ईद की सेंवई

“ननकू..गार्डन में नहीं जाना अभी”- माँ ने पीछे से आवाज़ दी

ननकू बरामदे के पास खड़ा हो गया और पलट के माँ को देखने लगा..रसगुल्ला एक सीढ़ी नीचे उतर गया था वो भी वापस चढ़ के शराफ़त से ननकू के पास खड़ा हो गया। आज ननकू ने सफ़ेद कुर्ता और पायजामा पहना हुआ था। नानी अपने कमरे से बाहर आयीं और ननकू को देखकर ख़ुश हो गयीं

“अरे वाह..आज तो मेरा लड्डू रसगुल्ला के रंग में रंग गया है..कित्ता प्यारा लग रहा है..सुमन इसकी नज़र उतार दे”

“कुछ नहीं होता माँ..अभी गार्डन में जाने दूँ एक बार में ख़ुद ही सारी नज़र उतर जाएगी..”- माँ मुस्कुराते हुए बोलीं

“माँ हम कब जाएँगे?”- ननकू ने पूछा

“चलेंगे बच्चा..रुक जाओ थोड़ी देर बेनज़ीर मौसी फ़ोन करेंगी न तब चलेंगे”

“तब तक खेलने नहीं मिलेगा..?”- ननकू ने मुँह उतार के पूछा

“क्यों नहीं मिलेगा..?..जाओ अंदर बैठ के खेलो दोनों..रसगुल्ला को पहले दूध पीने दे और तू भी आ जा कुछ खाने”- माँ ने कहा

“पर हम तो पार्टी में जा रहे हैं न?”- ननकू झट से बोला

“हाँ..लेकिन अभी देर लगेगी तो तब तक कुछ खा लो..फिर बेनज़ीर मौसी के यहाँ मिलेगी सेंवई”

“सेंवई…???मेरी फ़ेवरेट…रसगुल्ला को भी बहुत पसंद है..रसगुल्ला हम सेंवई खाएँगे”- ननकू ख़ुशी से झूमते हुए बोला..रसगुल्ला भी पूँछ हिलाकर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करने लगा

माँ के चेहरे पर थोड़ी शिकन आयी, उन्होंने नानी की तरफ़ देखा..नानी ने इशारा किया कि वो बात संभाल लेंगीं। ननकू और रसगुल्ला तो ख़ुशी से नाच रहे थे। नानी पास की कुर्सी में जाकर बैठ गयीं और ननकू को अपनी गोद में बिठाते हुए बोलीं

“ननकू, पता है बेनज़ीर मौसी का घर दूर है…और रसगुल्ला अभी छोटा बेबी है, उसको उतनी दूर नहीं ले जा सकते”

“तो मैं भी तो छोटा बच्चा हूँ..माँ मुझे लेके जा रही है”- ननकू ने अपना तर्क दिया

“हाँ..आपको तो माँ लेकर जा रही है आप थक जाओगे तो माँ आपको गोद में उठा लेगी लेकिन रसगुल्ला थक गया और तुम भी थक गए तो माँ दोनों को गोद में लेगी तो माँ भी थक जाएगी फिर कैसे वापस आओगे”- नानी ने कहा

ननकू सोच में पड़ गया और रसगुल्ला को देखने लगा। रसगुल्ला अभी भी ख़ुश था, ननकू ने बहुत सोचकर कहा “लेकिन मैं चला जाऊँगा तो रसगुल्ला अकेले में रोएगा..मैं भी नहीं जाता”

“तू नहीं जाएगा तो माँ अकेली हो जाएँगी ..रसगुल्ला अकेला थोड़ी है मैं हूँ न उसकी नानी..रसगुल्ला नानी के पास रहेगा..मैं इसका ख़ूब ख़याल रखूँगी..”

“नानी आप इसको कहानी भी सुनाओगे..?”- ननकू ने पूछा

नानी ने हाँ में सिर हिलाया। ननकू कुछ सोचकर रसगुल्ला के पास बैठ गया और उसे अपनी गोद में उठाकर समझाते हुए बोला- “रसगुल्ला..बहुत दूर जाना पड़ेगा तो तू नानी के पास रहना?..नानी तुझे कहानी भी सुनाएँगी..डॉली मौसी से लेकर खाना खा लेना..मैं झटपट वापस आ जाऊँगा”- ये कहते हुए ननकू थोड़ा उदास हो गया। नानी ने ननकू को गले लगाया और प्यार करते हुए बोलीं

“मेरा लड्डू…मेरा बच्चा..ऐसे उदास नहीं होते..रसगुल्ला बहुत अच्छे से रहेगा..नानी प्रॉमिस”- ननकू ख़ुश हो गया।

बेनज़ीर मौसी का फ़ोन आ गया और माँ ननकू को लेकर आगे चौक तक के लिए रिक्शे में निकल गयीं वहाँ से उन्हें बेनज़ीर मौसी की गाड़ी पिक करने वाली थी। जब माँ और ननकू निकले तो रसगुल्ला दौड़-दौड़ कर पीछे जाने लगा नानी ने उसे गोद में उठा लिया.. ननकू का मन भी रसगुल्ला में लगा था जब ननकू ने पलट के देखा तो नानी ने रसगुल्ला के सामने के पैर को उठाकर ननकू को बाय करवाया। ननकू को मज़ा आ गया।

माँ और ननकू पहुँच गए बेनज़ीर मौसी के घर..बेनज़ीर मौसी ने माँ को देखते ही गले लगाया और दोनों ने साथ ही कहा-

“ईद मुबारक”

दोनों अपनी पुरानी यादों में खो गए। अंदर बैठने पर बेनज़ीर मौसी ने ननकू के गाल को सहलाकर प्यार किया और उसके पास बैठकर उसे गले से लगा लिया। ननकू को माँ ने इशारा किया कि वो भी बेनज़ीर मौसी को गले लगाएँ। अब ननकू को इसमें मज़ा आने लगा। ननकू के जितनी बड़ी बेनज़ीर मौसी की लड़की आयशा भी थी वो आयी और माँ के गले लगी..बाद में उसने ननकू को भी गले लगाया। वहाँ जो भी आते एक-दूसरे को गले लगाते..बेनज़ीर मौसी अंदर सेंवई लाने चली गयीं..ननकू ने माँ की ओर मुस्कुराकर देखा, माँ ने उसको आँख के इशारे से पूछा तो ननकू माँ के गले लगते हुए बोला-

“माँ.. मौसी ने मुझे ऐसे किया न तो मुझे मज़ा आया..”- माँ मुस्कुराने लगी। इतने में बेनज़ीर मौसी बाहर आ गयीं सेंवई रखते हुए मुस्कुराकर पूछी- “क्या बातचीत चल रही है माँ- बेटे में?”
“अरे भई..इसको तेरा गले लगाना अच्छा लगा..”- माँ बताते हुए बोलीं, ननकू को शर्म आयी जैसे उसका सीक्रेट माँ ने बता दिया हो

“अच्छा जी..आपको हमारी सेंवई भी बहुत अच्छी लगेगी..लीजिए”- बेनज़ीर मौसी ने ननकू को सेंवई की कटोरी देते हुए कहा

ननकू एक चम्मच सेंवई चखते ही चम्मच रख दिया और चुपचाप बैठ गया। माँ, बेनज़ीर मौसी और आयशा ननकू को देखने लगे..
“सुमन..तेरे बेटे को तो सेंवई पसंद नहीं आयी”- बेनज़ीर मौसी बोली..”और कुछ ला दूँ?”

“नहीं..इसको तो सेंवई बहुत पसंद है और कितनी अच्छी बनी है..तू तो हमेशा अच्छी बनाती है तुझसे तो मैं सीखी हूँ…- माँ बोली और फिर ननकू की ओर देखकर पूछी- “क्या हुआ ननकू?”

“माँ..सेंवई तो कितनी अच्छी है..रसगुल्ला को बहुत पसंद आती”- ननकू मुँह उतार के बोला।

बेनज़ीर मौसी को कुछ समझ नहीं आया। वो झट से बोलीं- “रसगुल्ला चाहिए..मैं अभी मंगवाती हूँ”

ननकू ख़ुशी से बोला- “आप रसगुल्ला को ले आओगे?”

“हाँ बेटा..पास में कहीं मिल जाएगा”-बेनज़ीर मौसी ने कहा

“अरे बाबा..इसका रसगुल्ला अलग है..वो हमारे घर में ही मिलेगा”- माँ हँसते हुए बोली और उसने बेनज़ीर मौसी को रसगुल्ला के बारे में बताया। बेनज़ीर मौसी ने ननकू को देखकर उसकी बालाएँ लेने लगीं- “बहुत प्यारा है तेरा बच्चा सुमन”

माँ ने ननकू को मनाया और कुछ देर में ननकू और आयशा खेलने लगे। माँ और बेनज़ीर मौसी बातों में लगे और फिर माँ ने ननकू को घर जाने के लिए पुकारा। जब वो निकलने को हुए तो बेनज़ीर मौसी ने नानी के लिए सेंवई बाँधी और माँ को पकड़ाया। फिर एक छोटा सा डिब्बा ननकू को दिया और बोलीं- “ये तेरे रसगुल्ला के लिए सेंवई बाँध दी हूँ, उसको खिला देना। मैं और आयशा उससे मिलने आएँगे”- मौसी ने ननकू को प्यार किया और उसे गले लगाया। ननकू बहुत ख़ुश हो गया।

जैसे ही ननकू और माँ घर वापस आए कि उसकी आवाज़ सुनकर रसगुल्ला दौड़ता हुआ गेट में ही पहुँच गया ननकू ने रसगुल्ला को गले से लगा लिया और कहा “ईद मुबारक रसगुल्ला”

वहीं के वहीं उसने बेनज़ीर मौसी का डिब्बा खोला और रसगुल्ला झटपट सेंवई खाने लगा और फिर वो ननकू को चाटने लगा..ननकू हँसने लगा। ननकू उठकर नानी के पास आया और नानी को गले लगाकर बोला- “ईद मुबारक नानी”

नानी ने उसको गले से लगाकर प्यार किया और कहा “ईद मुबारक मेरे बच्चे”

ननकू नानी को वहाँ की सारी बातें बताने लगा और रसगुल्ला अपनी सेंवई ख़त्म करके ननकू के पास आकर बैठ गया। माँ बेनज़ीर मौसी की दी हुई सेंवई कटोरियों में डालकर नानी के पास ले आयीं। नानी सेंवई खाते हुए ननकू की बातें सुनने लगीं।

(सेंवई की बात पढ़ते हुए आपको भी उसका स्वाद आने लगा न तो जाइए अपने पहचान के घर में और कहिए अपने दोस्तों से “ईद मुबारक”…आपका हर दोस्त होता है प्यारा। अभी तो ननकू नानी को सारी बात बताने के बाद थोड़ी साई सेंवई और खाने वाला है)

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