सोनल सोनकवड़े का उपन्यास “कॉमा” अंत तक बांधे रखने वाली दमदार कहानी..

अक्सर हमें अपने बड़ों से ये सुनने मिलता है कि आजकल के बच्चों के दिमाग़ में क्या चलता है समझ ही नहीं आता। ये हम अपने आसपास के लोगों के लिए भी कई बार कहते हैं, ख़ासकर तब जब वो किसी रिश्ते में होते हैं या उस रिश्ते से निकले होते हैं। रिश्ते टूटना इन दिनों आम बात लगने लगी है लेकिन हर टूटा रिश्ता एक गहरी टीस छोड़ जाता है, साथ ही उससे जुड़े व्यक्ति के जीवन में भी कई बदलाव छोड़ता है।

सोनल सोनकवड़े की लिखी किताब “कॉमा” कुछ ऐसी ही भावनाओं को उजागर करती है। इस कहानी की नायिका परी जिसके पास अपनी बेहतरीन जॉब है। अपने टूटे रिश्ते की कड़वाहट से भरी है ख़ुद को दूसरा मौक़ा देना चाहती है लेकिन अब उसके विचार इस मामले में अलग हैं। अब उसे नहीं लगता कि किसी भी व्यक्ति पर ज़्यादा समय इन्वेस्ट किया जाए क्योंकि अगर वो भी धोखा दे दे तो पछतावे के सिवा हाथ में कुछ नहीं है।

“Wasn’t life meant to be lived freely, without binding it in chains? She realised that life also turns out the way we treat it. Keep it simple and life becomes smooth. Complicate it and it becomes difficult to live. Give it a chance, and it becomes beautiful.”

नायिका के माध्यम से लेखिका सोनल ने समाज में लड़कियों को लेकर चलती सोचा उर उसके कारण लड़कियों की बदलती सोच को बख़ूबी बयान किया है। वहीं दूसरी ओर लेखिका पाठकों को ये धीरज भी देती हैं कि हार मानकर बैठने की ज़रूरत नहीं है। एक ओर जहाँ वो लड़कियों की बदलती भावना बताती हैं वहीं वो लड़कों की मनस्थिति को भी बख़ूबी बयान करती हैं। कहानी का नायक विनय भी अपने टूटे रिश्ते की याद से जूझ रहा है।

“Memories aren’t easy to erase. Frankly, I don’t believe in erasing them either. All you need to do is get new moments in life that replace the old memories. Life is actually very simple, Not as complicated as most of us make it out to be.”

विनय को अब कहीं ख़ुशी न मिल पाने की सोच घेरे हुए है। ऐसे में परी और विनय एक दूसरे से इंटर्नेट के माध्यम से मिलते हैं और उन्हें लगता है कि दुबारा उन्हें प्यार मिल गया है। पर वक़्त ऐसी करवट लेता है कि परी विनय को अपनी ज़िंदगी से अलग कर देती है। विनय सारी साइट्स से ब्लाक हो चुका होता है और उसे पता चलता है कि परी का असली नाम तक उसे नहीं पता। अपने प्यार को ढूँढने के लिए विनय निकल पड़ता है।

“The things that come into your life like a breeze stay longer and steady whereas things that enters your life like a storm vanish quickly.”

कहानी इस तरह एक रोमांचक मोड़ लेती है। पूरी। कहानी में आपको बांधे रखने की ताक़त है साथ ही लेखन बिलकुल बहते पानी की तरह है आप रौ में पढ़ते हुए किताब ख़त्म करके ही उठते हैं। कई जगह ऐसी बातें सामने आती हैं जहाँ आप कह उठते। हैं कि आपने ये अपनी ज़िंदगी में देखा है या तो आपने अपने किसी दोस्त के साथ ऐसा होते देखा होगा या आपने महसूस किया होगा।

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जहाँ एक ओर मन की अलग-अलग उलझन और भावना को दर्शाते हुए कहानी पिरोयी गयी है, वहीं कहीं भी बोझिलता का एहसास नहीं होता। लेखिका सोनल सोनकवड़े ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। उनकी लेखनी में वो बात है जो पाठकों को उन्हें ज़्यादा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस किताब के ज़रिए टूटे रिश्ते से झूझती भावनाओं को समझने में बहुत मदद मिल सकती है। साथ ही कहानी की शुरुआत ही इतनी रोमांचक है जो आपको अंत तक बांधे रखती है।

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