीनों को आने लगी थी नींद। चीकू तो झट से जाकर अपने बिस्तर पर सो गया। ननकू भी अपने कमरे में जाने लगा कि उसको याद आया और उसने पूछा- “माँ..रसगुल्ला कहाँ सोएगा?”

रसगुल्ला कभी ननकू का मुँह तो कभी माँ का मुँह देखने लगा। उसे नींद तो ज़ोर से आ रही थी लेकिन पता ही नहीं था कि वो सोएगा कहाँ?

(हम्म..तो भई ननकू घर आते ही ढेर सारे कामों में लग गया है और चीकू तो घर के बारे में सब जानता है..लेकिन रह गया रसगुल्ला। उसके लिए घर अनजान भी है और उसे ठीक से पता भी नहीं कि अपने घर में कैसे रहते हैं। लेकिन अब तो सबसे बड़ा सवाल सामने है आख़िर रसगुल्ला सोएगा कहाँ?..इस सवाल का जवाब मिलेगा कल..देखते हैं माँ रसगुल्ला को कहाँ सुलाएँगी)

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