गड्ढे में रसगुल्ला

ननकू छोटी कुर्सी में बैठा था और उसके एक ओर चीकू और दूसरी ओर रसगुल्ला बैठे थे। इन्हें यहाँ बिठाकर पापा और माँ खाने का ऑर्डर देने गए थे। मौसी दादी के घर जाते-जाते पापा ने बीच में खाने के लिए गाड़ी रोकी थी और सब यहाँ आकर बैठे थे, चीकू ननकू से नाराज़ नहीं था इसलिए उससे सटकर बैठा था रसगुल्ला दूसरी ओर बैठा था और अपनी छोटी-छोटी शरारतें कर रहा था। इसी बीच रसगुल्ला की नज़र साइड में खेलते एक बच्चे की बॉल पर गयी जो लुढ़कती हुई जा रही थी, बस रसगुल्ला कूदा और बॉल के पीछे भागा। ननकू रसगुल्ला को जाते देख चिल्लाया-

“रसगुल्ला..कहाँ जा रहा है..?..रुक”

पर रसगुल्ला ने तो सुना ही नहीं और बॉल के पीछे भागने लगा। ननकू भी झट से कुर्सी से उतरकर रसगुल्ला के पीछे जाने को हुआ कि माँ आ गयीं उन्होंने ननकू को रोककर पूछा- “कहाँ चले..?

“माँ, रसगुल्ला उधर गया है..अकेले-अकेले..मैं उसको लेकर आता हूँ”- कहते हुए ननकू भी भागा और उसके पीछे चीकू भी चल पड़ा।

माँ कुर्सी में बैठते हुए बोलीं- “ज़्यादा दूर नहीं जाना..ये बच्चे भी न”

पापा भी तब तक आ गए थे वो बच्चों को देखने निकले। इधर ननकू और चीकू को रसगुल्ला को ढूँढते-ढूँढते होटल के पीछे तक आ गए लेकिन उन्हें तो रसगुल्ला मिल ही नहीं रहा था। ननकू ने आवाज़ लगायी – “रसगुल्ला..रसगुल्ला..कहाँ हो?”

रसगुल्ला की कोई आवाज़ भी नहीं आयी..ननकू तो रसगुल्ला का नाम पुकारे जा रहा था – “रसगुल्ला..रसगुल्ला..रसगुल्ला”

कहीं दूर से रसगुल्ला की धीमी सी आवाज़ आयी..ननकू तो सुन नहीं पाया लेकिन चीकू ने सुन लिया..उसे ये पता भी चल गया कि रसगुल्ला कहीं आसपास ही है। ननकू वहाँ से चलने को हुआ-
“चीकू यहाँ रसगुल्ला नहीं मिल रहा चल उधर देखते हैं”

चीकू भी ननकू के साथ दूसरी तरफ़ जाने लगा..वो बार-बार पीछे देखते जाता जहाँ से उसे रसगुल्ला की आवाज़ सुनाई दी थी, लेकिन वो ननकू को बताए कि नहीं यही सोच रहा था तभी एक बार और रसगुल्ला की धीमी आवाज़ चीकू के कानों में पड़ी, दिन भर शरारतें करने वाला रसगुल्ला ऐसी घबरायी आवाज़ में पुकार रहा था कि चीकू से रहा ही नहीं गया और वो दौड़ पड़ा उसी ओर जहाँ से रसगुल्ला की आवाज़ आयी थी। ननकू भी चीकू के पीछे भागा..चीकू आसपास खोजने लगा। ननकू पुकारने लगा “रसगुल्ला..रसगुल्ला..रसगुल्ला”

तभी रसगुल्ला ने आवाज़ दी और आख़िर चीकू और ननकू जब उस जगह पहुँचे तो उन्होंने देखा रसगुल्ला एक छोटे गड्ढे में गिरा हुआ है बॉल भी उसके साथ ही है। रसगुल्ला, ननकू और चीकू को देखकर रो पड़ा, ननकू भी रसगुल्ला को देखकर रुआँसा हो गया, यहाँ तक कि चीकू की आँखें भी नम हो गयी। ननकू सोच ही रहा था कि रसगुल्ला को कैसे निकाले तभी चीकू ने उस गड्ढे में छलाँग लगा दी। चीकू के वहाँ पहुँचते ही रसगुल्ला झट से उसके पास चिपट गया। कुछ देर तो चीकू झिझका लेकिन फिर उसने प्यार से रसगुल्ला को चाटा तो रसगुल्ला उससे और चिपट गया। इतने में पापा उन्हें ढूँढते वहाँ तक आ गए ननकू ने पापा को देखते ही कहा
“पापा चीकू और रसगुल्ला…”

पापा पास पहुँचे तो उन्होंने देखा चीकू और रसगुल्ला गड्ढे में हैं। दोनों को पापा ने बाहर निकाला और सबको हाथ-पैर धुला के माँ के पास लेकर आए। पापा की गोद में चीकू और ननकू की गोद में रसगुल्ला दुबके हुए थे। बाद में पापा ने चीकू को ननकू के पास बिठा दिया लेकिन रसगुल्ला तो अभी भी डरा हुआ था, उसे अपने बचपन की बात याद आ गयी जब वो अपनी माँ से ऐसे ही बिछड़ गया था। वो तो रोए जा रहा था..माँ ने उसे गोद में लेना चाहा तो वो आ ही नहीं रहा था, बस ननकू से चिपटा था। किसी तरह माँ ने उसे बोतल से दूध पिलाया। ननकू ने रुआँसा होकर माँ से कहा-

“माँ रसगुल्ला को क्या हो गया?..ये कितना रो रहा है”

माँ ने ननकू को गले लगाया और उसे समझाते हुए बोलीं- “ये गिर गया था तो डर गया है। अब तेरे पास है न जल्दी से खेलने लगेगा”

माँ ने रसगुल्ला को पुचकारा। ननकू ने भी रसगुल्ला को पुचकारा और फिर पास बैठे चीकू को गले लगाते हुए बोला- “थैंक यू चीकू..तू कितनी जल्दी से गड्ढे में रसगुल्ला को बचाने चला गया”
चीकू ननकू के गले लगे-लगे रसगुल्ला को प्यार से देख रहा था। खाना खाकर जब सब गाड़ी में बैठे तो माँ ने ड्राइविंग सीट सम्भाली पापा बाज़ू में आराम से बैठे। पीछे ननकू और चीकू के बीच में रसगुल्ला को सुला दिए थे लेकिन माँ ने जैसे सिखाया था ननकू पूरे टाइम रसगुल्ला को सहला रहा था। नहीं तो रसगुल्ला डर जाता था..गाड़ी चलते-चलते ननकू भी रसगुल्ला पर हाथ रखे-रखे सो गया था। इसी बीच रसगुल्ला डरकर उठा तो चीकू झट से रसगुल्ला को चाटने लगा। रसगुल्ला आँख खोलकर चीकू को देखा और फिर इत्मिनान से सो गया। अब उसे समझ आ गया था कि वो ननकू और चीकू के साथ सुरक्षित है। माँ दोनों का प्यार देखकर मुस्कुरा दी।

(देखा आपने आख़िर चीकू और रसगुल्ला की दोस्ती हो ही गयी। नाराज़गी कभी भी बड़ी नहीं होती और उसे ज़्यादा लम्बा खींचना भी नहीं चाहिए, ज़रा सोचो अगर चीकू उस समय रसगुल्ला के बारे में ननकू को नहीं बताता तो..रसगुल्ला कभी मिल भी नहीं पाता। लेकिन चीकू ने झट से रसगुल्ला का पता भी बताया और उसकी मदद के लिए गड्ढे में कूद भी गया। यही तो होती है दोस्ती जब मदद की ज़रूरत हो तब तुरंत मदद करने के लिए आगे आना। अभी भी देखो कितने प्यार से चीकू रसगुल्ला और ननकू दोनों को चाट रहा है। अब तीनों की दोस्ती हो गयी है तो मौसी दादी के घर कितनी मस्ती होगी ये सोचना बाद में..अभी तो चीकू भी रसगुल्ला के पास लगकर सो गया है)

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