दोस्ती की पहचान

दोस्ती की पहचान

ननकू सोच में डूबा हुआ था कि रसगुल्ला उसके पास आया..ननकू तो सोच ही रहा था कि रसगुल्ला ने उसके पैर के पास कुछ रखा ननकू ने देख रसगुल्ला उसके लिए पानी की बोतल लाया था। ननकू ने ले लिया तो रसगुल्ला पास खड़े होकर उसके पैर पर अपने दोनों अगले पैर रखकर उसे चाटने लगा। ननकू ने उसे गोद में लिया और प्यार किया।

“रसगुल्ला, तू मेरा बेस्ट फ़्रेंड है क्या?..हम साथ में कितना अच्छे से खेलते हैं जिस दिन से तू मिला है हमेशा मेरे साथ ही रहता है..कितनी दूर से मेरे साथ यहाँ भी आ गया”- ननकू ये सोचते हुए बोल रहा था और रसगुल्ला ये बात सुनकर बड़ा ख़ुश हो गया। वो तो ननकू की गोद में ही कूदने लगा।

तभी वहाँ आ पहुँचा चीकू, रसगुल्ला को कूदते देख चीकू को लगा कि कहीं ननकू ने इसे ही अपना बेस्ट फ़्रेंड तो नहीं चुन लिया। चीकू झट से ननकू के पास जा पहुँचा और ननकू का जूता, जिसे चबाना चीकू को बहुत पसंद था, उसे ननकू को दे दिया। ननकू को बहुत हैरानी हुई क्योंकि चीकू को ननकू का वो जूता इतना अच्छा लगता था कि ननकू उसे सिर्फ़ एक ही बार पहन पाया था और जैसे ही ननकू ने जूता उतारा था कि वो चीकू के क़ब्ज़े में चला गया था। तब से चीकू उसे अपने पास ही रखता था और बड़ी अच्छी तरह चबाता था। यहाँ तक कि जूते में अभी भी चीकू के दाँतो के निशान बने थे। पर अभी- अभी चीकू ने उसे ननकू के सामने लाकर रख दिया और ज़रा दूर खड़े होकर पूँछ हिलाता हुआ अपनी दोस्ती साबित कर रहा था। मानो चीकू कह रहा था कि “अपनी फ़ेवरेट चीज़ तुम्हें दे दी, अब दोस्ती की और क्या मिसाल दूँ?”

ननकू को समझ आ गया था कि चीकू और रसगुल्ला अपनी-अपनी दोस्ती साबित करना चाहते हैं। चीकू तो बचपन से उसके साथ है रसगुल्ला बाद में मिला है तो कहीं चीकू ही उसका बेस्ट फ़्रेंड तो नहीं है? ये ख़याल अब ननकू को आने लगा था। तभी उसे याद आया कि यहाँ चीकू और रसगुल्ला में से नहीं बल्कि चीकू, रसगुल्ला और बबलू में से किसी एक को बेस्ट फ़्रेंड चुनना है।

बीते कल की कहानी:

दोस्ती का सवाल

बबलू का नाम याद आते ही ननकू को वो सारी मस्तियाँ याद आने लगीं जो बबलू और ननकू स्कूल में करते हैं। साथ में कितनी सारी पढ़ाई भी दोनों ने की थी और एक बार जब पिंकू ने ननकू की क़मीज़ में पेंसिल से लिख दिया था तो बबलू ने कैसे पिंकू की शिकायत मैडम से कर दी थी। मैडम ने पिंकू को डाँटा था बाद में पिंकू ने माफ़ी भी माँगी थी। बबलू के घर तो ननकू बचपन से जाता है, माँ और रमा चाची बताती हैं कि बबलू और ननकू साथ-साथ बड़े हुए हैं। जब दोनों को बोलना भी नहीं आता था तब भी दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े रहते थे। तब तो बबलू मेरा सबसे पहला फ़्रेंड है।

ननकू ये सब सोचते हुए बाहर ही बैठा था कि दादी बाहर आयीं। बहुत देर से उन्होंने ननकू, चीकू और रसगुल्ला की आवाज़ नहीं सुनी थी। बाहर आकर देखा तो ननकू कुर्सी में बैठा सोच में डूबा है और रसगुल्ला और चीकू सामने बैठकर उसको देख रहे हैं। दादी ननकू के पास बैठ गयीं और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा- “क्या हुआ ननकू..क्या सोच रहा है मेरा बच्चा?”

“दादी, जो पहला फ़्रेंड होता है वही बेस्ट फ़्रेंड होता है?”- ननकू ने दादी के सामने अपना सवाल रख दिया

“ऐसा कोई ज़रूरी नहीं है..कभी- कभी पहला फ़्रेंड ही बेस्ट फ़्रेंड होता है और कभी-कभी बेस्ट फ़्रेंड बाद में मिलता है”

“अच्छा..फिर तो बहुत मुश्किल है..मैं तब से सोच रहा हूँ कि मेरा बेस्ट फ़्रेंड कौन है बबलू, चीकू या रसगुल्ला?”- ननकू उदास होता हुआ बोला

“तो ये बात है..और दादी का नाम कहाँ है? मैं नाराज़ हो रही हूँ”- दादी ने मुँह बनाते हुए कहा

“नहीं न दादी..आप तो मेरी दादी हो न..” ननकू मनाते हुए बोला

“अच्छा एक बात बता..बेस्ट फ़्रेंड कौन होता है?”

“बेस्ट फ़्रेंड…”ननकू सोच में पड़ गया “वो तो मुझे नहीं पता”

“बेस्ट फ़्रेंड कौन होता है ये नहीं पता, तो बेस्ट फ़्रेंड का पता कैसे चलेगा?”- दादी मुस्कुराती हुई बोलीं

“आप बताओ न बेस्ट फ़्रेंड कौन होता है?”- ननकू दादी की गोद में बैठता हुआ बोला

“बेस्ट फ़्रेंड वो होता है जिससे आप सारी बात बता सकते हो, जिसके साथ आप खेल सकते हो, पढ़ाई कर सकते हो, खाना खा सकते हो, ढेर सारी मस्ती कर सकते हो। बेस्ट फ़्रेंड आपसे नाराज़ हो जाए तो आप उसको मनाकर ही छोड़ते हो और उसको अपने पास रखते हो..बेस्ट फ़्रेंड के साथ आपको बहुत अच्छा लगता है..समय का पता ही नहीं चलता और उसको भी आपके साथ इतना ही अच्छा लगता है..समझा?”

दादी की ये बात सुनते- सुनते ननकू ख़ुश हो गया और उसने झट से दादी को गले से लगा लिया और बोला “समझ गया दादी और मुझको मेरा बेस्ट फ़्रेंड भी मिल गया”

“अच्छा..वाह..मुझे बता कौन है तेरा बेस्ट फ़्रेंड?”- दादी ने ननकू के गाल सहलाते हुए पूछा

“अभी बबलू को आने दो फिर बताऊँगा, दादी”- ननकू इतना बोला और चीकू, रसगुल्ला के साथ खेलने लगा। दादी उसे वापस खेलते देख ख़ुश हो गयीं। तीनों की आवाज़ सुन माँ बाहर आयीं और दादी को देखकर मुस्कुरायीं

“क्यों भई ननकू..मिल गया बेस्ट फ़्रेंड?”- माँ ने पूछा

“हाँ माँ..मिल गया मुझे बेस्ट फ़्रेंड” कहकर ननकू वापस खेलने लगा।

माँ ने दादी से इशारे से पूछा तो दादी ने भी सिर हिलाकर बता दिया कि उन्हें भी नहीं पता।

(पता तो हमें भी नहीं है कि ननकू का बेस्ट फ़्रेंड आख़िर है कौन?..ननकू को पता चल गया है तो हमें भी पता चल जायेगा..एक बार बबलू आ जाए तो सभी को पता चल जाएगा कि ननकू का बेस्ट फ़्रेंड आख़िर है कौन? वैसे आपको अपना बेस्ट फ़्रेंड तो पता है न या आप भी ननकू के जैसे इतनी ही उलझन में हैं?)

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