व्याकरण की बातें(3): ई और यी, ए और ये में फ़र्क़ और उनका उपयोग

कई बार हम कुछ शब्दों के साथ “ई” लगेगा या “यी” और “ए” लगेगा या “ये” इस बात में उलझ भी जाते हैं और बहस में भी पड़ जाते हैं, हिंदी व्याकरण में ये जाँचने का भी एक बहुत आसान-सा तरीक़ा है। साथ ही कुछ ऐसी बातें हैं जिनको ध्यान में रखकर ऐसी छोटी-छोटी ग़लतियों से बचा जा सकता है:

ई और यी

-ज़्यादातर “ई” संज्ञा शब्दों के अंत में ही आता है क्रियाओं में नहीं।
जैसे: सिंचाई, कटाई, कढ़ाई, मिठाई, मलाई, रज़ाई, दवाई, आदि।

उदाहरण: खेतों की सिंचाई हो गयी है अब फ़सलों की कटाई बाक़ी है (सिंचायी और कटायी नहीं)
ये रज़ाई तो बहुत गरम है।(रज़ायी नहीं)

-इसी तरह क्रियाओं के अंत में “यी” आता है
जैसे: दिखायी, मिलायी, सतायी, जमायी, पायी, खायी आदि।

उदाहरण: उसने मुझे फ़ोटो दिखायी।( दिखाई नहीं)
हमने आज बढ़िया मिठाई खायी।(खाई नहीं)

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ए और ये

-किसी शब्द के अंत में “ए” का प्रयोग ज़्यादातर तब किया जाता है जब हम किसी से अनुरोध कर रहे हों।
जैसे: कीजिए, आइए, बैठिए, जाइए, सोचिए, देखिए आदि।

उदाहरण: आप अपने स्थान पर बैठ जाइए।( जाइये नहीं)
देखिए, आप भी समझने की कोशिश कीजिए।(देखिये और कीजिये नहीं)

-लेकिन जब अनुरोध की बात न हो तब “ये” इस्तेमाल किया जाता है।
जैसे: बनाये, खिलाये, सजाये, गाये, बजाये, दिखाये, सुनाये आदि।

उदाहरण: बच्चों ने सुरीले गीत सुनाये।(सुनाए नहीं)
रीना ने तरह-तरह के पकवान बनाये और खिलाये।(बनाए और खिलाए नहीं )

यही बात “एँ” और “यें” में भी लागू होती है, जहाँ अनुरोध होगा वहाँ “एँ” लगेगा और जहाँ नहीं होगा वहाँ “यें
जैसे: आप उन्हें समझाएँ।(समझायें नहीं)
अच्छा अब ये बताएँ कि आप क्या लेंगें। (बतायें नहीं)

इसी तरह
चलो ढोल बजायें, घर और गलियाँ सजायें।( बजाएँ और सजाएँ नहीं)
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ध्यान रखने योग्य बातें:

“ए” और “एँ” सही लगाया है या नहीं ये जानने का एक सरल तरीक़ा ये भी है कि आपने जिस शब्द के अंत में उसे लगाया है, वहाँ “या” लगाकर उस शब्द को पढ़ें, अगर कोई शब्द बनता हो तो सही है, वरना ग़लत हो सकता है। जैसे: शुभकामनायें में अगर “यें” हटाकर “या” लगाया जाए तो “शुभकामनाया” शब्द मिलता है जो कोई शब्द नहीं है, इसलिए सही शब्द होगा “शुभकामनाएँ”। इसी तरह दुआयें, सदायें, देखिये, बोलिये आदि को भी आप ख़ुद जाँच सकते हैं, सही शब्द हैं, दुआएँ, सदाएँ, देखिए, बोलिए आदि।

“ई” संज्ञा के अंत में आता है और “यी” क्रिया के अंत में।

जहाँ अनुरोध का भाव हो वहाँ “ए” लगेगा और जहाँ न हो वहाँ “ये”, यही नियम “एँ” और “यें” में भी लागू होता है।

संस्कृत से हिंदी में आने वाले शब्दों में “य” के स्थान पर “इ या ई” का प्रयोग मान्य नहीं होता है। जैसे: स्थायी, व्यवसायी, दायित्व आदि ही सही माने जाते हैं।

इसी तरह जहाँ “य” और “व” दोनों का प्रयोग किया जाता है वहाँ न बदलना ही सही होता है जैसे कि किए, नई, हुआ आदि को इसी तरह लिखा जाना मान्य है, न कि किये, नयी, हुवा आदि रूप में।

तो पूरी हो गयी आज की “पढ़ाई”।आशा है व्याकरण की ये छोटी-छोटी बातें आपको “भायी” होंगी और आप इन पर ध्यान “दीजिएगा”।हमारी किसी भी बात से अगर आपके मन में कोई सवाल हो तो हमसे ज़रूर “बताइए”।

[फ़ोटो क्रेडिट (फ़ीचर्ड इमेज): प्रियंका शार्मा] 

2 thoughts on “व्याकरण की बातें(3): ई और यी, ए और ये में फ़र्क़ और उनका उपयोग

  1. अच्छी जानकारी है। पढ़ने में सरल है पर व्यवहार में लाने में बहुत मुश्किल होती। इनमे से अधिकतर शब्द दिमाग में बैठे हुए। फिर भी कोशिश होगी कि सही ढंग से लिखा जाये।

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