शाइरी की बातें

शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(11): वज़्न करने का तरीक़ा (8)

इसके पहले हमने आपको वज़्न करने के बारे में भी बताया है और साथ ही साथ हमने आपको शाइरी के आठ रुक्न भी बताये हैं. हम आज आपको बताने जा रहे हैं उर्दू शाइरी में इस्तेमाल में लायी जाने वाली बह्र के बारे में. ग़ज़ल के बारे में ये बात जाननी बहुत ज़रूरी है कि […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(10): वज़्न करने का तरीक़ा (7)

शा’इरी में यूँ तो ख़याल की पुख़्तगी बहुत अहम् है लेकिन सिर्फ़ अच्छा या नया ख़याल होना ही शा’इरी नहीं हो जाएगा. ये बात बहुत ठीक से समझने की है कि शा’इरी सिर्फ़ फ़िलोसफ़ी नहीं है, फ़लसफ़े के साथ आहंग या मौसिक़ीयत (संगीत) का होना भी उतना ही ज़रूरी है. आजकल के दौर में जबकि […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(9): वज़्न करने का तरीक़ा (6)

वज़्न की बातें सिरीज़ में हमने इसके पहले आपको बताया था कि किस तरह से कुछ शब्दों का वज़्न होता तो 21 है लेकिन कुछ लोग 12 ले लेते हैं. इसमें हमने जो शब्द बताये थे वो ऐसे थे जिसमें कुल तीन अक्षर थे और बीच का अक्षर “ह” था और आख़िर का “र”, जैसे […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(8): वज़्न करने का तरीक़ा (5)

वज़्न की बातें सिरीज़ में हमने आपको पहले ही बताया है कि कोई भी शेर तब तक शेर नहीं हो सकता जब तक कि उसका वज़्न ठीक न हो. हम जानते हैं कि एक शेर के दोनों मिसरों का वज़्न एक ही होना चाहिए, अगर ये अलग होता है तो शेर बे-वज़्नी हो जाएगा. इसके […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(7): वज़्न करने का तरीक़ा (4)

आम बोलचाल की भाषा में और लिखने में भी हमने देखा है कि हम ‘मेरे’,’तेरे’,’एक’ इत्यादि अलफ़ाज़ का इस्तेमाल करते हैं लेकिन शा’इरी में हम देखते हैं कि कभी-कभी इन्हीं अलफ़ाज़ को ‘मिरे’,’तिरे’,’इक’ क्रमशः पढ़ा जाता है. ‘शाइरी की बातें‘ सीरीज़ में हमने आपको वज़्न के बारे में कुछ बातें बतायी हैं, देखा जाए तो […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(6): वज़्न करने का तरीक़ा (3)

साहित्य दुनिया की इस सीरीज़ में हमने ‘वज़्न’ को लेकर कुछ बातें की हैं, आगे कुछ और बातें भी इस बारे में होंगी. इससे पहले कि हम आगे की बातें करें, जो अब तक हमने सीखा है उसी को दुहरा लेते हैं. इसी के साथ ही हमने सोचा है कि हम रोज़ आपको एक शे’र […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(5): वज़्न करने का तरीक़ा (2)..

तीन अक्षर वाले शब्दों का वज़्न जैसा कि हमने पहले की पोस्ट में बताया है कि किसी भी अक्षर या अक्षर के जोड़े का वज़्न 1 या 2 ही लिया जाएगा, ऐसे में जब शब्द तीन अक्षर का होता है तो उसको हमें दो हिस्सों में करना होता है. आइये समझने की कोशिश करते हैं- […]

Read More
शाइरी की बातें

शा’इरी की बातें(4): वज़्न करने का तरीक़ा (1)

इसके पहले कि हम आगे की बात करें मिर्ज़ा ग़ालिब के एक शे’र की मदद से वज़्न क्या है ये समझने की कोशिश करते हैं- बदल कर फ़क़ीरों का हम भेस ‘ग़ालिब’, तमाशा ए अहले करम देखते हैं इसका वज़्न करके आपको दिखाते हैं- ब(1)दल(2)कर(2) फ़(1)क़ी(2)रों(2) का(1)हम(2)भे(2) स(1)ग़ा(2)लिब(2), त(1)मा(2)शा(2) ए(1)अह(2)ले(2) क(1)रम(2)दे(2) ख(1)ते(2)हैं(2) अगर नोटिस करें […]

Read More
शाइरी की बातें

शाइरी की बातें (3): नज़्म क्या है?

नज़्म अरबी ज़बान का लफ़्ज़ है जिसका अर्थ होता है ‘पिरोना’,’लड़ी’ या ‘कलाम ए शा’इर’. गुज़िश्ता ज़माने में तो शा’इरी को ही नज़्म कहा जाता था. इसका अर्थ ये हुआ कि किसी भी क़िस्म की शा’इरी नज़्म है लेकिन वक़्त के आगे बढ़ने के साथ नज़्म अपने आप में एक क़िस्म के रूप में विकसित […]

Read More
शाइरी की बातें

शाइरी की बातें (2): ग़ज़ल क्या है?

हमने इसके पहले आपको ‘शाइरी क्या है?’ इस बारे में बताया था. आज से हम शाइरी की अलग-अलग क़िस्मों के बारे में बात करेंगे. सबसे पहले बात करते हैं ग़ज़ल की. ग़ज़ल: एक ही ज़मीन में कहे गए अश’आर(शेर का बहुवचन) के समूह को ग़ज़ल कहते हैं. जैसा कि इसके पहले की पोस्ट में हमने […]

Read More
error: Content is protected !!