व्याकरण की बातें(8): “ओ” और “औ” की मात्रा में अंतर और उनका उपयोग

व्याकरण कीबातें- “ओ” और “औ” की मात्रा में अंतर और उनका उपयोग

हिंदी वर्णमाला के 52 वर्णों में जो 11 स्वर हैं, उन्हें मात्राओं के रूप में प्रयोग किया जाता है, जब ये स्वर किसी वर्ण में जुड़ते हैं तो उस वर्ण के उच्चारण में इन स्वरों का उच्चारण भी जुड़ जाता है। लेकिन अधिकांश स्वर ऐसे हैं जिनसे बिलकुल ज़रा से अंतर वाले स्वर भी हैं और उनकी मात्राओं में भी बस ज़रा ही अंतर होता है। ऐसे में कई बार मात्राओं और उच्चारण की अशुद्धियाँ होती हैं और तो और कई बार तो शब्द का अर्थ ही बदल जाता है और वाक्य में अर्थ का अनर्थ हो जाता है। इन अशुद्धियों को टालने के लिए ही हमें स्वरों के उच्चारण और मात्राओं का अंतर समझना ज़रूरी होता है।साथ ही कुछ उदाहरण के साथ इन अंतरों को जानने की कोशिश भी करनी चाहिए।

आज हम जिन स्वरों की बात करेंगें वो हैं; और

 

उच्चारण:

 जैसा कि पिछले हफ़्ते की पोस्ट में हमने बताया था कि सही उच्चारण जानने का एक सबसे सरल रास्ता है, पुराने फ़िल्मी गीत। पुराने इसलिए कि उस समय नए-नए शब्दों और नए उच्चारण का उपयोग आज की तरह नहीं होता है, नुक़्ते वग़ैरह भी अगर साफ़ सुनना हो तो भी पुराने फ़िल्मी गीत कारगर हो सकते हैं।तो सबसे पहले “और के उच्चारण को जानते हैं।

के सही उच्चारण के लिए आप सुन सकते हैं- “तीसरी मंज़िलफ़िल्म का गीत “ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जाने जहाँ”..अब ये बात भी ध्यान में रखने की है कि जिस भी अक्षर में “ की मात्रा लगेगी उसका उच्चारण उस अक्षर के साथ “” का स्वर लिए होगा। जैसे इसी गीत की लाइन में ज़ुल्फ़ोंवालीमें ज़ुल्फ़ों”के आख़िरी अक्षरका होगा। इसी तरह बाक़ी अक्षरों का भी उच्चारण आप कर सकते हैं।

अब के सही उच्चारण के लिए आप सुन सकते हैं- 1984 में आयी सनी”  फ़िल्म का गीत “और क्या अहदे वफ़ा होते हैं …ये बात भी ध्यान में रखने की है कि जिस भी अक्षर में “औ”की मात्रा लगेगी उसका उच्चारण उस अक्षर के साथ का स्वर लिए होगा।

उच्चारण जानने के बाद सही मात्रा लगाना काफ़ी आसान काम है। अक्सर मात्राएँ आपस में बदल दी जाती हैं और इससे शब्द ही ग़लत हो जाता है या उसका अर्थ बदल जाता है। “” और “” की मात्राएँ समझना आसान है, क्योंकि ये इन वर्णों के साथ लगी ही होती हैं, जब “ओ” या “औ” नहीं लिखा जाता है तब बस पीछे की मात्रा किसी भी वर्ण के साथ लग जाती है। दोनों मात्राओं में फ़र्क़ ये हैं कि “” की मात्रा एक खड़ी रेखा के साथ ऊपर एक आड़ी रेखा के रूप में() लगती है और “” की मात्रा एक खड़ी रेखा के साथ ऊपर दो आड़ी रेखा के रूप में()लगती है।

” की मात्रा वाले कुछ शब्द हैं: तोता, घोड़ा, कटोरी, बोतल, बोली, दोपहर, भोजन आदि।

” की मात्रा वाले कुछ शब्द हैं: दौड़, दौलत, सौदा, फ़ौजी, मौक़ा, गौरव आदि।


अर्थ परिवर्तन

कई बार मात्राओं की अदल-बदली से पूरे शब्द का अर्थ बदल जाता है। “ओ” और “औ” से जुड़े कुछ ऐसे ही शब्द अब आपको बताते हैं। पहले “ओ” की मात्रा लगे शब्द और बाद में “औ” की मात्रा लगे शब्द। दोनों के अर्थ उनके बाज़ू में कोष्ठक में लिखे हैं और नीचे उनसे एक वाक्य बनाकर उनके अर्थ को सरलता से समझने का प्रयास है।

ओर- (तरफ़,पक्ष, सिरा)

और- (तथा, ज़्यादा)

वाक्य– मोहन घर की “ओर”बढ़ रहा था “और” उसके हाथ में किताब भी नहीं थी।

शोक-(दुःख)

शौक़- (रुचि)

वाक्य- अपने खेल के “शौक़” को पूरा करने के लिए उसने कितनी मेहनत की और अब अपनी असफलता का “शोक” मना रहा है।

मोर- (मयूर)

मौर- (सिर पर पहना जाने वाला एक आभूषण)

वाक्य– सिर “मौर” धरते ही उसके चेहरे पर मुस्कान ऐसे खेल रही थी, मानो “मोर” ने बादल देख लिया हो।

बोर- (अंग्रेज़ी/ ऊबना)

बौर- (आम की मंजरी) 

वाक्य- गरमियों में वैसे तो घर में रहते-रहते “बोर” हो जाते हैं, एक बार आम के पेड़ में “बौर” आ जाएँ न फिर कोयल की मीठी तान में मन लगा रहता है।

लोटा(धातु का कलश जैसा पात्र)  

लौटा(लौटकर आने की क्रिया)

वाक्य- एक बार जो “लोटा” घर से गुम हुआ फिर वो कभी नहीं “लौटा

खोलना(बंधन रहित करना, आवरण हटाना)

खौलना-(उबलना, जोश में आना)

वाक्य– मेरा दरवाज़ा “खोलना” था कि वो सीधे अंदर भागा चूल्हे पर चढ़ा पानी “खौलना” शुरू हो गया था।

कोर- (किनारा, कोना)

कौर- (ग्रास, निवाला)

वाक्य– उसकी आँखों की “कोर” नम हो गयी जब उसने एक बच्चे को सूखी रोटी का “कौर” निगलते देखा।

लोटना-(लेटना, इधर-उधर गिरना पड़ना)

लौटना(वापस आना, मुड़ना)

वाक्य- मुझे देखते ही शेरू ने ख़ुशी से ज़मीन में “लोटना” शुरू कर दिया, उसकी ख़ुशी देख लगा कि घर “लौटना” सफल रहा।

आज की पोस्ट में हमने मात्राओं की “ओर” ध्यान दिया “और” मात्राओं के हेरफेर से अर्थ में “मौक़ा” कैसे “धोके” में बदल सकता है, ये भी जाना। कोयल की बोली मीठी लगती है क्योंकि वो, सुर में होती है, वैसे ही हम चाहें तो अपनी भाषा की रौनक़ व्याकरण से बढ़ा सकते हैं। ये मौज-मस्ती का काम है कोनौकरी की भाग-दौड़ नहीं है।

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